: दीपावली को लेकर भ्रम में नहीं पड़ें, 31 को होगी दीपावली: सूर्य प्रकाश शरण
Sun, Oct 27, 2024
दीपावली को लेकर भ्रम में नहीं पड़ें, 31 को होगी दीपावली: सूर्य प्रकाश शरणकहा, शुभ मुहूर्त दोपहर 1:33 बजे से 03: 04 के मध्य प्रदोष काल में वृष लग्न में शाम 6:11 बजे से 8: 08 के मध्य यह मुहूर्त सर्वश्रेष्ठअयोध्या। दीपावली पूजन को लेकर कुछे अखबारों एवं वाट्एप में भ्रम की स्थिति निर्मित करने की कुचेष्टा की जा रही है। जबकि काशी व अयोध्या के सभी प्रतिष्ठित पंचांगों ने एकरूपता लाते हुए 31 अक्टूबर को दीपावली महालक्ष्मी पूजन दर्शाया गया है। रामनगरी के आचरण पीठ श्री लक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने बताया कि दीपावली हर साल अमावस्या तिथि पर मनाई जाती है इस वर्ष इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी है तिथियों के आगे पीछे होने के करण अधिकांश लोग दिपावली 31 अक्टूबर को तो कुछ लोग 1 नवंबर को बता रहे हैं मंथन के बाद श्री अयोध्या जी के ज्योतिषियों ने वाराणसी के ज्योतिषियों ने एक मत से कहा है कि दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर को ही अयोध्या सहित पूरे देश में मनाई जानी चाहिए उनका तर्क है कि दीपावली के लिए प्रदोष व्यापिनी एवं रात्रि में अमावस्या जरूरी होती है यह योग 31 अक्टूबर को ही है। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के वर्तमान महंत श्री मैथिलीरमण शरण जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य श्री लक्ष्मणकिला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण ने कहा कि 31 अक्टूबर को ही मिल रही प्रदोष व्यापणी अमावस्या इसी दिन मनेगी दीपावली। दीपावली पर पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:33 बजे से 03: 04 के मध्य प्रदोष काल में वृष लग्न में शाम 6:11 बजे से 8: 08 के मध्य यह मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ है महानिशा में मंत्र सिद्धि आदि के लिए सिंह लग्न में रात्रि 12:39 बजे से 2:53 के मध्य में हैं।
: नवाह्न पारायण संग शुरु हुआ हनुमंतलला का अवतरण उत्सव
Sat, Oct 26, 2024
नवाह्न पारायण संग शुरु हुआ हनुमंतलला का अवतरण उत्सवकार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के पर्व पर 30 को भव्यता से जयंती मनाई जाएगीदुनिया देखेगी अखिल भारतीय निर्वाणी अखाड़े के वैभव का नजाराकेला के पत्तों व तने के साथ आम्म्र पल्लव से मंदिर परिसर में सजेंगे तोरण द्वारअयोध्या। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानि छोटी दीपावली के पर्व पर 30 अक्तूबर को श्री हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमंतलला की जयंती पूरी भव्यता व हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। हनुमानजी अयोध्या के राजा के रुप में विराजमान है,इसलिए उनका जन्मोत्सव बड़े ही भव्यता के साथ मनाई जाएगी।
अखाड़े की परम्परा में हनुमान जयंती से पहले नौ दिवसीय अनुष्ठान किया जा रहा है। इसके साथ अखाड़े की ओर से नियुक्त वैदिक आचार्य गण श्रीराम चरित मानस का नवाह्न पारायण भी कर रहे हैं।
इसकी पूर्णाहुति 29 अक्टूबर को हवन-पूजन के साथ होगी। इस अवसर नवाह्न पारायण में अन्य साधु-, संत व भक्तगण भी शामिल हैं। अनुष्ठान की पूर्णाहुति की तिथि पर हनुमानगढ़ी अखाड़े की तिजोरी गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज व चारों पट्टियों के श्रीमहंतों व उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में खोली जाएगी। इस तिजोरी से सोने-चांदी, हीरे जवाहरात, मूंगा - माणिक्य व अन्यान्य बहुमूल्य वस्तुएं निकाली जाएंगी और पुजारियों के सुपुर्द किया जाएगा। जयंती के मुख्य पर्व पर भगवान का वृहद श्रृंगार इन आभूषणों से किया जाएगा।
गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास कहते हैं कि हनुमानगढ़ी में जयंती पर्व को लेकर विशद तैयारियां की जा रही है। खास बात है कि इसी पर्व पर प्रदेश सरकार के द्वारा दीपोत्सव का भी आयोजन किया जाता है। ऐसे में यहां लाखों दीप तो जलेंगे ही, मंदिर का कोना-कोना दीयों से रोशन होगा। मंदिर परिसर में लगे कांच के सुंदर झूमरों में मोमबत्तियां लगाकर उन्हें प्रज्वलित किया जाता है। इस कार्य के लिए कर्मचारियों का पूरा दस्ता यहां तैनात हैं। इसके अलावा परम्परा नुसार मंदिर परिसर में केला के पत्तों व तने के अतिरिक्त आम्र पल्लव से तोरणद्वार भी सजाए जाएंगे। उधर बाह्य परिसर में पूरे किले को खूबसूरत रंग-बिरंगी लाइटों से सुसज्जित किया जा रहा है। इसके अलावा भक्ति पथ पर विद्युत लाइटों से सुसज्जित भव्य प्रवेश द्वार भी बनाया जाएगा। भगवान के जन्म के क्षण में होने वाली आतिशबाजी भी सदैव दर्शनीय और आकर्षण का केंद्र बनती है।
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास कहते है कि अयोध्या जी के राजा है श्री हनुमानजी इसलिए हम लोग पूरे उत्सव व उमंग के साथ जन्मोत्सव मनातें है। महंत संजय दास ने अयोध्या वासियों से अपील करते हुए कहा कि जयंती उत्सव में समस्त अयोध्यावासी शामिल हो,घर घर उत्सव मनाया जाये। पूरी अयोध्या में मंगल गीत गाये जायें। चहुंओर दीप मालाओं से उजाला हो सभी के जीवन में नई उमंग चेतना का संचार हो। उत्सव की तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा रहा है।
: सेवा और भक्ति के प्रति गुरुदेव का समर्पण अपूर्व था: महंत मयंक राम दास
Sat, Oct 26, 2024
सेवा और भक्ति के प्रति गुरुदेव का समर्पण अपूर्व था: महंत मयंक राम दास
संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार महंत मयंक रामदास को कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता दी
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या की प्रमुख पीठ विजयराम भक्तमाल आश्रम के संस्थापक महंत विजयरामदास तो उन आराध्य के चरणों में विलीन हो गए, जिनके वह अनन्य उपासक थे और अपने पीछे छोड़ गए सेवा एवं भक्ति की समृद्ध परंपरा। यह परंपरा उनके जीते जी लाखों शिष्यों एवं श्रद्धालुओं को प्रेरित करती ही रही और उनके साकेतवास के बाद भी प्रेरित करती रहेगी। शुक्रवार को एक महंताई समाराेह के दरम्यान अयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार महंत मयंक रामदास को कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता दी। साथ ही साथ महज्जरनामा पर हस्ताक्षर भी किया। विजयराम भक्तमाल आश्रम के संस्थापक महंत विजयरामदास महाराज का कुछ दिनाें पहले साकेतवास हाे गया था। जिस पर मयंक रामदास चेला स्व. महंत विजयरामदास की ताजपाेशी की गई। विजयरामदास जी ने अपने जीवनकाल में ही पंजीकृत वसीयत द्वारा सुयाेग्य शिष्य मयंक राम दास काे अपना उत्तराधिकारी नामित कर दिया था। शुक्रवार को विजयरामदास जी का तेरहवीं भंडारा भी रहा। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में महंताई समाराेह का आयोजन हुआ, जिसमें संताें व सद् गृहस्थाें ने मयंक राम दास काे विजयराम भक्तमाल आश्रम का महंत एवं सर्वराहकार घाोषित किया। महंत मयंकरामदास कहते हैं कि वैसे तो इस दास का संपूर्ण जीवन पूज्य गुरुदेव की कृपा का प्रसाद है, किंतु सेवा और भक्ति के प्रति उनका समर्पण अपूर्व था। उनकी यह प्रतिबद्धता सामने वाले को बरबस प्रेरित-प्रोत्साहित करती थी। उनका स्वास्थ्य कैसा भी हो, व्यस्तता कितनी भी अधिक हो, वह नितनेम के पक्के थे। इस वर्ष वह 72 साल के हो गए थे और बीमार भी रहने लगे थे, किंतु जब भी अयोध्या में रहते, तो सरयू स्नान का क्रम नहीं छोड़ते थे।महंत मयंक रामदास ने कहा कि अपने समस्त दायित्वों का कुशलता पूर्वक निर्वहन करते आ रहें है और आगे भी रहते रहेंगे। साथ ही मंदिर की सम्पूर्ण सम्पत्तियाें काे अक्षुण्ण बनाए रखने का आजीवन सतत प्रयत्न करते रहेंगे। अंत में मयंक रामदास जी व बड़ा भक्त माल के महंत अवधेश दास ने आए हुए संताें का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत-सत्कार किया। समाराेह में मणिरामदास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास,जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी बल्लभाचार्य जी महाराज,अधिकारी राजकुमार दास, जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, नागा रामलखन दास, महंत डा भरत दास, महंत जगदीश दास, महंत करुणानिधान शरण, श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के शिष्य संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास सरपंच रामकुमार दास, महंत बलराम दास, महंत परशुराम दास, महंत विनोद दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, महंत आनंद दास, डाड़िया महंत गिरीश दास, महंत अर्जुन दास, शरद जी, राजगोपाल मंदिर के सर्वेश्वर दास,महंत उद्धव शरण सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।