: राम भक्तों की जेब पर है जालसाजों की नजर, फर्जी वेबसाइट बनाकर हो रही ऑनलाइन ठगी
Sat, Mar 9, 2024
राम भक्तों की जेब पर जालसाजों की नजर,फर्जी वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन ठगी
अयोध्या।अयोध्या पहुंचने वाले राम भक्तों पर जालसाजों की नजर है। राम मंदिर उद्घाटन के बाद से ऑनलाइन ठगी करनेवाला गिरोह सक्रिय है। जानकी महल ट्रस्ट के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानियां ने कहा राम भक्तों से ऑनलाइन ठगी की घटनाएं सामने आ रही हैं। पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन ठग गिरोह का पर्दाफाश जल्द किया जाएगा। होटल और धर्मशालाओं के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर राम भक्तों से ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। जानकी महल ट्रस्ट के आदित्य बताते हैं कि ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था नहीं है, न ही हमारे यहां एडवांस बुकिंग की व्यवस्था है। हमारे महल फरवरी 2025 तक फुल है। फर्जी वेबसाइट से ऑनलाइन ठगी के 50-60 मामले उजागर हुए हैं. उन्होंने बताया कि राम भक्तों ने जानकी महल ट्रस्ट में ठहरने के लिए ऑनलाइन पेमेंट किया।
रामनगरी अयोध्या में होटल बुकिंग के नाम पर पर्यटकों व श्रद्धालुओं से ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं।अयोध्या के जानकी महल ट्रस्ट को ठग सबसे ज्यादा निशाना बना रहे हैं। अयोध्या पहुंचने पर पीड़ितों को पता चला कि ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था नहीं है। राम भक्तों ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया. उन्होंने कहा जानकी महल ट्रस्ट के नाम से ऑनलाइन ठगी की शिकायत थाने में दर्ज कराई है। भक्त ने बताया कि वेबसाइट पर होटल के कमरों की फोटो दिखाई जाती है. कमरा बुक करने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। ट्रस्ट पहुंचने पर पता चला कि कमरे की बुकिंग नहीं हुई है।
सीओ आशुतोष मिश्रा कहते हैं ऑनलाइन ठगी का मामला संज्ञान में है। बीते कुछ दिनों से राम भक्तों को धर्मशाला, होटल और गेस्ट हाउस के नाम से चूना लगाया जा रहा है। जालसाज फर्जी वेबसाइट बनाकर राम भक्तों को गुमराह कर रहे हैं। मामले की जांच का जिम्मा साइबर सेल को सौंप दिया गया है। पुलिस जल्द ऑनलाइन ठग गिरोह का पर्दाफाश करने में कामयाब होगी। बता दें कि 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की तादाद आए दिन बढ़ती जा रही है. अब जालसाजों की नजर राम भक्तों की जेब पर है। ठग गिरोह फर्जी वेबसाइट पर होटल, धर्मशाला के कमरे का फोटो दिखाकर श्रद्धालुओं को निशाना बना रहे हैं।
: हनुमानगढ़ी के पहलवानों का दबदबा वैश्विक पटल पर स्थापित है: महंत संजयदास
Sat, Mar 9, 2024
हनुमानगढ़ी के इस अखाड़ा पर नन्हे पहलवान के साथ बड़े पहलवान भी सीख रहे हैं एक से बढ़कर एक दांव
अयोध्या। रामनगरी की प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी मल्य विद्या का भी गढ़ है। जहां के पहलवानों ने पूरे देश ही नही बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहलवानी का दबदबा स्थापित किया है। हनुमानगढ़ी के बड़े अखाड़े पर जोर अजमाइश करने वाले पहलवान वैश्विक पटल पर अपने नाम का झंडा फहराया है। उसी बड़े अखाड़े पर पहलवानी के दांव पेंच सीखने के लिए पहलवानों की प्रतियोगिता हो रही है।
कुश्ती की प्रतिभा में निखार लाने के लिए मजबूत इरादा और बहादुरी की जरूरत होती है। आज अगर हम कुश्ती सीख रहे पट्ठों पर जमकर मेहनत करें और वो भी मन लगा कर पहलवानी सीख लें तो निश्चित तौर पर जिला ही नहीं प्रदेश व देश में अपना व मां बाप का नाम जरूर रोशन कर सकेंगे। ये कहना है राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञान दास के उत्तराधिकारी महंत संजय दास जी महाराज का। महंत संजय दास अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमान गढ़ी के बड़े अखाड़ा में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता में पहलवानी के लिए तैयार हो रहे पट्ठों की हौसला अफजाई करने पहुंचे थे। गौरतलब है कि अयोध्या के डाभसेमर स्थित अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट स्टेडियम से आए उपक्रीड़ा अधिकारी विवेक कुमार व कोच नवरत्न कुमार द्वारा इन पहलवानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उनकी फिटनेस और तजुर्बा परखने के लिए इससे पहले भी एक कंप्टीशन जिला स्तरीय कराया गया है, और शुक्रवार को ये दूसरा कंप्टीशन कराया गया है, जिसमें पहले, दूसरे तथा तीसरे स्थान पर आने वाले नए पहलवानी के पट्ठों को महंत संजय दास द्वारा पुरस्कृत किया गया। बता दें कि अयोध्या हनुमान गढ़ी पर स्थित इस अखाड़े ने देश को बड़े बड़े पहलवान दिए हैं, जिनकी पहलवानी का डंका आज भी बजता है। इस दौरान हनुमान गढ़ी के वरिष्ठ पहलवान महंत राजेश दास, उत्तर प्रदेश केसरी पहलवान बाबा मनीराम दास सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
: 'रामेश्वरमय' हुई श्रीराम की नगरी
Sat, Mar 9, 2024
करतलिया बाबा हमेशा श्री राम नाम भक्ति में वह ओत प्रोत रहते थे: महंत बालयोगी रामदास
महाशिवरात्रि पर अयोध्या में गूंजा हर-हर महादेव का महाघोष
अयोध्या पहुंचे लाखों श्रद्धालु, सीएम योगी के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था रही तगड़ी
प्रसिद्ध नागेश्वर नाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
अयोध्या। श्रीहरि की साकेत नगरी अयोध्या शुक्रवार को भगवान राम के भी ईश्वर यानी 'रामेश्वर' को समर्पित हो गई। भोर के तीन बजे से ही हर-हर महादेव के महाघोष और भोले शंकर के जयकारों के बीच शिव भक्तों का सैलाब पहले सरयू नदी के घाट पर और इसके बाद शिव मंदिरों उमड़ पड़ा। प्रातः से ही सरयू में डुबकी लगाकर भक्त अपने आराध्य भोलेनाथ के दर्शन को आतुर दिखे। शिवरात्रि पर अयोध्या में जुटने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए योगी सरकार ने सुरक्षा चक्र को काफी मजबूत कर दिया था। सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। रूट डायवर्सन के माध्यम से भीड को नियंत्रित किया गया। वहीं राममंदिर में दर्शनार्थियों के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई थी।
सरयू तट पर विराजमान करतलिया बाबा हमेशा श्री राम नाम भक्ति में वह ओत प्रोत रहते थे। राम नाम के साथ बाबा का अनुराग भोलेनाथ में भी अटूट था और बाबा ने ही मां के तट पर स्थित शिवलिंग का शिरोचार्य किया और यह परंपरा निरंतर चलने लगी।बाबा भुनेश्वरनाथ महादेव प्राचीनता की पुष्टि उस सतह से होती है जिस पर वह शिवलिंग स्थापित है और वर्षों पहले करतलिया बाबा ने सहेजा और उनके शिष्य सूर्यनारायण दास ने मंदिर का निर्माण करवाया और वर्तमान पीठाधीश्वर महंत बाल योगी रामदास जी महाराज ने बाबा भोले के दरबार को और भी दिव्य भव्य मंदिर बनवा दिया। भोले के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला का निर्माण करवाया। मां सरयू की उत्पत्ति श्री हरि के आंसुओं से हुई है और सरयू तट पर विराजमान भुनेश्वर नाथ महादेव का नित्य प्रति श्रद्धालु भक्तगण मां सरयू के जल से अभिषेक करके पुण्य अर्जित कर रहे हैं। करतलिया बाबा आश्रम के महंत बाल योगी रामदास जी महाराज ने बताया की प्रभु श्री राम और भोले बाबा एक दूसरे को श्रेष्ठ मानते हैं और उनकी अभिन्नता शास्त्रों के साथ-साथ सिद्ध संत करतलिया बाबा ने साक्षात पहचानी है जो आज मां सरयू के तट पर बाबा भुनेश्वर नाथ महादेव के रूप में विराजमान है। रामचरितमानस में तुलसीदास जी महाराज ने कई बार प्रभु श्री राम और बाबा भोलेनाथ का वर्णन किया है और ऐसा माना जाता है कि अगर कोई राम जी का अपमान करके शिवजी को अपनाता है या शिव जी का अपमान करके राम जी को अपनाता है तो उसे किसी की भक्ति नहीं प्राप्त होती है। बल्कि दोनों आराध्य ऐसे भक्तों पर रुष्ट हो जाते हैं।
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद यह पहली महाशिवरात्रि है, इसलिए भोले के उपासक इसे और भी खास मान रहे हैं। बता दें कि भगवान श्रीराम जहां महादेव को अपना ईश्वर बताते हैं और उनके ज्योतिर्लिग की स्थापना करते हैं, वहीं देवाधिदेव शिव भी हनुमान के रूप में रुद्रावतार लेकर रामकाज और प्रभु भक्ति का प्रतिमान गढ़ देते हैं। श्रीराम और शिव के बीच इस अलौकिक संबंध की झलक अयोध्या में हर जगह बिखरी दिखाई दी। नगर के विभिन्न शिवालयों में भोर से ही श्रद्धा और भक्ति में सराबोर शिव भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली।