: रोजा रखकर बच्चे भी कर रहे अल्लाह की इबादत
Thu, Mar 27, 2025
रोजा रखकर बच्चे भी कर रहे अल्लाह की इबादतकहा, रोजा रखने से सवाब मिलता है, गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता हैअयोध्या। रमजान हर किसी को नेकी की तरफ बुलाता है। इतना ही नहीं रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज हैं। चाहे वह महिला हो या पुरुष । रमजान के रोजे शरई मजबूरी के बिना छोड़ने पर गुनाह होता है। रमजान का पाक महीना शुरू होते ही जहां बड़ों में उत्सुकता देखी जाती है। वहीं बच्चे भी किसी से कम नहीं है। शहर के अलग-अलग स्थानों पर कई बच्चों ने रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। बच्चों के हौसलों की मुहल्लेवासियों समेत रिश्तेदारी में चर्चा रही और सभी ने बच्चों को तरह-तरह के उपहार देकर हौसला अफजाई की।रमजान माह का मकसद है कि रोजा रखकर जहां बुराईयों से बचा जा सके वहीं अल्लाह के करीब पहुंचा जा सके। रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज किये गये हैं। मसलन वह बीमार न हो और रोजा रखने की हालत में न हो।धर्म नगरी अयोध्या जो गंगा जमुनी तहजीब की नगरी भी है। हिंदू मुस्लिम एकता में जो हमेशा पुल का काम करते है। या हम यू कहें कि गंगा जमुनी तहजीब की जीवंत मिशाल मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया का दरवाजा दीन दुखियों के लिए हमेशा खुला रहता है। उनके पुत्र समाजसेवी मोहम्मद इमरान अंसारी व फिल्म प्रड्यूसर अभिराम दास वार्ड के युवा पार्षद समाजसेवी सुल्तान अंसारी खुद तो रोजा रखते हुए लोगों की मदद के लिए अपने पिता के बतायें मार्ग का अनुसरण करते हुए दो कदम आगे रहते हैं और अल्लाह की इबादत पूरे नेक दिल से करते हैं। इमरान व सुल्तान के बेटे और बेटियां भी रोजा रखे हुए हैं।अरहन अंसारी, अलिशफा अंसारी,अलीजबा अंसारी व कश्फिया अंसारी अपने परिवार के सदस्यों को रोजा रखते हुए देखकर मन में भी रोजा रखकर अल्लाह की इबादत का ख्याल आया। सभी ने मां- बाप की इजाजत से अपना रोजा रखा। भीषण गर्मी और शिद्दत के दिनों में रखे गये इस रोजे की अहमियत ही कुछ और है। अल्लाह तआला को जहां गर्मी का रोजा अधिक पसंद हैं वहीं जवानी की इबादत बेहद प्यारी है। सभी बच्चों ने रोजा रखकर पूरा दिन अल्लाह की इबादत की। बच्चों के इस हौसले को देखकर मुहल्ले के साथ- साथ रिश्तेदारों ने उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। सभी बच्चों ने बताया कि उनकी मां व अन्य घर वाले भी रोजा रखते हैं। उनको देखकर ही उसके मन में भी रोजा रखने की नियत आयी। बताया कि रोजा रखने से सवाब मिलता है और गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता है।
: पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम: रामानन्दाचार्य
Wed, Mar 26, 2025
पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम: रामानन्दाचार्यमर्यादा का उल्लंघन न करना ही रामत्व का प्रतीकः उषा दीदीब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से भी विशाल संत-समागम का हुआ भव्य आयोजनसनातन धर्म के संवाहक प्रभु श्रीराम विषय पर हुई गोष्ठीअयोध्या। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अलग-अलग मत-मतांतरों के विभिन्न समूहों की ओर से अलग अलग धार्मिक आयोजन के अतिरिक्त बौद्धिक कार्यक्रमों का सिलसिला भी चलता रहा है। इसी श्रृंखला में मंगलवार को ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से भी संत-समागम का आयोजन तुलसी उद्यान में किया गया। इस मौके पर जगगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के अलावा अन्य संतों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस मौके पर सनातन धर्म के संवाहक प्रभु श्रीराम विषय पर गोष्ठी भी हुई। इस कार्यक्रम का अनावरण माउंट आबू स्थित ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रमुख उषा दीदी ने संतों के साथ किया। उन्होंने संतों के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित करते हुए उनका यथोचित सम्मान किया। उन्होंने गोष्ठी के विषय पर केन्द्रित अपने उद्बोधन में कहा कि राम का ईश्वर होना उतना महत्वपूर्ण नहीं था जितना कि किसी भी परिस्थिति में मर्यादा पर अडिग रहना था। वहीं जगगुरु रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य ने कहा कि पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम ही है जिन्होंने हर परिस्थिति में समभाव बनाए रखा। युवराज बनने का न हर्ष था और न ही वनवास जाने का संताप ही रहा। उन्होंने जातिवादी राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रामराज्य की परिकल्पना ही यही है कि समाज में ऊंच-नीच व छोटे-बड़े का भेदभाव तिरोहित हो जाए। उन्होंने कहा कि श्रीराम वस्तुतः सनातन परंपरा के महानतम दूत हैं, उन्होंने अपने जीवन में जिस शील, करुणा, विनय, धैर्य-शौर्य का परिचय दिया है, वह सनातनता से अनुप्राणित है। जगद्गुरु ने कहा कि यदि सनातन मूल्यों और आदशों की जड़ों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो हमें श्रीराम के जीवन में झांक कर ऐसे मूल्यों और आदर्शों को अनुभूत कर लेना चाहिए।बावनजी मंदिर के महंत वैदेहीवल्लभशरण ने 'सनातन परंपरा के संवाहक श्रीराम'. का विषय तय करने के लिए आयोजकों के प्रति आभार ज्ञापित किया। कहा, सनातन को समझने के लिए श्रीराम से उत्तम उदाहरण दूसरा नहीं है और श्रीराम को समझने के लिए हमें गोस्वामी तुलसीदास से लेकर अयोध्या के उन आचार्यों का अनुगमन करना होगा, जिन्होंने अन्य किसी लोभ में पड़े विना श्रीराम और उनके सत्य के लिए जीवन समर्पित किया। कामधेनु आश्रम के महंत महामंडलेश्वर आशुतोषदास ने कहा, सनातन परंपरा आचार्य निष्ठा की पर्याय है और आचार्य निष्ठा के सर्वाधिक प्रभावी प्रेरक श्रीराम हैं। संत करपात्री ने कहा कि श्रीराम में सहज अनुशासन निहित है और यदि जीवन के शाश्वत सार रूपी सनातन को जीवंत करना है, तो श्रीराम जैसा आत्मानुशासन अंगीकार करना होगा। ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुख्यालय से आईं राजयोगिनी ऊषा बहन ने कहा कि जिन मूल्यों और अनुशासन पर चल कर श्रीराम और सीता ने अपने जीवन का निर्वाह किया, वह सनातन परंपरा का श्रेष्ठतम उदाहरण है। कार्यक्रम की रूपरेखा बीके मुकेश भाई व संचालन दिल्ली की बीके लता ने किया। इस दौरान हैदराबाद के सुप्रसिद्ध टॉलीवुड डायरेक्टर शिवा मुप्पलनैनी ने सभी संतों का सुनहरी दुशाला पहनाकर सम्मानित किया।
: रामाय के आंगन में बिखरा होली का अह्लाद
Sun, Mar 16, 2025
रामाय के आंगन में बिखरा होली का अह्लादश्रीपरमहंस शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय बना नारी शक्ति जागरण का साक्षीअयोध्या। श्रीपरमहंस शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय रविवार को नारी शक्ति के जागरण का साक्षी बना। मौका था आधी आबादी के होली मिलने के विराट उत्सव का। एक हजार महिलाएं शामिल हुईं। महिलाओं ने एक दूसरे पर पुष्प, गुलाब की वर्षा की तो स्वरचित गीत, नृत्य की प्रस्तुति से धमाल मचाया। होली गीतों की प्रस्तुतियाें पर महिलाएं देर तक थिरकती रहीं। सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत दर्जनों महिलाओं का अभिनंदन हुआ और उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुआ उत्सव चार बजे तक चला। उत्सव में एक से बढ़कर एक होली गीतों, नृत्यों की प्रस्तुियां परिसर को फागुनमय बना दिया। कार्यक्रम संयोजन रामाय सेवा ट्रस्ट व राष्ट्रीय सेविका समिति ने किया। ट्रस्ट की प्रमुख व पूर्व महापौर रिषिकेश उपाध्याय की पत्नी वंदना उपाध्याय ने अपने अंदाज में आगंतुक अतिथियों, प्रतिभागी महिलाओं का वंदन किया और उन पर गुलाल व पुष्प की बरसाए। उत्सव की शुरुआत पूर्व महापौर रिषिकेश उपाध्याय ने दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने होली को मतभेद को समाप्त करने वाला उत्सव बताया। कहा कि रंग सभी को एकरस कर देता है। बताया कि भगवान राम व माता सीता के जीवन चरित्र को अपनाकर हम आदर्श समाज व राष्ट्र सृजत कर सकते हैं। इसके बाद अमृता की गणेश वंदना की प्रस्तुति से उत्सव की शुरुआत हुई। फिर फरवाही नृत्य आकर्षक का केंद्र रहा। इसी टोली ने होली गीत, रेनू मिश्रा, कुमुद व नूतन की टीम ने उत्सव को रंग से भिगोया। नंदिनी पांडेय के बाद शुभी ने खैलै रघुवीर.. की प्रस्तुति दी तो उपस्थित सभी महिलाएं थिरक उठी। अबीर मिश्रित गुलाल उड़ता रहा। सिया संग खेलै होली..., होलिया मा उडे रे गुलाल.. की प्रस्तुतियों ने मंत्रमुग्ध कर दिया। शीलता प्रसाद वर्मा ने लोकनृत्य के माध्यम से होली उत्सव को और भी प्रगाढ़ किया।
इस मौके पर ट्रस्ट की प्रमुख वंदना उपाध्याय, डा. मंजूषा, उर्मिला मिश्रा, डा. आभा सिंह, डा. अनामिका त्रिपाठी व डा. अनामिका मिश्रा ने सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्र कला श्रीवास्तव, ममता सानाड़य, शीला पांडेय, निधि उत्पल, सावित्री मिश्रा, सरस्वती पाठक, गीता मिश्रा, आशा श्रीवास्तव, शमीम बानो, अंजू श्रीवास्तव, इसरावती सिंह, मीना सिंह, पुष्पलता सिंह, उमा, प्रेमा सिंह, अनीता वशिष्ठ, सरोजनी देवी, सुशीला सिंह, ऋचा आनंद, रीता उतपल, प्रज्ञा गुप्ता, जयंत चंद्रा, शीलता प्रसाद, शीला प्रसाद वर्मा को उनकी विशेष उपलब्धि के लिए सम्मानित किया। संचालन डा. आभा सिंह व डा. अनामिका मिश्रा और कार्यक्रम संयोजक आशीष मिश्रा ने किया। आभार वंदना उपाध्याय ने किया। इसके पहले अयोध्या एनीमल वेलफेयर के सदस्यों प्रज्ञा गुप्ता, चंद्रा, आकांक्षा मिश्रा, यशवंत गौतम, दीप शिखा, साक्षी पांडेय, सुनीता जायसवाल ने बेजुबानों की बेहतरी करने का आह्वान किया। सभी ने वृत्त चित्र प्रदर्शित किया। इस मौके पर कई विशिष्टजन मौजूद रहे।