: ईद-उल-जुहा प्रेम, निस्वार्थता और बलिदान का पर्व है: नन्हे मिंया
Tue, May 3, 2022
जितना हो सकता है लोगों की मदद करता हूँ यही मेरी ईद है: मोहम्मद इमरान अंसारी
ईद हम सबके जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाए यही कामना है: सुल्तान
अयोध्या। देशभर में ईद-उल-जुहा मनाई जा रही है। रामनगरी अयोध्या में गंगा जमुनी तहजीब के सबसे बड़े झंडाबरदार मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया ने कहा कि ईद-उल-जुहा प्रेम, निस्वार्थता और बलिदान का भावना के प्रति आभार व्यक्त करने और समाज में एकता और भाईचारे के लिए मिलकर काम करने का त्योहार है। बकरीद या फिर कहें ईद उल जुहा का पर्व हमारे मुस्लिम समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। इसका संबंध कुर्बानी से है। कुर्बानी का असल अर्थ बलिदान है, जो दूसरों के लिए दिया गया हो। नन्हे मिंया ने सभी को प्रेम मोहब्बत आपसी भाईचारा बनायें रखने की बात कही। उन्होंने अयोध्या पुलिस को बधाई देते हुए कहा कि हमारी पुलिस अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से कर रही है हम सब की भी जिम्मेदारी है कि समाज में आपसी भाईचारे को बनाए रखें और एक दूसरे के साथ गले मिलकर खुशियां बांटे।
नन्हे मिंया के पुत्र समाजसेवी मोहम्मद इमरान अंसारी ने भी अयोध्या समेत पूरे देशवासियों को ईद की बधाई दी है। इमरान ने कहा- ईद मुबारक। ईद उल जुहा पर शुभकामनाएं। उम्मीद करता हूं, यह दिन समाज के भले के लिए सामूहिक सद्भाव, लगाव और सबको साथ लेकर चलने की भावना को बढ़ाएगा। मोहम्मद इमरान अंसारी ने ईद पर गरीबों मजलूमों की मदद करते हुए अपनी ईद मनाई उन्होंने कहा कि ये खुशियां सभी के घरों में पहुंचनी चाहिए। इसलिए जितना हो सकता है लोगों की मदद करता हूँ यही मेरी ईद है।
गंगा जमुनी तहजीब की मिशाल मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया के दूसरे पुत्र जिनकी समाज में अपनी एक अलग पहचान है। लोगो की मदद करना जिनका अपना एक काम है ऐसे समाजसेवी सुल्तान अंसारी ने ईद की मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि ईद आपसी भाईचारे और त्याग की भावना का प्रतीक है। ईद हम सबके जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाए यही कामना है।
: हनुमान बाग में चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ शुरु
Tue, May 3, 2022
108 वैदिक आचार्य कर वाल्मीकीय रामायण पारायण तो 3 यज्ञशाला में पड़ेगी आहुतियां 51 वैदिक करेंगे विधिवत हवन पूजन
श्रीरामायण सूक्ति सुधाकर, सिंहाचलवास्तव्य, श्रीमदुभय वेदांत प्रवर्तक सहित वाल्मीकीय रामायण की विवेचना करेंगे गोपालकृष्णमाचार्य
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। जिसमें दक्षिण भारत से हजारों भक्त अपनी श्रद्धा निवेदित कर रहे है। पूरा हनुमान बाग परिसर दक्षिण परम्परा के पूजा पद्धति से सराबोर दिख रहा है। चारों तरह भक्तमय वातावरण बना हुआ है। इस महाउत्सव में तीन यज्ञशाला में 51 वैदिक आचार्य विधिवत हवन पूजन व आहुतियां डालेगें। तो 108 आचार्य वाल्मीकीय रामायण पारायण कर रहे है। वही देर शाम दक्षिण से आये श्री सातुलूरि गोपालकृष्णमाचार्य जी के श्रीमुख से वाल्मीकीय रामायण की दिव्य कथा होगी जिसमें आचार्य श्री श्रीरामायण सूक्ति सुधाकर, सिंहाचलवास्तव्य, श्रीमदुभय वेदांत प्रवर्तक समेत कई विषयों पर विवेचना करेंगे। यह आयोजन श्री वेंकाटाचार्य वैदिक संस्थान के तत्वावधान में हो रहा है। कार्यक्रम हनुमान बाग सेवा संस्थान के सानिध्य में सम्पादित हो रहा है। चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ का उत्सव 10 मई तक चलेगा। कार्यक्रम में मुख्य रुप से 24 कुंडो में भगवदाराधना , तीर्थ प्रसाद वाल्मीकि रामायण का पारायण प्रत्येक श्लोकों के हवन के साथ होगा। इस महाउत्सव को हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम की यजमान लक्ष्मी न्यायापति है। इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में सुनील दास रोहित शास्त्री समेत पूरा हनुमान बाग परिवार लगा हुआ है।
: संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे मिथिलाशरण व किशोरीशरण: महंत करुणानिधान शरण
Sun, Apr 24, 2022
सियाराम किला झुनकी घाट के प्रथम व द्धितीय आचार्य को संत धर्माचार्यों ने किया नमन
पूर्वाचार्यों की परम्परा को प्राणपण से आगे बढ़ाकर गौरवान्वित है सियारामकिला
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो भगवद भजन में ही अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिये। उन संतों में एक थे परम पूज्य महंत मिथिलाशरण महाराज व पूज्य महंत किशोरीशरण महाराज। मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित प्रतिष्ठित पीठ सियाराम किला झुनकी घाट के प्रथम आचार्य महंत मिथिलाशरण जी महाराज की 32वीं व द्धितीय आचार्य महंत किशोरीशरण जी महाराज की 23वीं पुण्यतिथि आज बड़े ही श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इन दिग्गज आचार्यों से मात्र सियाराम किला ही नही सम्पूर्ण रामनगरी आलोकित है।
रामनगरी में साधना एवं सिद्धि के पर्याय स्वामी जानकीशरण जी महाराज झुनकी बाबा के शिष्य मिथिलाशरण जी को गुरु परम्परा के प्रति समर्पित पहुंचे हुए साधक यशश्वी महंत के रुप में याद किया जाता है। सियाराम किला के रुप में एक धार्मिक संस्था को भव्यता देने वाले पूज्य मिथिलाशरण जी को जब लगा कि उनका शरीर थक रहा है, तो उन्होंने महंती छोड़ने में एक पल की भी देरी नही की और अंतिम श्वांस लेने के 6 वर्ष पूर्व ही उन्होंने महंती अपने शिष्य किशोरीशरण जी को प्रदान की। यह निर्णय सियाराम किला की गौरवपूर्ण परम्परा में चार चांद लगाने वाला रहा। गुरु भक्त के रुप में पूज्य किशोरीशरण जी आज भी स्मरणीय है, तो स्थान की मर्यादा के अनुरुप साधु सेवी के रुप में उनका कोई सानी नहीं है।
इन दोनो आचार्य के पुण्यतिथि के अवसर पर मंदिर में रामनगरी के विशिष्ट संतो ने आचार्य श्री को श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किये। यह सारा कार्यक्रम मंदिर के वर्तमान महंत करुणानिधान शरण जी महाराज के पावन सानिध्य व मंदिर के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक स्वामी प्रभंजनानन्द शरण जी महाराज के देखरेख में सम्पादित हुआ। कार्यक्रम में आज प्रातःकाल पूज्य महाराज श्री की चरण पादुका पूजन व भव्य अभिषेक किया गया। कार्यक्रम का समापन भंडारे के साथ हुआ।आये हुए अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीके से किया गया।
महंत किशोरीशरण जी महाराज के शिष्य एवं उत्ताराधिकारी वर्तमान महंत करुणानिधान शरण जी महाराज के अनुसार पूर्वाचार्यों ने सियाराम किला को परिपूर्ण धार्मिक केंद्र के तौर पर स्थापित करने में कोई कसर नही छोडी पर उनका प्रताप था वे मठ मंदिर के बजाय प्रभु भक्ति एवं चरित्र निर्माण के पक्षधर थे, आज हम पूर्वाचार्यों की इस परम्परा को प्राणपण से आगे बढ़ाकर गौरवान्वित है।इस अवसर पर महंत कमलनयन दास, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्रीमहंत मैथिली रमण शरण, श्रीमहंत सियाकिशोरी शरण, अधिकारी राजकुमार दास, महंत बलराम दास हनुमानगढ़ी, महंत रामकुमार दास, महंत मनमोहन दास, महंत रामनरेश दास, नाका हनुमानगढ़ी के महंत राम दास, जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य, महंत अवधेश दास,आलोक मिश्रा, अनुज दास, अग्रवाल सभा के अध्यक्ष उत्तम बंसल, अभिषेक अग्रवाल, अनुभव अग्रवाल, पवन अग्रवाल आदि मौजूद रहे।