: गुरुओं को शीश नवा अयोध्या पहुंचे योगी, रामलला व हनुमानगढ़ी के किये दर्शन
Mon, Jan 29, 2024
एक महीने में पांचवीं बार मुख्यमंत्री ने किया ¬रामलला का दर्शन पूजन
श्रीराममंदिर में श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का सीएम ने लिया जायजा
हनुमानगढ़ी में वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने सीएम योगी को कराया पूजन
अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी के दर्शन-पूजन किए। संकट मोचन हनुमान के दर्शन कर सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुखी-स्वस्थ उत्तर प्रदेश की कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला के दर्शन किये। मुख्यमंत्री ने इस दौरान यहां पर श्रद्धालुओं के लिए की गई सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सीएम योगी गोरखपुर में अपने गुरुओं को शीश नवाकर दोपहर में अयोध्या पहुंचे। सोमवार को रामनगरी पहुंचने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया। जनवरी माह में सीएम योगी का रामनगरी का यह छठवां दौरा है। इससे पहले मुख्यमंत्री 9 जनवरी, 14 जनवरी, 19 जनवरी, 21-22 जनवरी और 23 जनवरी को अयोध्या पहुंचे थे। सोमवार को मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं के संदर्भ में ना केवल जानकारी ली, बल्कि खुद जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को परखा और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये। सीएम योगी ने इस दौरान दर्शनार्थियों से भी बातचीत करके फीडबैक लिया। हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला के दर्शन-पूजन किए। वहीं मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से व्यवस्था की जानकारी ली। सीएम योगी ने रामलला के मंदिर में साष्टांग दंडवत होकर प्रभु श्रीराम से प्रदेशवासियों के सुख और समृद्धि की कामना की। इस दौरान मण्डलायुक्त गौरव दयाल द्वारा दर्शनार्थियो के सुलभ दर्शन हेतु किये गए प्रबंधों के सम्बंध में अवगत कराया गया। निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद स्पेशल डीजी प्रशांत कुमार, ए0डी0जी0 जोन पीयूष मोर्डिया, ए0डी0जी0 सुरक्षा रघुवीर लाल, आईजी प्रवीण कुमार, जिलाधिकारी नितीश कुमार, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, मेयर गिरीश पति त्रिपाठी, नगर आयुक्त विशाल सिंह, एस0पी0 सुरक्षा पंकज पांडेय, सहित अन्य सम्बन्धित उपस्थित रहे।
: संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है: पुण्डरीक गोस्वामी
Sun, Jan 28, 2024
कहा, संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है
रामकोट की परिक्रमा करते आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी, श्रीमहंत डा भरत दास, आईपीएस एस एन सिंह व डा राम गर्ग
श्री मन्माधव गौड़ेश्वर वैष्णव आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी व उदासीन ऋषि आश्रम के श्रीमहंत डा भरत दास सहित सौकड़ों संत साधकों ने हरे रामा रहे कृष्णा के धुन पर नाचते गाते की रामकोट की परिक्रमा
सांस्कृतिक संध्या में भाव प्रस्तुति करते निमाई पाठशाला के लोग
श्री राम लला सरकार की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा तृतीय सांस्कृतिक संध्या सत्र में निमाई पाठशाला द्वारा किया गया भाव प्रस्तुति
परिक्रमा में नृत्य करते भक्त
अयोध्या। उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली में श्री राम लला सरकार की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का उल्लास अपने चरम पर है। आश्रम में सुबह से लेकर देरशाम तक उत्सव का क्रम चल रहा है। उदासीन आश्रम की सुबह रामचरित मानस के पाठ से तो शाम सांस्कृतिक संध्या से हो रहा है। श्रीमद् भागवत कथा की दिव्य भव्य रसमयी कथा वृंदावन धाम के भगवान राधारमण सरकार के परमभक्त श्री मन्माधव गौड़ेश्वर वैष्णव आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी कर रहें है।चतुर्थ दिन की कथा में पुण्डरीक गोस्वामी जी ने कहा कि संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है। उन्होंने कहा कि संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है, क्योंकि संत के चरण तीर्थों में घूमते-रहते हैं, वो सभी जगह जाते हैं, इसलिए जब कभी भी संत आएं तो उनके चरणों को धो लेना चाहिए, क्योंकि उनके चरणों में सारे तीर्थों का स्पर्श पहले से ही विद्यमान रहता है। इसीलिए संतों को तीर्थंकर कहा जाता है। आचार्य जी ने कहा कि तीर्थ तभी तीर्थ बनता है जब वहां संतों के चरण पड़ जाते हैं, अगर तीर्थों में संत ना जाएं, केवल सामान्य लोग ही जाएं तो वो तीर्थ, तीर्थ नहीं होता। भागवत में गंगाजी की महिमा का वर्णन है, जिसमें गंगाजी कहती हैं मेरे अंदर बडे़-बड़े संत महात्माओं के डुबकी लगाने से लाखों लोगों को पवित्र करने का सामर्थ्य पैदा हो जाता है। इसीलिए आज भी कुंभ में संत-महात्माओं पहले शाही स्नान इसलिए करते हैं, ताकि संतो के नहाने से उस गंगा में लाखों लोगों को पवित्र करने का सामर्थ्य पैदा हो जाए। ये भागवत शास्त्र में लिखा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में वर्णित है कि जिसके घर के दरवाजे पर संतों के चरण नहीं धोये जाते हों और संतों के चरण के धोने से वहां की जमीन ना भीगती हो, द्वार पर संतों का चरण प्रक्षालन नहीं होता है वो घर शमशान के समान है। संत महात्मा और विद्वान पुरूषों का सबसे बड़ा सम्मान विनम्रतापूर्वक उनको प्रमाण करना ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। प्रमाण से बड़ा कोई सम्मान नहीं होता। लेकिन वो प्रणाम बनावटी नहीं यथार्थ हो। नमस्कार पद की न्याय शास्त्र में व्याख्या है कि जिसको हम प्रणाम कर रहे हैं उसके सामने मेरा अपकर्ष और जिसको प्रणाम कर रहे हैं उसका उत्कर्ष। हमारी गतिविधि, क्रिया के द्वारा परिलक्षित हो। उसका नाम नमस्कार है। ये नमस्कार प्रणाम ये अंजली मुद्रा इतनी अद्भुत मुद्रा है, जिसके लिए शास्त्रो में कहा गया है कि ये मुद्रा ऐसी विलक्षण मुद्रा है कि एक क्षण में देवता को प्रसन्न कर देती है, लेकिन वो सच्चे मन से हो। आचार्य पुण्डरीक जी ने कहा कि वास्तविक स्वरूप को लोग समझें, वैदिक विद्वान जब बैठकर वेदध्वनि व पुराण का पारायण करते हैं, भगवान का मंत्रों द्वारा हवन होता है, एक दिव्य संदेश पूरी दुनिया को सनातन का संदेश जाता है। पूरे विश्व में सनातन धर्म एक धर्म ऐसा है जो अपने लिए नहीं जीता, बल्कि सारे विश्व के प्राणी मात्र की कल्याण की कामना करता है। ऐसा विस्तृत व व्यापक धर्म दुनिया में कहीं नहीं है। हम जितनी भी क्रिया करते हैं वा जग के कल्याण के लिए करते हैं। तो वही सांस्कृतिक संध्या में निमाई पाठशाला द्वारा बड़ा ही सुंदर भाव प्रस्तुति किया गया जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया और मौजूद संत साधक भावुक हो गये। आचार्य पुण्डरीक जी के संयोजन व श्रीमहंत डा भरत दास जी की अध्यक्षता में हरे रामा हरे कृष्णा के मनोहारी ध्वनि पर ढोल नगाड़ों के साथ नाचते गाते सौकड़ों भक्तों ने रामकोट की परिक्रमा करते भगवान रामलला के दर्शन किये। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन डा राम गर्ग, मिनी गर्ग ने किया। इस मौके पर आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला के श्रीमहंत मैथली रमण शरण, रिटायर्ड आईपीएस विजयपाल सिंह, आईपीएस एस एन सिंह,जिले के प्रसिद्ध ठेकेदार समाजसेवी आईपी सिंह, एसपी सिंह, कन्नौज के नेता प्रदीप यादव सहित बड़ी संख्या में संत साधक व आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी के शिष्य परिकर मौजूद रहें।
: रामलला के समक्ष शुरू हुई 45 दिवसीय श्री राम राग सेवा
Sat, Jan 27, 2024
पहले दिन मालिनी अवस्थी ने प्रस्तुत किया सोहर, बधावा, मंगलगान
अयोध्या। श्री जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर में अनुष्ठान व रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दर्शन-पूजन और राग-भोग, आरती जारी है। वहीं गणतंत्र दिवस पर राग सेवा भी शुरू हो गई। रामलला के समक्ष शुरू हुई इस 45 दिवसीय श्री राम राग सेवा के तहत पहले दिन लोक कलाकार मालिनी अवस्थी ने रामलला को सोहर, बधावा, मंगलगान समर्पित किया। गर्भगृह के सामने गुडी मंडप में शुरू हुए शास्त्रीय परंपरा के लोक कलाकारों की ओर से राम राग सेवा के तहत हेमा मालिनी, अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, सोनल मानसिंह, वैजयंती माला, सिक्किम गुरचरण, पंडित सजन मिश्रा, जसवीर जस्सी, अरुणा साईंराम, स्वप्न सुंदरराई, राहुल देशपांडे, सुरेश वाडकर, दर्शन झावेरी, उदय भवलकर, जयंत कुमारेश, पूर्ण दास बाबुल, रजनी, गायत्री व देवकी पंडित, बसंती बिष्ट, प्रेरणा श्रीमाली, सुनंदा शर्मा, मीता पंडित, पद्म सुब्रामण्यम समेत देश भर के विभिन्न प्रांतों और कला परंपराओ के 100 से अधिक सुप्रसिद्ध कलाकार रामलला के श्रीचरणों में अपनी राग सेवा अर्पित करेंगे। यह 45 दिवसीय धार्मिक संगीत उत्सव 10 मार्च तक चलेगा। संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली के सहयोग से संचालित इस इस कार्यक्रम के कल्पनाकर और संयोजक ट्रस्ट सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के पुत्र साहित्यकार यतींद्र मिश्र हैं। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि श्री राम राग सेवा की शुरुआत मालिनी अवस्थी के सोहर, बधावा, मंगलगान से हुई है। रोजाना गुडी मंडप में एक कलाकार और उनकी टीम की ओर से प्रस्तुति दी जाएगी।