: निर्गुण ब्रह्म को सगुण साकार बनाकर स्थापित करने के उत्सव को विवाह महोत्सव कहते हैं: देशपांडे
Sat, Nov 19, 2022
राघवेंद्र बुआ ने श्रीराम कथा के पंचम दिवस श्रीराम विवाहोत्सव का बहुत ही सुंदर प्रसंग प्रस्तुत किया
अयोध्या। हनुमान बाग मंदिर में श्रीराम कथा का उल्लास अपने चरम पर है। आज कथा के पंचम दिवस पर व्यासपीठ से समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे ने श्री राम विवाहोत्सव का बहुत ही प्रसंग प्रस्तुत कर पूरे परिसर को भाव विभोर कर दिया। कथाव्यास देशपांडे जी ने मराठी भाषा में श्री राम-सीता के विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था। इसका हिंदी में अनुवाद हनुमान बाग के श्री महंत जगदीश दास महाराज कर रहें थे। उन्होंने बताया कि एक दिन सीता जी ने घर की सफाई करते हुए उसे उठाकर दूसरी जगह रख दिया। उसे देख राजा जनक को आश्चर्य हुआ क्योंकि धनुष किसी से उठता नहीं था। राजा ने प्रतिज्ञा किया कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी से सीता का विवाह होगा। उन्होंने स्वयंवर की तिथि निर्धारित कर सभी देश के राजा और महाराजाओं को निमंत्रण पत्र भेजा। एक-एक कर लोगों ने धनुष उठाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। गुरु की आज्ञा से श्री राम ने धनुष उठा प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। इसके बाद धूमधाम से सीता व राम का विवाह हुआ। माता सीता ने जैसे प्रभुराम को वर माला डाली वैसे ही देवता फूलों की वर्षा करने लगे।निर्गुण ब्रह्म को सगुण साकार बनाकर स्थापित करने के उत्सव को विवाह महोत्सव कहते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम जो वेद प्रतिपाद्य हैं जिनको अकल अनी अवैध निर्गुण निरंजन कहा जाता था वह परमात्मा आज भक्तों के पराभूत होकर अपनी सगुण सत्ता को मिथिला में स्थापित कर रहे हैं। महाराज जी ने कहा कि सारे जनकपुर वासी उत्सव का आनंद है ले रहे हैं पूरी अयोध्या पूरा विश्व एक कीर्तिमान नये संबंध का आनंद ले रहा था। नये चेतना ऊर्जा का संचार हो गया। और यही भगवान के अवतार का भी परम कारण है।देशपांडे जी ने कहा कि जगत मात्र को आनंद देना और वही आनंद आज मिथिला में वितरित हो रहा है मिथिला के लोगों का हृदय और मन दोनों प्रफुल्लित है जो कि ब्रह्म साक्षात्कार हो रहा है ब्रह्म साक्षात होने पर मन स्वतः निर्मल बन जाता है और उस निर्मल मन में परमात्मा अभिभूत होकर स्थापित हो जाते हैं।यह महोत्सव हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। इस महोत्सव में केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।
: श्रीमद्भागवत कथा मृत्यु को महोत्सव बनाने की कथा है: रामानन्दाचार्य
Sat, Nov 19, 2022
गहोई धर्मशाला में धूमधाम से श्रीमद् भागवत कथा का हुआ शुभारंभ, मंदिर से निकली शोभायात्रा
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या के स्वर्गद्वार स्थित गहोई धर्मशाला में धूमधाम से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व मंदिर से शोभायात्रा निकाली। जो मां सरयू के पावन तट गई जहां पर विधिवत पूजन अर्चन किया गया इसके बाद शोभायात्रा पुनः मंदिर वापस आई। व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी कर रहें है। कथा के प्रथम दिवस जगद्गुरु जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत की कथा शरणागति की कथा है शरणागति का अर्थ है भगवान के चरणों में समर्पित हो जाना और भगवान के चरणों में समर्पित होने के लिए सबसे बड़ी बात है अपने आप का परित्याग कर देना। उन्होंने कहा कि जब आप अपने अहम का परित्याग करके भगवान के शरण आप होते हैं तब एक समर्थ गुरु सुखदेव जी महाराज जैसा प्रगट हो करके आपके जीवन के उन तमाम झंझावात को खत्म करके आपके जीवन में भक्ति की ज्योति जला देता है। स्वामीजी ने कहा कि गुरु की शरणागति जीवन में मृत्यु के बंधन को काटकर मोक्ष की ओर आपके मार्ग को प्रशस्त करती है। श्रीमद्भागवत की कथा मृत्यु को महोत्सव बनाने की कथा है। यह महोत्सव गहोई धर्मशाला के महंत राम लखन शरण महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन कथा।यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला ने व्यासपीठ का पूजन किया। इस मौके पर गौरव दास, शिवेन्द्र दास आदि लोग मौजूद रहें।
: रामकथा राष्ट्र व्यथा का समाधान है: राघवेंद्र बुआ
Fri, Nov 18, 2022
राघवेंद्र बुआ देशपांडे ने श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस पर बड़े ही धूमधाम के साथ श्री राम जन्म उत्सव व भगवान राम की बाललीलाओं का बड़ा सुंदर प्रसंग सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया
अयोध्या। श्रीराम का चरित्र मानव जीवन की कसौटी है।एक पूर्ण मानव का चरित्र कैसा होना चाहिये?इसका मानदण्ड श्रीराम का आदर्श चरित्र ही है।व्यक्ति का चरित्र ही समाज के चरित्र को आकार देता है।जब कोई राम जैसा व्यक्तित्व अवतरित होता है तो चरित्र की ख़ुशबू चारों ओर फैलने लगती है। उक्त बातें मराठी भाषा में प्रख्यात कथावाचक समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे जी ने हनुमान बाग मंदिर में राम कथा के चतुर्थ दिवस में कही। श्रीराम कथा की अमृत वर्षा करते हुए देशपांडे ने कहा कि हर मनुष्य अपने चरित्र को सँवारने की होड़ में लग जाता है। क्षुद्रताओं को छोड़ श्रेष्ठता की ओर दौड़ने लगता है।जीवन का एक कटु सत्य यह है कि श्रेष्ठ आदर्शों से प्रेरित लोग ही श्रेष्ठ जनों की राह पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में क्षुद्रताओं का बोलबाला है। हर क़दम पर लूट और घोटाला है।इसका कारण यह है कि आज का आदमी क्षुद्र आदर्शों से प्रेरित है।असत्य कितना भी लुभावना क्यों न हो वो सत्य की कभी बराबरी नहीं कर सकता। व्यासजी ने कहा कि इन्द्र भी जिस वैभव सम्पन्न अयोध्या की राजसम्पदा के लिये तरसते थे श्रीराम को उसे छोड़ने में एक क्षण भी नही लगे।लोभ के विरूद्ध त्याग का युद्ध होता है।श्रीराम पैदल यात्रा करते हुये वन की ओर प्रस्थान करते है और समाज के आख़िरी व्यक्ति तक को हृदय से लगाते है।श्रीराम की बडप्पनता यह थी कि उन्होनें केवट को बड़ा बना दिया।चित्रकूट में कोल-भील को हृदय से लगाते है।सारी दुनिया को देने वाले राम शबरी से माँगकर फल खाते है।तब समाज में राम राज्य की स्थापना हुयी थी।वर्तमान समय में जब मानव दिशाहीन हो गया है,क्षुद्र स्वार्थों मे जी रहा है ऐसे में श्रीराम का चरित्र समाज के लिये अत्यावश्यक है। देशपांडे जी ने कहा कि रामचरितमानस में दो वाटिकाओ का वर्णन है एक जोगी की वाटिका जो पुष्प वाटिका है और एक भोगी की वाटिका जो अशोक वाटिका है। विदेह नगर की वाटिका पुष्प वाटिका है। देह नगर की वाटिका है अशोक वाटिका।दोनों वाटिकाओं का केन्द्र बिन्दु जगज्जननी जानकी जी है।पुष्प-वाटिका में शब्दों की सुन्दर चित्रकारी द्वारा राम और सीता के मनोभावों का मनोरम वर्णन किया है। मानव रूप में जन्मे राम मानव मन के किसी भी कोमल भाव से अछूते नहीं रहे। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में भावी जीवनसंगिनी को निरखते श्रीराम के मन में प्रेम और क्षोभ एक साथ हिलोरे मारता है। वहीँ सीता भी भावी जीवनसाथी के रूप में राम की कामना के साथ पिता जनक के प्रण का स्मरण कर दुखी होती हैं। प्रभु श्रीराम के दिव्य रूप और गुणों पर चिंतन और मनन करने से अन्तःकरण में पवित्रता शुभता उदारता की भावनायें आती हैं और दिव्यता का प्रस्फुटन होता है। हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास महाराज कथा का मराठी से हिंदी में अनुवाद करके लोगों को समझा रहें थे। यह महोत्सव हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। इस महोत्सव में केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।