: चक्रवर्ती राजा दशरथ जी के राज महल में सजी फूलों की भव्य झांकी
Fri, Jul 5, 2024
गेंदा, गुलाब, बेला, रजनीगंधा, गुलाब और कमल के 10 कुंटल फूलों से सजाभगवान धनुषधारी का दरबार
गर्मी और उमस से भगवान को बचाने के लिए फूल बंगला का आयोजन
अयोध्या। वैष्णवनगरी के मंदिरों में तपती गर्मी में भगवान को कूल-कूल रखने के लिए संतों ने फूलबंग्ले की झांकी के आयोजन की परंपरा शुरू की थी। उत्सव के रूप में आयोजित प्राचीन काल की यह परंपरा आधुनिक काल में भी कायम है। वह भी तब जब अधिकांश मंदिरों में पंखे व कूलर की व्यवस्था की जा चुकी है। इसी परंपरा को आज भी बड़ी शिद्दत से निभा रहें। बिंदुगद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में बिंदु संप्रदाय की प्रधान पीठ श्री दशरथ राज महल बड़ा स्थान में बुधवार देर रात फूल बंगला महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। झांकी देर रात तक संतों व भक्तों को मंत्रमुग्ध करती रही। विभिन्न प्रकार के करीब 10 क्विंटल फूलों से सजी झांकी का दर्शन कर भक्त निहाल होते रहे।बुधवार रात करीब नौ बजे धनुषधारी भगवान की महाआरती के साथ शुरू हुए उत्सव का उल्लास रात चढ़ने के साथ ही बढ़ता गया। उत्कृष्ट कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उत्सव की भव्यता को बढ़ा दिया। फूल बंगला में सोहै युगल रसिया... फूलन में सज धज कर युगल सरकार बैठे हैं... फूलों में सज रहे हैं श्री वृंदावन बिहारी... जैसे सुमधुर गीतों व भजनों ने भक्तों को आनंदित कर दिया। दशरथ महल में भगवान धनुषधारी के नाम से स्थापित श्रीराम की सेवा पूजा राजसी वैभव के अनुसार होती है। गर्मी और उमस से भगवान को बचाने के लिए जिन प्रमुख मंदिरों में फूल बंगला की झांकी सजाए जाने की परंपरा का पालन होता है, उनमें दशरथ महल अगली कतार में है। यहां अन्य पर्व एवं त्योहार की तरह फूल बंगला भी खास महत्व का होता है।
कार्यक्रम के संयोजक मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालु जी बताते है कि मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह संत-साधकों के लिए वस्तुतः अर्चावतार की भांति हैं। मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा को सजीव माना जाता है। यही कारण है कि साधक संतों ने उपासना के क्रम में विराजमान भगवान के अष्टयाम सेवा पद्घति अपनाई। इस सेवा पद्घित में भगवान की भी सेवा जीव स्वरूप में ही की जाती है। जिस प्रकार जीव जैसे सोता, जागता है उसी प्रकार भगवान के उत्थापन व दैनिक क्रिया कर्म के बाद उनका श्रृंगार पूजन, आरती भोग-राग का प्रबंध किया जाता है। इसी क्रम में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए पुरातन काल में संतों ने फूलबंग्ला झांकी की परंपरा का भी शुभारंभ किया था, जिसका अनुपालन आज भी हम कर रहे है। कृपालु जी महाराज ने बताया कि झांकी कोलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है, जिसमें उपयोग किए जाने वाले फूल बनारस, लखनऊ, वृन्दावन, कलकत्ता आदि जगहों से मंगवाए गए जाते है। इसके आलावा कुछ पुष्प विदेशों से भी आयातित किए जाते है। इस अवसर पर महंत कमल नयन दास, महंत सुरेश दास, जगद्गुरु राम दिनेशाचार्य, महंत अवधेश दास, महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में मौजूद संतों व भक्तों ने महोत्सव की भव्यता बढ़ाई।
: श्रीसंतगोपाल मंडपम् में दक्षिणायन शैली से हो रहा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
Fri, Jul 5, 2024
व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहे कोसलेस सदन पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज
अयोध्या। कांचीमठ प्रतिवादि भयंकर मूलगादी स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज की अध्यक्षता में अयोध्याधाम के नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों एवं वेदमंत्रों से पूरा मंदिर प्रांगण गुंजायमान है। अवसर श्रीरंगराघव भगवान के प्राणप्रतिष्ठा महा महोत्सव का है। महोत्सव के उपलक्ष्य में नित्य शालिग्राम भगवान का सवा लाख अर्चन, 111 ब्राह्मण आचार्यों द्वारा श्रीमद्भागवत का मूल पारायण किया जा रहा है। गुरूवार को अग्नि प्रतिष्ठा, हवन-पूजन पाठ, धान्याधिवास का कार्यक्रम हुआ। व्यासपीठ पर विराजमान राष्ट्रीय कथाव्यास कोसलेस सदन पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज ने कहह्या पांच वर्षीय अबोध बालक ध्रुव की तरह अविरल भक्ति जब साधक के मन में व्याप्त हो जाती है। तब वह साधक भगवान को प्राप्त करता है। जन्म से ही पाप कर्म में लीन अजामिल प्रभु भक्ति में लीन संत जनों की कृपा पाकर भगवान के धाम को प्राप्त हुआ। बिना गुरु कृपा व संतों की सन्निधि के भक्ति मार्ग की प्राप्ती संभव नही है। हिरण्यकश्यप ने घोर तप कर ब्रह्मा से वरदान भी प्राप्त किया। यदि साधक भक्तों के मन में अभिमान व्याप्त हो जाता है। तो वह साधक भक्त भी भक्ति मार्ग से अलग होकर पाप कर्म में लीन हो जाता है। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद मां के गर्भ में ही देवर्षि नारद से नवधा भक्ति का श्रवण करने के प्रभाव से अनेकों यातनाएं पिता से पाकर भी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ता है। प्रहलाद की दृढ़ भक्ति को देखकर भगवान उसे बचाने नरसिंह रूप धारण कर दुष्ट हिरण्यकश्यप का वध करते हैं। सुखदेव महाराज से कथा का श्रवण कर राजेंद्र परीक्षित का विश्वास और भी दृढ़ हो गया। अंत में कथा का प्रसाद वितरित हुआ। नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् के स्वामी कूरेशाचार्य महाराज व उघोगपति आईपी सिंह ने व्यासपीठ की भव्य आरती उतारी। उन्होंने आए हुए संतों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत-सत्कार किया। सभी भक्तजन कथा का श्रवण कर आनंदित हो रहे हैं।
: बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सरयू नदी में कराया मुंडन
Thu, Jul 4, 2024
भगवान राम को समर्पित किया अपना बाल, हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन कर पुजारी हेमंत दास से लिया आशीर्वाद
अयोध्या। बुधवार को बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी रामनगरी अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने सरयू नदी में मुंडन कराया। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार का इंडिया गठबंधन में जाने के बाद नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए शपत ली थी। सरयू से निकलकर पदयात्रा करते हुए सम्राट चौधरी राम मंदिर पहुंचे। जहां उन्होंने राम लाल को पगड़ी समर्पित की। उसके बाद हनुमानगढ़ी दर्शन किया। हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन कर पुजारी हेमंत दास महाराज का आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने कहा कि पिछले 2 साल से अभियान चलाकर गठबंधन सरकार को हटाने का प्रयास किया स वहीं जब नीतीश कुमार 28 जनवरी को इंडी गठबंधन छोड़कर एनडीए की तरफ से हुए तभी तय किया था कि अयोध्या जाकर श्री राम के चरणों में समर्पित मुरैठा करेंगे। बिहार की जनता ने 75 प्रतिशत से अधिक सीटे जीताने का काम किया है । अगली बार फिर एनडीए एकजुट होकर 40 में 40 सीट पर जीत हासिल करेंगे और विधानसभा में 243 में 200 से ज्यादा सीट जीतेंगे। वहीं जन्मभूमि पथ पर बिहार के सैकड़ों समर्थकों के साथ डिप्टी सीएम और मंत्री व विधायकों की मौजूदगी में प्रोटोकॉल के नियमों को तोड़कर राम मंदिर पहुंचे। इस दौरान लगभग चार स्थानों पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस बल अधिकारियों के साथ मौजूद रहे, लेकिन समर्थकों का हुजूम जन्मभूमि पथ से होते हुए राम जन्मभूमि परिसर पहुंचा। इस दौरान राम मंदिर के पहले क्रॉसिंग पर पुलिसकर्मियों के साथ नोक झोंक भी हुई।