: महंत रामसुखित दास फलाहारी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि समारोह शुरू
Mon, Apr 18, 2022
मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा, शोभायात्रा में हनुमानगढ़ी के शाही निशान रहे आकर्षक का केंद्र
सोमवार को वैदिक आचार्यों द्वारा होगा हवन पूजन, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य उत्सव भी आज, संतो का होगा जमावड़ा
अयोध्या। राम नगरी के बेगमपुरा स्थित श्री अवध बिहारी कुंज मंदिर की पूर्वाचार्य महंत रामसुखित दास फलाहारी जी महाराज की प्रथम पुत्र की समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। पुण्यतिथि पर पूर्वाचार्य की भव्य मूर्ति प्राण समारोह हो रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ आज शोभायात्रा से हुआ।यह पूरा महोत्सव मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत गणेश दास महाराज के संयोजन में हो रहा है। कार्यक्रम के प्रथम प्रथम दिन मंदिर से भव्य शोभायात्रा गाजेबाजे के साथ निकली। इस शोभायात्रा की दिव्यता और भव्या प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी के शाही निशान बड़ा रहे थे। शोभायात्रा शाही निशान के साथ निकली। शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए मां सरयू के पावन पर पहुंची।जहां पर वैदिक आचार्यों द्वारा विधिवत मां सरयू का पूजन अभिषेक किया गया। इसके बाद शोभायात्रा पुनः मंदिर वापस आई। शोभा यात्रा की भव्यता दिव्यता की चर्चा रामनगरी में चारो तरह रहा। कार्यक्रम के संयोजक अवध बिहारी कुंज के महंत गणेश दास महाराज ने बताया कि गुरुदेव महाराज की प्रथम पुण्यतिथि समारोह बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। यह कार्यक्रम दो दिवसीय है। इसमें गुरुदेव महाराज की भव्य मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा हो रहा है। इसका समापन वृहद भंडारे के साथ होगा। उन्होंने कहा कि गुरुदेव भगवान भजनानंदी संत थे। हमेशा भजन में तल्लीन रहा करते थे। यहा समारोह उनके आशीर्वाद से ही हो रहा है। कार्यक्रम में सुंदरकांड का पाठ,भजन संध्या व रात्रि जागरण का भी आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में सोमवार को वैदिक आचार्यों द्वारा हवन पूजन वा मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा किया जायेगा। उसके बाद राम नगरी समेत पूरे भारत से आए संत धर्माचार्यों का स्वागत अभिनंदन होगा। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र समेत पूरे भारत से शिष्य परिकर आये हुए है।
: साधुता की प्रतिमूर्ति थे स्वामी बलरामशरण : महंत रामशरणदास
Sun, Apr 17, 2022
अयोध्या। श्रीराम जन्म भूमि परिसर के निकट स्थित अति प्राचीन सिद्धपीठ श्री रंगमहल मंदिर के पूर्वांचार्य महंत स्वामी बलराम शरणजी महाराज की पुण्यतिथि शनिवार को धूमधाम से मंदिर के प्रांगण में मनाई गई। इस दौरान साधु संतों भक्तों व शिष्यों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। पुण्यतिथि समारोह में वर्तमान महंत स्वामी रामशरणदास जी महाराज ने कहा कि साकेत वासी महंत बलरामशरण जी साधुता विद्वता के प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने सदैव धर्म के उत्थान हेतु कार्य किए। उनके द्वारा यहां पर बहुत से उत्कृष्ट व सराहनीय कार्य किए गए। उनके द्वारा इस मंदिर का काफी विकास कराया गया। वे निर्मल छबि के प्रकांड धार्मिक विद्वान व सद्गुरु थे। पुण्यतिथि समारोह में रामनगरी के संतों का सम्मान किया गया। आये हुए अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीकें से मंदिर के पुजारी साकेत जी व राहुल जी ने किया।
इस मौके पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें अयोध्या के प्रमुख साधु संतों भक्तों शिष्यों नेताद्वय आदि ने प्रसाद ग्रहण किए। पुण्यतिथि के कार्यक्रम में दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, जगद्गुरु स्वामी रामनदिनेशाचार्य महाराज, महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज महंत कमल नयन दास जी महाराज महंत हरिसिद्धि शरण जी महाराज, महंत कृपालु रामभूषण दास, अयोध्या भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता महंत बृजमोहन दास महंत राम लखन चरण गहोई, महंत माधव दास, महंत रामप्रिय दास, महंत मन मोहनदास, पुजारी रमेश दास पुजारी राजू दास सहित अयोध्या के सैकड़ों सन्त महंत शिष्य व भक्तगण आदि शामिल रहे।
: सन्तों और गुरुदेव की कृपा से तीर्थ करने का सौभाग्य मिलता है: इन्द्रदेवजी सरस्वती जी
Sat, Apr 9, 2022
प्रातः श्री राम कृपा महायज्ञ होगा, 12 बजे रामलला का भव्य अवतरण महोत्सव धूम-धाम से मनाया जाएगा
अयोध्या। श्री रामजन्मोत्सव के पावन अवसर पर कनक महल में संत इन्द्रवदेवजी सरस्वती जी के श्रीमुख से रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है।कथा के आज अष्टम दिवस में कथा का प्रारंभ गुरु की महिमा बताते हुए किया। जब तक गुरु द्वारा बताए गए चरित्र शिष्यों के आचरण में नहीं आएगा तब तक गुरु के सिद्धांतों की रक्षा नहीं हो सकती। सीताराम जी के चरित्र का आचरण करना ही होगा। उन्होंने कहा कि विवाह में सदा 3 - 4 दिन तक संन्यासी, धर्मात्मा, ज्ञानी को बुलाओ और 7 दिन की कथा सुनो। यह ज्ञान देनेवाले एकमात्र सन्त जी ही हैं। सन्त जी आगे बताते हैं कि सैकड़ों लोग तो तीर्थ में केवल घूमने-खाने-पीने-टहलने के लिए आते हैं। तीर्थ में आने के लिए पुण्य लगता है, कभी-कभी सन्तों और गुरुदेव की कृपा से तीर्थ करने का सौभाग्य मिलता है। गुरु को दूध की मलाई की तरह ऊपर ही रखें तो जीवन में सदा आनंद रहेगा। गुरु को घर में प्रार्थना पूर्वक विश्राम और भोजन आदि सबके लिए कहना चाहिए। श्री राम भगवान 26 वर्ष की आयु में भी माता कौशल्या जी के साथ शयन करते थे, धन्य है वह संस्कृति, ऐसा बालक अपने कुल का सदा नाम ऊंचा करेगा। स्वामीजी ने बताया कि वेद प्रमाणित बात है जब तक आँचल में दूध है तब तक बच्चा गर्भ में ही है ऐसा समझकर पालना चाहिए। राम तो रामायण से भी पहले से हैं अतः उनका चरित्र भी उतना ही पहले का है।
आयुर्वेदाचार्य संत इन्द्रदेवजी सरस्वती जी महाराज ने बताया कि आटा और रोटी हो तो उसे खानेवाला का स्वास्थ्य कभी खराब नहीं होता। विवाह का बंधन ऐसा है कि हमें पीछे के जीवन का नहीं पूछना चाहिए। जो व्यक्ति मां बाप को प्रतिदिन प्रणाम करता है, उसे अकाल मृत्यु नहीं आती, उसे सर्पदंश नहीं होता। राम की सेवा निस्वार्थ भाव से करो, तो आपके बुढ़ापे और अंतिम जीवन का इंतज़ाम स्वय राम जी कर देंगे। लक्ष्मी सदा राम जी की पत्नी बनती हैं और महालक्ष्मी दया बनती हैं। जो एकदम गरीब था और अचानक करोड़पति हो जाए तो उसे दानीदाता बन जाना चाहिए अन्यथा बहुत जल्दी कंगाल भी हो जाएगा। बकरे का एक भी गुण अच्छा नहीं है, उसे खाने से केवल माँस बढ़ता है, तब भी लोग उसे खाते हैं। देश को चलानेवाला कोई भी हो लेकिन हमारा देह चलानेवाला राम ही होना चाहिए। मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार सभी आत्मा के साथी हैं, लेकिन शरीर में उनका स्थान कहाँ है यह किसी को नहीं पता। जिनके पति वानप्रस्थ में संन्यास लेकर जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, ऐसे पतियों की पत्नियों को उन्हें ऐसा करने में साथ देना चाहिए।
यह देश वीरांगनाओं का है, यहाँ रानी लक्ष्मीबाई ने 5 मंजिला किले से अंग्रेज़ों पर घोड़े पर सवार होकर आक्रमण किया था। और संत जी रानी लक्ष्मीबाई को स्मरण करते हुए गीत गाया "रेशमी सलवार कुर्ता जाली का, रूप सहा न जाए झाँसीवाली का" ! भरत शत्रुघ्न कश्मीर आवेद विद्या सीखने के लिए गए थे। किवाड़ों में दरार पड़ने लगे, आँगन की तुलसी सूख गई, गर्भवती महिलाएं भी ऐसी स्थिति में अपने भगवान श्री राम जी के साथ वनवास में उनके साथ जाना चाहती थीं। घोड़ों के आँसू नहीं रुक रहे थे। आगे बताया कि मित्र, पत्नी और धन की पहचान आपत्ति काल में होती है। केवट से कुछ सीखना चाहिए, नाविक को साधुओं से भी पैसा नहीं लेनी चाहिए । संत जी ने आग्रह करते हुए कहा कि शिष्यों को चाहिए कि गुरु से भेंट होने पर संसार के प्रश्न न पूछते हुए आत्मा के कल्याण की चर्चाएं करनी चाहिए तभी समय सफल है समझो।
ज्ञात हो कि 10 अप्रैल को प्रातः 7 बजे श्री राम कृपा महायज्ञ का आयोजन किया गया है। कथा का समय बदलकर प्रातः 10 बजे किया गया है तथा ठीक 12 बजे रामलला का अवतरण महोत्सव बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाएगा।