Thursday 3rd of September 2026

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: कोशलेशसदन में जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर जी के श्रीमुख से हो रही रामकथा की अमृत वर्षा

बमबम यादव

Mon, Apr 4, 2022

अयोध्या। नौ दिवसीय रामनवमी मेले के तीसरे दिन रामनगरी के दर्जनों मंदिरों में चल रही रामकथाओं में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। मेले में शामिल होने आए श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन व सांस्कृतिक-धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के क्रम में कथाओं में पूरे मनोयोग से शामिल हो रहे हैं।कोशलेशसदन मंदिर के सभागार रामानुजीयम में कथा का क्रम आगे बढ़ाते हुए जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर ने रावण के कुत्सित साम्राज्यवाद की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि रावण भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता था और इसके लिए उसने किष्किंधा और यहां के शासक बालि को माध्यम बनाया। यद्यपि बालि बहुत वीर था और रावण को पराजित कर चुका था पर रावण ने कूटनीति का आश्रय लेकर बालि से मित्रता का ढोंग किया। रावण ने बालि से मित्रता की आड़ में किष्किंधा को अपने उपनिवेश के तौर पर विकसित करना शुरू किया। वे भगवान राम थे, जिन्होंने रावण का अंत करने से पूर्व उसकी इस साजिश का उन्मूलन किया।

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