: मानवता व अध्यात्म का संदेश दे रहा स्वामी नारायण संप्रदाय
Wed, Apr 17, 2024
बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया भगवान रामलला व भगवान स्वामी नारायण का जन्मोत्सव
स्वामी नारायण मंदिर रायगंज में विराजमान भगवान का गर्भग्रह
मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद ने स्वामी नारायण संप्रदाय का डंका न सिर्फ भारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया
नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए संप्रदाय को बढ़ा रहे आगे
भगवान स्वामी नारायण का सजा भव्य श्रृंगार
अयोध्या। रामनगरी में भगवान रामलला का जन्मोत्सव आज बड़े ही हाव भाव के साथ मनाया गया। रामनगरी के प्रतिष्ठित पीठों में शुमार स्वामी नारायण सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ स्वामी नारायण मंदिर रायगंज में दोपहर 12 बजे भगवान रामलला का जन्मोत्सव तो रात्रि 10 बजकर 10 मिनट पर भगवान स्वामी नारायण का जन्मोत्सव बड़े ही.श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरे मंदिर को फूलों व रंगबिरंगी लाइटों से सजाया गया था। वैसे तो भगवान स्वामीनारायण के जन्म स्थली छपिया है जहां पर भगवान का जन्म हुआ तो अयोध्या में भगवान स्वामीनारायण का बाल्यकाल की लीला की। वैसे भी अयोध्या को सभी तीर्थों का मस्तक कहा जाता है। ऐसे में स्वामी नारायण सम्प्रदाय जिसका डंका आज पूरे विश्व में फैला है।स्वामी नारायण सम्प्रदाय का स्वर्णिम इतिहास बिना नर नारायण देव गादीपति आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद सम्भव ही नहीं है। महाराज तेजेन्द्र प्रसाद जी ने स्वामी नारायण सम्प्रदाय का डंका न सिर्फभारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया है। मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के बारे में लोगो को रुबरु कराया। गुजरात के गलियों गलियो में घर घर जाकर भगवान स्वामी नारायण जी की महिमा का गुणगान कर लोगो को सम्प्रदाय से जोड़ा। आज वर्तमान में उनके बेटे नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए सम्प्रदाय को आगे बढ़ा रहे है। अयोध्या के समीप गोंडा की अलख गुजरात तक पहुंच कर पूरी दुनिया को मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के आराध्यदेव बाल स्वरूप घनश्याम प्रभु की जन्मस्थली छपिया से 60 किलोमीटर दूर रामनगरी अयोध्या में नूतन भव्य भवन का निर्माण है जो स्वामी नारायण मंदिर रायगंज के नाम से सुप्रसिद्ध है। स्वामीनारायण का जन्म 1781 में उत्तर प्रदेश के छपिया में घनश्याम पांडे के रूप में हुआ था। 1792 में उन्होंने नीलकंठ वर्षी नाम को अपनाते हुए 11 वर्ष की आयु में भारत भर में सात साल की तीर्थ यात्रा शुरू की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कल्याणकारी गतिविधियां की और इस यात्रा के 9 वर्ष और 11 महीने के बाद वह 1799 के आसपास गुजरात राज्य में बस गए। 1800 में उन्हें अपने गुरु स्वामी रामानंद द्वारा उद्धव संप्रदाय में शामिल किया गया और उन्हें साहजनंद स्वामी का नाम दिया गया। 1802 में अपने गुरु के द्वारा उनकी मृत्यु से पहले उन्हें उद्धव संप्रदाय का नेतृत्व सौंप दिया गया। सहजनंद स्वामी ने एक सभा आयोजित की और स्वामीनारायण मंत्र को पढ़ाया। इस बिंदु से वह स्वामीनारायण के रूप में जाने जाते हैं। उद्धव संप्रदाय को स्वामीनारायण संप्रदाय के रूप में जाना जाता है। सम्प्रदाय के विभिन्न ऐतिहासिक मठ मंदिर आज अपने आराध्य के प्रति अपनी आस्था को प्रदर्शित कर रहा हैं। स्वामीनारायण संप्रदाय आज अपने शिखर पर है ऐसे में राम नगरी अयोध्या का स्वामीनारायण मंदिर अपनी सेवा त्याग के लिए जानी जाती है। अयोध्या के स्वामीनारायण मंदिर के महंत स्वामी शास्त्री अखिलेश्वर दास जी कहते है भगवान श्री स्वामी नारायण जी महाराज अयोध्या में बाल लीला किए थे क्योंकि उनका जन्म स्थान अयोध्या से लगभग 60 किलोमीटर दूर गोंडा स्थित छपिया नामक स्थान पर हुआ था। वर्तमान समय में स्वामीनारायण मंदिर के संस्थान पूरे देश के सभी धार्मिक स्थलों पर विद्वान हैं। शास्त्री अखिलेश्वर दास जी महाराज ने बताया कि अयोध्या सप्तपुरीयों में सबसे महत्वपूर्ण पूरी है और यहां भगवान राम का जन्म हुआ था भगवान राम के जन्म स्थान का विवाद भी समाप्त हो गया भव्य मंदिर का निर्माण शुरु हो गया है। अब देश विदेश से लोग आएंगे ऐसे में अयोध्या का विकास भी होगा। स्वामी नारायण मंदिर रायगंज मे आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद व नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज के सानिध्य में मंदिर अपने शिखर की ऊचाई को छूएगा। मंदिर में जो सेवाएं यहां चलती हैं वह निरंतर चलती रहेगी।
: आज जन्मेंगे राम, अयोध्या में उल्लास
Wed, Apr 17, 2024
मंदिर में गीत, संगीत एवं अध्यात्म की त्रिवेणी बह रही है: महंत रामेश्वरी शरण
रामनगरी के रामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी,कनक भवन, हनुमान बाग, सियारामकिला,श्रावण कुंज समेत हजारों मंदिरों में आज मनाया जायेगा रामजन्मोत्सव
अयोध्या। रामनवमी का महापर्व बुधवार को है, इसको लेकर अयोध्या मानों निहाल सी हो गई है। रामनवमी को लेकर चहुंओर लोगों मेें उल्लास है। योग लगन ग्रहवार तिथि सकल भये अनुकूल चर अरु अचर हर्ष युत राम जनम सुख मूल... राम जन्म का प्रसंग निरूपित करती रामचरितमानस की यह पंक्ति राम जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर साकार प्रतीत हो रही है। राम जन्मोत्सव के लिए मंदिर जहां सजधज गए हैं, वहीं रामनगरी की परिधि में लाखों श्रद्धालु पहुंच चुके हैं और सबके चेहरे पर राम जन्मोत्सव की शुभ घड़ी की प्रतीक्षा का उल्लास झलक रहा है। मंदिरों में गीत, संगीत एवं अध्यात्म की त्रिवेणी बह रही है। मंदिरों में आयोजित हो रहे धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखलाएं पूरे रौ में हैं। समूचा मेला क्षेत्र कथा-प्रवचन व श्रीराम की स्तुतियों से गुंजायमान हो रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा सख्त कर दी है। सुरक्षा की कमान एटीएस व आरएएफ ने संभाल रखी है। ड्रोन कैमरे व सीसीटीवी के जरिए मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। वहीं अयोध्या में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।
रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्रावण कुंज में रामजन्मोत्सव महंत रामरुप शरण महाराज के पावन सानिध्य व मंदिर की वर्तमान महंत रामेश्वरी शरण के संयोजन में मनाया जाएगा।महंत रामेश्वरी शरण कहती हैं कि जन्मोत्सव की तैयारी पूरी हो गई है। अपराह्न 12 बजते ही जन्मोत्सव का उल्लास छलक उठेगा। अबीर-गुलाल एवं पुष्पों की वर्षा होगी। उन्होंने बताया कि श्रावण कुंज में जन्मोत्सव पर सवा क्विंटल धनिया की पंजीरी प्रसाद रूप में भक्तों को वितरित की जाएगी।
: भगवान श्रीराम ने पूरी दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया:प्रभंजनानन्द
Wed, Apr 17, 2024
भगवान की कथा मंगलकारी है,जाे अमंगल का नाश करती है:महंत करुणानिधान शरण
प्रसिद्ध पीठ सियारामकिला झुनकी घाट पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण महाराज के सानिध्य में रामजन्मोत्सव का छाया उल्लास,रामकथा का हुआ शुभारंभ
द्धाराचार्य जगतगुरु स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनियां बाबा के जीवन चरित्र पर आधरित श्री झुनकी चरित पुस्तक का हुआ विमोचन
अयाेध्या। रामजन्म महाेत्सव के पावन अवसर पर सियारामकिला झुनकी घाट दुल्हन की तरह सजी है। परे मंदिर को फूलों से सजाया गया है। मंदिर में 51 वैदिक आचार्य नवाह परायण पाठ कर रहे है। मंदिर में आज से भव्य रामकथा का शुभारंभ हुआ। व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहें है। महाेत्सव काे पीठ के महंत करुणानिधान शरण महाराज ने सानिध्यता प्रदान करते हुए कहा कि भगवान राम जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर में श्रीरामकथा की शुरूवात हाे गई है। भक्तगण कथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ करें। महंतजी ने कि भगवान की कथा मंगलकारी है। जाे अमंगल का नाश करती है। कथा हमें परमात्मा तक पहुंचाने का सबसे सुगम मार्ग है। इसके द्वारा हमें भगवान का सानिध्य मिलता है। अवधधाम में रामकथा का श्रवण करने और कराने से अपार पुण्य की प्राप्ति हाेती है। वह भी जब रामजन्म महाेत्सव चल रहा हाे। ताे उसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अमृतमयी श्रीरामकथा के प्रथम दिवस भक्तों काे रसास्वादन कराते हुए प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ कथाव्यास व्यासपीठ से कथा कहते मंदिर के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक प्रभंजनानन्द शरण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने पूरी दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया। हमें भगवान की मर्यादा का पालन करना चाहिए। आज हम सब राम जन्मोत्सव पर भगवान की अमृतमयी कथा का श्रवण कर रहे हैं। जीव प्रभु राम का अनुसरण करे। उनके बतलाए हुए सच्चाई के मार्ग पर चले। साथ ही उनकी मर्यादा को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे। आज की कथा में आये हुए अतिथियों ने द्धाराचार्य जगतगुरु स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनियां बाबा के जीवन चरित्र पर आधरित श्री झुनकी चरित पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया। झुनझुनियां बाबा की गणना अयोध्या के सिद्ध संतों में की जाती है। श्री झुनकी चरित पुस्तक के लेखक धर्मराज अभय व प्रकाशक निर्भय कुमार है। पुस्तक में विशेष सहयोग प्रीमियम एजेंसी द्धारा हुआ है। कथा के उद्घाटन सत्र में मणिराम दास छावनी के महंत कमलनयन दास, आचार्य पीठ श्री लक्षमणकिला के महंत मैथलीरमण शरण, रंग महल पीठाधीश्वर महंत राम शरण दास,श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय सहित बड़ी संख्या में संताें ने अपने विचार व्यक्त किए।