: मन की व्यथा भुलाकर प्रभु की कथा में लगाए मन तो दु:ख होगे दूर: देशपांडे
Wed, Nov 16, 2022
हनुमान बाग मंदिर में श्रीराम कथा का उल्लास चरम पर, मराठी भाषा में हो रहा रामकथा
अयोध्या। भगवान के दिव्य गुणानुवादों के श्रवण, मनन और चिंतन से जीवन में शुभता, श्रेष्ठता और दिव्यता का आरोहण होता है। अतः इहलौकिक एवं पारलौकिक अनुकूलताओं के लिए भगवान का स्मरण प्रतिपल करते रहें। उक्त बातें उक्त बातें मराठी भाषा में प्रख्यात कथावाचक समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे जी ने हनुमान बाग मंदिर में राम कथा के तृतीय दिवस में कही। प्रख्यात कथावाचक राघवेंद्र बुआ देशपांडे जी ने कहा कि मनुष्य को हमेशा भगवान का चिंतन करना चाहिए। भगवान का चिंतन करने से धीरे-धीरे उनके गुण हममें आने लगते हैं। यदि मनुष्य वास्तविक शांति चाहता है, तो उसके चिंता को घटाकर चिंतन को बढ़ाना होगा। चिंता और चिता में कोई अंतर नहीं हैं। चिंता मनुष्य को जिंदा जलाती है और चिता मरे हुए को। जीव चिंता छोड़कर भगवान का चिंतन करे। चिंतन, भजन और मनन करने से काम, क्रोध, लोभ और मोह से मुक्ति मिलती है।उन्होंने कहा कि तब ही प्रभु की भक्ति में मन लगता है। मन की व्यथा भुलाकर प्रभु की कथा में मानव मन लगाए तो उसके दु:ख दूर होते हैं। परमात्मा का कोई आदि है न कोई अंत, वे तो निराकार स्वरूप हैं। भक्त उनका जिस रूप में स्मरण करता है वे उसे उसी रूप में दर्शन देते हैं। आत्मा-परमात्मा का सीधा संबंध है। जब तक मनुष्य अपनी आत्मा के विकार और मन को शुद्ध नहीं करता है, उसे परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती। राघवेंद्र बुआ देशपांडे ने कहा कि ईश्वर के गुणों का ज्ञान प्राप्त करने का प्राचीन उपाय तो वेद व उपनिषद आदि ग्रन्थ ही हैं। वेद व वेदभाष्य का अध्ययन कर के अनन्त गुणों वाले ईश्वर के अनेकानेक गुणों का ज्ञान प्राप्त होता है। ईश्वर के स्वरूप पर दृष्टि डालें तो ज्ञान हो जाता है।कथा के अंत में धूमधाम से श्रीराम जन्मोत्सव मनाया गया। मराठी भाषा में हो रही राम कथा का हिंदी अनुवाद कर रहे हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास महाराज। यह महोत्सव हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। इस महोत्सव में केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।
: श्रीराम धर्म की प्रतिमूर्ति है: राघवेंद्र बुआ देशपांडे
Wed, Nov 16, 2022
द्धितीय दिवस पर कथाव्यास ने कहा, जिस देश में युवा का जीवन धर्म के लिये समर्पित हो जाये वह समाज व राष्ट्र धन्य हो जाता है
श्री रामकथा का मराठी से हिन्दी में अनुवाद कर रहे श्रीमहंत जगदीश दास
धैर्य और संयम सफलता की कुंजी है: श्रीमहंत जगदीश दास
अयोध्या। श्रीलक्ष्मण का चरित्र अर्पण ,समर्पण और विसर्जन का चरित्र है।उन्होंने अपने जीवन को श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया है।श्रीराम धर्म की प्रतिमूर्ति है।राम धर्म के स्वरूप है।राम सनातन धर्म के प्रतीक है।राम धर्म की आत्मा है। उक्त बातें मराठी भाषा में प्रख्यात कथावाचक समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे जी ने हनुमान बाग मंदिर में राम कथा के द्धितीय दिवस में कही। प्रख्यात कथावाचक राघवेंद्र बुआ देशपांडे जी ने बताया कि लक्ष्मण का जीवन धर्म के प्रति समर्पित है।देश के हर युवा के प्रतीक है लक्ष्मण।जिस देश में युवा का जीवन धर्म के लिये समर्पित हो जाये वह समाज व राष्ट्र धन्य हो जाता है।श्रीराम राष्ट्र के मंगल के लिये यात्रा करते हैं और लक्ष्मण उनके सहयोगी है।जिस देश के युवा राष्ट्र धर्म और सेवा धर्म के समर्पित होते है वही रामराज्य की स्थापना होती है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण शब्द का अर्थ होता है जिसका मन लक्ष्य में लगा हो।जिस युवा का मन लक्ष्य से भटक जाता है वो कभी लक्ष्मण नहीं बन सकता।लक्ष्य विहीन युवा,समाज और राष्ट्र नष्ट हो जाता है।जीवन का जो लक्ष्य है उसके प्रति हमारा जीवन पूर्ण समर्पित होना चाहिये।
मराठी कथा का हिंदी अनुवाद करते हुए हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि धैर्य और संयम सफलता की कुंजी है। जब मन इन्द्रियों के वशीभूत होता है, तब संयम की लक्ष्मण रेखा लाँघे जाने का खतरा बन जाता है, भावनाएँ अनियंत्रित हो जाती हैं। असंयम से मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है इंसान असंवेदनशील हो जाता है मर्यादाएँ भंग हो जाती हैं। इन सबके लिए मनुष्य की भोगी वृत्ति जिम्मेदार है। काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या असंयम के जनक हैं व संयम के परम शत्रु हैं। इसी तरह नकारात्मक आग में घी का काम करती है। वास्तव में सारे गुणों की डोर संयम से बँधी हुई होती है। जब यह डोर टूटती है तो सारे गुण पतंग की भाँति हिचकोले खाते हुए व्यक्तित्व से गुम होते प्रतीत होते हैं। महंत जगदीश दास ने गुरूका महिमा गाते हुए बताया की गुरू ईश्वर का ही एक स्वरूप है। राम चरित मानस मे तुलसीदासजी गुरू चरण का महीमा के साथ साथ गुरू चरण रज की महीमा गाई है। गुरू महीमा के साथ साथ महाराज जी ने अवधपुरी का महीमा सरयु मैया का महीमा विशेष रूप मे दर्शन करवाया।उन्होंने कहा कि अयोध्या पावन नगरी स्वर्ग से भी अधिक अयोध्या की महीमा है साथ ही सरयु मैया
के दर्शन से ही पाप नष्ट हो जाते है।आज राम कथा मे सति चरित्र का विशेष रूप से दर्शन करवाया। हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य इस महोत्सव को मिल रहा।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। इस महोत्सव में केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए स्वामी युगलानन्यशरण
Wed, Nov 16, 2022
143वीं पुण्य तिथि का समारोह पूर्वक हुआ समापन
अयोध्या । न केवल साधना बल्कि अपनी विद्वता के चलते श्रीरामभक्ति की मधुरशाखा के अनमोल रत्न बने आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के संस्थापक स्वामी युगलानन्य शरण को उनकी 143 वीं पुण्यतिथि पर उनकी तपोस्थली लक्ष्मण किला में समारोहपूर्वक श्रद्धांजलि दी गई।रामनगरी की प्रधानतम पीठों में शुमार श्री लक्ष्मण किला के संस्थापक व राम भक्ति धारा के संत शिरोमणि आचार्य श्री स्वामी युगलानन्यशरण जी महराज को आज धर्म नगरी अयोध्या के संतो महन्तो व शिष्य गणों ने नमन करते हुये श्रद्धा सुमन अर्पित किया। किलाधीश महन्त मैथिली रमण शरण ने बताया कि आचार्य श्री का 143वीं पुण्य तिथि पर आज प्रातः स्वामी जी द्वारा रचित ग्रंथों नामकांति, रूपकांति, लीलाकांति व धामकांति का का सामूहिक पाठ किया गया। किलाधीश महन्त मैथिली रमण शरण ने बताया कि अगहन कृष्ण सप्तमी यानी आज अचार्य श्री को रामनगरी के संतो महन्तो ने नमन किया। उन्होने बताया कि आये हुये अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीके से प्रख्यात साहित्यिक हनुमान निवास मंदिर के महन्त मिथिलेश नन्दनी शरण व किला के युवा संत सूर्य प्रकाश शरण ने किया। इस अवसर पर हनुमत सदन के महन्त अवध किशोर शरण, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, महंत कृपालु रामभूषण दास, महंत अवध बिहारी दास, महंत गौरीशंकर दास, महंत जनार्दन दास, महंत सनद कुमार शरण, महंत परशुराम दास, महंत रामजीशरण, महंत रामकुमार दास, महंत अवधेश दास, महंत सीताराम दास त्यागी, महंत अगंद दास,महंत जयरामदास, महामंडलेश्वर आशुतोष दास, पूर्व सांसद विनय कटियार, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, पार्षद पुजारी रमेश दास, पार्षद आलोक मिश्रा, पार्षद महेंद्र शुक्ला सहित बड़ी संख्या में संत महन्त व भक्तगण मौजूद रहे।