: श्री सियावर भवन के महंत बने युवा आकाश शरण
Wed, Mar 5, 2025
श्री सियावर भवन के महंत बने युवा आकाश शरणअयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की दी मान्यताअयाेध्या। रामनगरी के श्री ऋणमोचनघाट स्थित मंदिर सियावर भवन का नया महंत युवा आकाश शरण काे बनाया गया। यह मंदिर आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला की परम्परा का है। मंगलवार को एक महंताई समाराेह के दरम्यान अयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता की। साथ ही साथ महज्जरनामा पर हस्ताक्षर भी किया। आकाश शरण के सेवा भाव व ईश्वर के प्रति उनकी आस्था व अपने गुरु मैथिलीरमण शरण की सेवा में थे,इस सबको देखते हुए अयोध्या के संतों ने आचार्य पीठ श्रीमहंत मैथली रमण शरण महाराज की अध्यक्षता में मैथिली रमणशरण के साकेतवास के बाद संत समाज ने आकाश शरण को महंती के योग्य समझा और मंगलवार को कंठी, चादर, तिलक आदि से महंत के रूप में उनका अभिषेक किया। संतों ने रामानन्दीय वैरागी परमारा के अनुसार आकाश शरण को कन्ठी, चादर व तिलक लगाकर गद्दी पर आसीन कर विधिवत महन्थ नियुक्त कर यह महज्जर नामा लिख दिया। जिसमें संताें व सद् गृहस्थाें ने महंत आकाश शरण काे श्री सियावर भवन का महंत एवं सर्वराहकार घाोषित किया। नवनियुक्त महंत आकाश शरण ने कहा कि वह अपने समस्त दायित्वों का कुशलता पूर्वक निर्वहन करेंगे। साथ ही मंदिर की सम्पूर्ण सम्पत्तियाें काे अक्षुण्ण बनाए रखने का आजीवन सतत प्रयत्न करते रहेंगे। अंत में आए हुए संताें का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत-सत्कार महंत छोटू शरण, पार्षद प्रतिनिधि प्रियेश दास व रामदेव पहलवान ने किया। देखरेख आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने किया।महंताई समाराेह में आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के श्रीमहंत मैथली रमण शरण, हनुमत सदन के महंत अवधेश किशोर शरण, हनुमानगढ़ी से महंत बलराम दास, महंत सत्येन्द्र दास, महंत प्रिया पीतम शरण, महंत रामभद्र शरण, रसमोद कुंज के महंत, आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण सहित बड़ी संख्या में संत महंत मौजूद रहें।
: जानकी जीवन सरकार का दो दिवसीय 17वां प्राकट्योत्सव का छाया उल्लास
Wed, Mar 5, 2025
जानकी जीवन सरकार का दो दिवसीय 17वां प्राकट्योत्सव का छाया उल्लासदर्शन भवन से महंत डॉ. ममता शास्त्री के दिशानिर्देशन में गाजे-बाजे, हाथी-घोड़ा, रथ संग निकली विशाल शोभायात्रासरयू मैया का अभिषेक-पूजन, आरती कर चढ़ाई गई चुनरीअयोध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य जी भगवान का मंदिर दर्शन भवन जानकीघाट से गाजे-बाजे, हाथी-घोड़ा, रथ संग विशाल शोभायात्रा निकाली गई। अवसर मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान जानकी जीवन जू के 17वें प्राकट्योत्सव का है। शोभायात्रा को दर्शन भवन की वर्तमान पीठाधीश्वर महंत डॉ. ममता शास्त्री ने अपनी सानिध्यता प्रदान किया। यह शोभायात्रा दर्शन भवन से शुरू होकर तपस्वी छावनी चौराहा, दिगंबर अखाड़ा, हनुमानगढ़ी चौराहा, श्रृंगारहाट, शास्त्रीनगर, तुलसी उद्यान, लता चौक होते हुए पावन सरयू तट पहुंची। जहां सरयू मैया का अभिषेक-पूजन, आरती कर चुनरी चढ़ाई गई। उसके बाद पुनः शोभायात्रा सरयू तट से दर्शन भवन मंदिर को वापस लौटी। वहां मंदिर में विराजमान नर्वदेश्वर भगवान शंकर का विशेष श्रृंगार कर भस्म आरती उतारी गई। उसके बाद सायंकाल दर्शन भवन बिहारी सरकार की भव्य एवं मनोरम फूलबंगला झांकी सजी। झांकी का दर्शन कर भक्तगण धन्य हुए। इस अवसर पर दर्शन भवन की पीठाधिपति महंत डॉ. ममता शास्त्री ने बताया कि आश्रम में जानकी जीवन सरकार का दो दिवसीय प्राकट्योत्सव मनाया जा रहा है। यह भगवान का 17वां प्राकट्य महोत्सव है। महोत्सव के क्रम में प्रथम दिन सुबह तुलसी एवं पुष्प द्वारा ठाकुर जानकी जीवन का सभी भक्तों ने सामूहिक रूप से सहस्रार्चन कर उत्सव का शुभारंभ किया। तत्पश्यात 108 बत्ती से भगवान की भव्य आरती उतारी। उसके बाद मंदिर के मुख्य द्वार से पुण्य सलिला मां सरयू तट तक भव्य, विशाल एवं मनोरम शोभा यात्रा निकाली गई। फिर मोक्षदायिनी एवं पुण्यदायिनी मां सरयू की दिव्य एवं भव्य चुनरी महोत्सव का कार्यक्रम हुआ। तदुपरांत सरयू मैया की दिव्य एवं भव्य आरती उतारी। पुनः शोभा यात्रा सस्यू तट से मंदिर को वापस लौटी। सायंकाल नर्वदेश्वर भगवान शंकर का विशेष श्रृंगारदिव्य भस्म आरती उतारी। दर्शन भवन बिहारी सरकार के फूल बंगला की मनोहारी झांकी सजी। मंदिर के मुख्य द्वार पर भण्डारा प्रसाद का वितरण हुआ। उसके बाद शास्त्रीय संगीत एवं सांस्कृतिक संध्या की महफिल सजी। देररात्रि ठाकुर जानकी जीवन के संग फूलों की होली खेली। उन्होंने बताया मंगलवार को सुबह नर्वदेश्वर भगवान शंकर का रूद्राभिषेक है। फिर विश्वनाथ गौ सेवा दर्शन मंदिर में गौ माता का विशेष पूजनार्चन एवं दिव्य आरती होगी।
: दिगंबर जैन मंदिर में पंचकल्याणक महोत्सव का छाया उल्लास
Wed, Mar 5, 2025
दिगंबर जैन मंदिर में पंचकल्याणक महोत्सव का छाया उल्लासभारत देश की प्राचीनतम संस्कृति में यह अयोध्या नगरी प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव आदि पाँच भगवन्तों की भी जन्मभूमिजैन साध्वी गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि ज्ञानमती माता की दिव्य सान्निध्य में 1800 प्रतिमाओं का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया जा रहाअयोध्या।दिगंबर जैन मंदिर की शीर्ष पीठ रायगंज स्थित भगवान ऋषभदेव मंदिर में इस समय पंचकल्याणक महोत्सव की धूम मची हुई है। पंचकल्याणक महोत्सव से जैन मंदिर का पूरा प्रांगण सराबोर है। जहां धर्म, आध्यात्मिकता और आस्था बैतरणी बह रही है। पूरे देश और दुनिया में अयोध्या को भगवान राम की नगरी से जाना जा रहा है। वहीं भारत देश की प्राचीनतम संस्कृति में यह अयोध्या नगरी प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव आदि पाँच भगवन्तों की भी जन्मभूमि है। ऐसी महान तीर्थभूमि पर जैन धर्म के अनेक जिनमंदिर हैं। इन जिनमंदिरों में रायगंज स्थित भगवान ऋषभदेव दिगंबर जैन मंदिर बड़ी मूर्ति का विशाल प्रांगण अपनी अद्वितीय आभा बिखेरता हुआ जैनधर्म की प्राचीनता और इसके इतिहास को जगजाहिर कर रहा है। यहां इस समय पंचकल्याणक महोत्सव चल रहा है। जिसके क्रम में तीनलोक रचना में सिद्ध भगवन्तों की 727 जिनप्रतिमाएं विराजमान होने जा रही हैं। इसी के साथ भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर तक की अन्य 1008 प्रतिमाओं का भी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया जा रहा है। उक्त महोत्सव सर्वोच्च जैन साध्वी गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि ज्ञानमती माता की दिव्य सान्निध्य में सम्पन्न होगा रहा है। सम्पूर्ण कार्यक्रम को प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता का मार्गदर्शन एवं तीर्थ के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी का कुशल निर्देशन प्राप्त हो रहा है। इस आयोजन में कमेटी द्वारा विशेष रूप से आचार्यश्री भद्रबाहुसागर महाराज ससंघ आमंत्रित किया गया है। जिनके सान्निध्य में उक्त महोत्सव सम्पन्न हो रहा है। साथ ही देश के चिरपरिचित क्षुल्लक ध्यानसागर महाराज एवं श्रवणबेलगोला के भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति जी महाराज भी अपना सान्निध्य प्रदान कर रहे हैं। 6 मार्च को प्रतिमाओं को भगवान का स्वरूप प्राप्त होगा। एक साथ जैन तीर्थकर एवं सिद्ध भगवन्तों की 1800 प्रतिमाएं पूजनीय बनकर प्रतिष्ठापित की जायेंगी। जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष व पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि 5 मार्च को भगवानयों को ज्ञान प्राप्त करने वाले दिव्य आत्माओं के समान भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति होगी। इस अवसर पर कमेटी के कार्याध्यक्ष अनिल कुमार जैन, उपाध्यक्ष आदीश कुमार जैन सर्राफ, महामंत्री अमरचंद जैन, कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन तथा अन्य पदाधिकारियों में जितेन्द्र जैन, योगेश जैन, निधेश जैन, परमेन्द्र जैन, पंकज जैन, नमन जैन, अंकुर जैन, कमलेश जैन आदि मौजूद रहे।