: भगवान रामलला के उत्सव विग्रह का हुआ महामिलन महोत्सव
Mon, Mar 27, 2023
अम्माजी मंदिर से रथ पर विराजमान होकर रामलला सदन देवस्थान् पहुंचे भगवान रामलला, हुआ विशेष पूजन आरती
अष्टमी को रामलला सदन देवस्थान् से भगवान रामलला रथ पर सवार होकर पहुंचेगे अम्माजी मंदिर
अयोध्या। रामलला सदन देवस्थान् मंदिर में रामजन्म उत्सव का उल्लास अपने शिखर पर है। मंदिर में दक्षिण भारतीय परम्परा के अनुसार भगवान का विधिवत पूजन अभिषेक जा रहा है। दक्षिण भारत के प्रख्यात संत पार्थ स्वामी द्धारा स्थापित भगवान रामलला का मिलन महामहोत्सव रविवार को देर शाम मनाया गया।दक्षिण भारतीय परम्परा के अम्माजी मंदिर में शुरू हुए पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव के अवसर पर रविवार को सांयकाल मंगलगिरि वाहन से भगवान की शोभायात्रा बाजे-गाजे के साथ निकाली गई। इस रथयात्रा में तमिलनाडु से आए पारम्परिक वाद्ययंत्रों को भी शामिल किया गया। रथारूढ़ भगवान की सवारी को चेन्नई व अन्य क्षेत्रों से आए तमिल भाषी श्रद्धालु रस्से के सहारे खींच रहे थे। यह यात्रा रामलला सदन देवस्थान् पहुंची जहां भगवान को मंदिर में विराजमान कराके दक्षिण परम्परा अनुसार आचार्यों द्धारा आरती पूजन किया गया इसके बाथ प्रसाद वितरण कर भगवान को पुनः रथ पर विराजमान कराके अम्मा जी मंदिर ले गये।
रामलला सदन देवस्थान् पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज के निर्देशन में भगवान रामलला के महा मिलन महोत्सव मनाया गया।
डा राघवाचार्य कहते है कि रामलला सदन देवस्थान् मंदिर में विराजमान भगवान रामलला का उत्सव विग्रह पूज्य पार्थ स्वामीजी द्धारा स्थापित अम्मा जी मंदिर से से यहा स्थापित हुई है। उन्हीं उत्सव विग्रह का मिलन महोत्सव मनाया गया जिसमें रामलला सदन देवस्थान् में अम्मा जी मंदिर से उत्सव विग्रह आयी जिसका यहां विशेष पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि अष्टमी तिथि को रामलला सदन का उत्सव विग्रह अम्मा जी मंदिर रथों पर विराजमान होकर जायेगी।
: विश्व के भाग्य की कपाट अयोध्या नगरी खोलेगी : वेदांती जी
Sun, Mar 26, 2023
कहा, अयोध्या समाधान-मूलक है, व्यवस्था-मूलक है और धर्म की रक्षा करती है
सीताराम विवाह महोत्सव की कथा में ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने कहा,विवाह दो आत्माओं का पवित्र बन्धन है
हिंदू धाम में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन मंगलवार को, जुटेंगे देश के प्रख्यात कवि
अयोध्या। भारत से विश्व के भाग्य की कपाट कोई नगरी खोलेगी तो वह अयोध्या है। इसी से राष्ट्रोदय होगा, विश्व को नई दृष्टि मिलेगी, क्योंकि अयोध्या समाधान-मूलक है, व्यवस्था-मूलक है और धर्म की रक्षा करती है।भारत को राम जैसा आदर्श अयोध्या ने दिया है।अयोध्या भू वैकुण्ठ है।अयोध्या में आते ही व्यक्ति के भीतर का सारा युद्ध समाप्त हो जाता है जो युद्ध रहित है वही अयोध्या है।अयोध्या को देवताओं की पुरी कहा गया है और अयोध्या वासियो को साक्षात् जगन्नाथ का रूप। उक्त बातें ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने कही। श्री वेदांती जी हिंदू धाम में श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा पंचम दिवस व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहें।
ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने कहा कि भगवान श्रीसीताराम जी के विवाह ने ही दुनिया को विवाह संस्कार का आदर्श सिखलाया। उन्होंने कहा कि विवाह केवल स्त्री और पुरुष के गृहस्थ जीवन में प्रवेश का ही प्रसंग नहीं है बल्कि यह जीवन को संपूर्णता देने का अवसर है।श्रीराम के विवाह के जरिए हम विवाह की महत्ता और उसके गहन अर्थों से परिचित हो सकते हैं। महाराज जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रीराम-सीता आदर्श दंपति हैं। श्रीराम ने जहां मर्यादा का पालन करके आदर्श पति और पुरुषोत्तम पद प्राप्त किया वहीं माता सीता ने सारे संसार के समक्ष अपने पतिव्रता धर्म के पालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।विवाह दो आत्माओं का पवित्र बन्धन है। दो प्राणी अपने अलग- अलग अस्तित्वों को समाप्त कर एक सम्मिलित इकाई का निर्माण करते हैं। स्त्री और पुरुष दोनों में परमात्मा ने कुछ विशेषताएँ और कुछ अपूर्णताएँ दे रखी हैं। विवाह सम्मिलन से एक- दूसरे की अपूर्णताओं को अपनी विशेषताओं से पूर्ण करते हैं, इससे समग्र व्यक्तित्व का निर्माण होता है। इसलिए विवाह को सामान्यतया मानव जीवन की एक आवश्यकता माना गया है। एक- दूसरे को अपनी योग्यताओं और भावनाओं का लाभ पहुँचाते हुए गाड़ी में लगे हुए दो पहियों की तरह प्रगति- पथ पर अग्रसर होते जाना विवाह का उद्देश्य है। हिंदू धाम रामजन्मोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह महोत्सव वशिष्ठ भवन पीठाधीश्वर महंत राघवेश दास वेंदाती जी महाराज के संयोजन में हो रहा है। कार्यक्रम में 28 मार्च मंगलवार को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया है जिसमे देश के तमाम नामागिरामी कवि शामिल होगे।
: भगवान लक्ष्मी नारायण का हुआ विधिवत अभिषेक, पूजन
Sun, Mar 26, 2023
गाय संपूर्ण विश्व की माता है, गो सेवा से ही गोविंद प्रसन्न होते हैं: श्रीधराचार्य
गोवर्धन लीला महोत्सव अशर्फी भवन में धूमधाम से मनाया गया, भगवान को लगा छप्पन भोग
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन में चैत्र रामनवमी के पावन अवसर में आयोजित सप्त दिवसीय अष्टोत्तर श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। महोत्सव में आज
भगवान लक्ष्मी नारायण के तिरु नक्षत्र के अवसर पर भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का अभिषेक सरयू जल, दूध एवं फल के जूस द्वारा वैदिक सुक्त पारायण से महाराज श्री ने भगवान का अभिषेक हुआ। जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य जी ने अर्चा विग्रह की विशेषता बताते हुए कहा हम सभी जीव प्रभु के अंश हैं और प्रभु ही हमारे अंशी हैं भगवत सत्ता के बिना हम सभी शून्य है हमें हर एक क्षण प्रभु का चिंतन मनन स्मरण करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण कराते हुए कहा। जगत पिता परमात्मा को पुत्र रूप में प्राप्त करके नंद बाबा ने ब्राह्मणों को बुलाकर स्वस्तिवाचन कराया वेद पाठ कराया गौ दान किया सभी ब्राह्मणों को वस्त्रालंकार रत्न मणि माणिक्य का दान किया। तो वही मां यशोदा ने सभी ब्रजवासियों को उपहार दिए अपने रूप से जो सबको मोहित कर ले वही कृष्ण है कंस के द्वारा भेजी माया रूपी पूतना को भी उत्तम गति प्रदान करते है। स्वामीजी ने कहा कि प्रभु श्री कृष्ण शिक्षा देते हैं व्यक्ति चाहे दुष्ट भाव से ही क्यों नहीं यदि मेरी शरण में आ जाता है तो प्रभु श्री कृष्ण का गुण है शरणागत रक्षक हैं। प्रभु नंद बाबा ने गर्गाचार्य जी महाराज को बुलाकर नामकरण संस्कार कराया श्रीकृष्ण को गोद में लेकर गर्गाचार्य जी की समाधि लग गई मां यशोदा ने कहा बाबा आप नामकरण संस्कार करने आए हैं कि सोने। गर्गाचार्य जी बोले मां प्रभु दर्शन के लिए ही तो मैंने पुरोहित कर्म को अपनाया। भगवान श्री कृष्ण के सभी संस्कार गर्गाचार्य जी यथा समय पूर्ण करते है बचपन से ही प्रभु श्री कृष्ण अनेको राक्षसों का संहार करते हैं प्रभु माखन चोरी लीला के माध्यम से जन्म जन्मांतरों के पाप को चुराकर पुण्य उदित करने हेतु गोपियों के घर जाकर माखन चोरी लीला करते हैं। प्रभु गोचारण करने वन में जाते हैं गौ माता की सेवा नित्यप्रति करते हैं गौ माता के महत्व को बताते हुए प्रभु कहते है। गाय संपूर्ण विश्व की माता है गो सेवा से ही गोविंद प्रसन्न होते हैं। यमुना जी के विषाक्त जल को कालिया नाग से बचाने हेतु प्रभु यमुना जी के मध्य में जाकर कालिया नाग से युद्ध करते हैं शरणागति करके कालिया नाग यमुना जी को छोड़कर दूर चला जाता है। ब्रज में प्रभु श्री कृष्ण के जन्म लेने से नित्य उत्सव मनाया जाते हैं। प्रभु श्री कृष्ण का दर्शन पाकर सभी बृजवासी अपने को धन्य समझते है गिरिराज धरण की लीला के द्वारा प्रभु प्रकृति के पूजन का महत्व बताते हैं प्रभु श्री गोवर्धन पर्वत की पूजा सभी ब्रज वासियों से कराते हैं इंद्र सामंत मेघों के द्वारा ब्रज में घोर वृष्टि कराते हैं। सभी ब्रजवासियों के देखते-देखते कनिष्ठा अंगुली में सात कोस लंबे चौड़े गिरिराज पर्वत को उठा लेते हैं घबराकर इंद्र प्रभु चरणों में शरणागति करते हैं शरण में आए इंद्र को प्रभु अपना लेते है। गोवर्धन लीला का महोत्सव अशर्फी भवन में धूमधाम से मनाया गया भगवान को छप्पन भोग का प्रसाद लगाया। देश के विभिन्न राज्यों से पधारे भक्तजन भागवत कथा को सुनकर आनंदित हो रहे हैं।