: हमारी संप्रभुता व संस्कृति की पहचान फिर से वापस आ रही है: शंकराचार्य
Thu, Feb 29, 2024
रामनगरी पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद, किये रामलला व हनुमानजी का दर्शन
गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगदुरू शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ का संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने किया स्वागत
पीएम नरेंद्र मोदी की दृढ़ आस्था और नीतियों व सीएम योगी अथक प्रयास, सार्थकता, दृढ़ निष्ठा कम समय में राममंदिर का निर्माण हुआ और भगवान श्रीरामलला विराजमान हुए
अयोध्या। गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगदुरू शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज बुधवार को प्रयागराज से सीधे रामनगरी अयोध्या पहुंचे। जहां उन्होंने सबसे पहले प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी में मत्था टेका। उसके बाद श्रीरामजन्मभूमि जाकर भव्य मंदिर में विराजमान श्रीरामलला सरकार का दर्शन किया। फिर सायंकाल सरयू मैया की आरती सम्मिलित हुए। वहां मां सरयू का दर्शन-पूजन, अभिषेक व आरती की। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के आश्रम पर मीडिया से मुखातिब होते हुए शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि एक दशक बाद मैं अयोध्या आया हूं। इससे पहले भी कई बार यहां आकर रामलला का दर्शन किया है। लेकिन इस बार दिव्य दरबार में विराजमान श्रीरामलला का दर्शन कर कुछ अलग ही आनंद की अनुभूति हो रही है। हमारी युवा पीढ़ी का सबसे बड़ा सौभाग्य है कि पांच सौ वर्षों के लंबे संघर्षों बाद श्रीरामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अथक प्रयास, सार्थकता, दृढ़ निष्ठा से ही कम समय में राममंदिर का निर्माण हुआ। तो पीएम नरेंद्र मोदी की दृढ़ आस्था और नीतियों के कारण श्रीरामलला विराजमान हुए। श्रीरामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने से पूरी दुनिया में सनातनियों का सम्मान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हमारी संप्रभुता व संस्कृति की पहचान फिर से वापस आ रही है। हम धर्मगुरू भारत को फिर से विश्व गुरू के पद पर प्रतिष्ठित करने में लगे हैं। भारत देश अखंड क बनने जा रहा है। अखंड भारत के 6 देशों में यात्रा कर चुका हूं। जहां के लोगों में भारत के प्रति दिल और दिमाग में निष्ठा आदर विद्यमान है। जैसे अयोध्याधाम, चित्रकूट, प्रयागराज तीर्थ यहां है। वैसे ही तीर्थ अखंड भारत के उन देशों में विराजमान हुआ करते ए थे। धर्मगुरु धार्मिक एवं सांस्कृतिक तौर पर अखंड भारत के लिए कार्य कर रहे हैं। हनुमानगढ़ी में संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजयदास व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगदुरू शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर महंत संजयदास जी महाराज के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव भी मौजूद रहें।
: जैन मंदिर में भगवान पद्मप्रभु का मोक्ष कल्याणक मनाया गया
Thu, Feb 29, 2024
जैन साध्वी ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ कार्यक्रम
अयोध्या। श्री भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगम्बर जैन मंदिर रायगंज में जैनधर्म के पाँचवें तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु का मोक्ष कल्याणक हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया है। जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी के पावन ससंघ सानिध्य में सर्वप्रथम श्रीजी का पंचामृत अभिषेक दूध, दही, घी, सर्वोषधि आदि द्रव्यों से किया गया। सारे विश्व में शांति की कामना को करते हुए भगवान के मस्तक पर शांतिधारा संपन्न की गई। इस अवसर पर भगवान पद्मप्रभु की प्रतिमा का महाभिषेक किया गया एवं निर्वाणकाण्ड पढ़ते हुए भगवान के श्री चरणों में पाँच किलो का निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य श्री विजय कुमार जैन मंत्री अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर विजय कुमार ने बताया कि पूज्य माताजी के ससंघ सानिध्य में कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। माताजी ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि फाल्गुन कृष्णा चतुर्थी के दिन भगवान पद्मप्रभु ने शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर की पावन भूमि से मोहन कूट (मंदिर) से अनेक मुनियों के संघ में निर्वाण को प्राप्त किया एवं पद्मप्रभु भगवान का जन्म कौशाम्बी में करोड़ों वर्ष पूर्व हुआ था। कौशाम्बी तीर्थ भगवान के चार कल्याणकों से पावन तीर्थ है। इस तीर्थ पर विशाल मंदिर बना हुआ है। जैन श्रद्धालू भक्त यहाँ पर प्रतिदिन आते हैं। भगवान को मोक्षकल्याणक सभी के लिए कल्याणकारी हो ऐसा पूज्य माताजी ने अपने प्रचवन में कहा सम्पूर्ण कार्यक्रम जैनमंदिर के पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति जी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ शाम को भगवान की 108 दीपकों से आरती सम्पन्न की गई।
: जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहाँ देवता भी निवास करते हैं: दिनेश
Thu, Feb 29, 2024
श्री लक्षगणपति महायज्ञ में श्रीदुर्गासप्तशती एवं श्रीगणपत्थर्वशीर्ष हो रहा भव्य पाठ
व्यासपीठ का पूजन करते यजमान
अयोध्या। मां सरयू के पावन गोद में हो रहें श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्री राम यज्ञ में ब्राह्मणों द्वारा श्रीदुर्गासप्तशती एवं श्रीगणपत्थर्वशीर्ष पाठ हो रहा है। महायज्ञ हवन, सर्वकल्याण यज्ञशाला में श्रौत यज्ञ, महायज्ञ के ज्ञान मण्डपम् में प्रातः के समय सन्त सम्मेलन, तत्पश्चात श्रीराम कथा, महायज्ञ के लीला मण्डपम् में में श्रीराम लीला व श्रीकृष्ण लीला का अद्भुत मंचन भी हो रहा।यह अनुष्ठान महामण्डलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज के पावन सनिध्य एवं श्रीमज्जद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी राघवाचार्य महाराज के संयोजकत्व में हो रहा।
महायज्ञ के ज्ञान मण्डपम् में सन्त सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने नारी शिक्षा के विकास के विषय पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयुक्त सचिव माता चिदानन्मयी ने अपने सम्बोधन में नारी शिक्षा के विकास को लेकर नारियों को धर्म शास्त्र के अनुसार मासिक धर्म के दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए एवं क्या सावधानी बरतनी चाहिए, को विस्तार पूर्वक ढंग से जागरुक करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि आज के समय लोगों में हो रहे रोगों का मूल कारण स्त्रियों को रजस्वला धर्म का पालन न करना है, क्योंकि स्त्रियां मासिक धर्म के दौरान भी अपने रसोई में स्वयं भोजन पकाकर अपने परिवारजनों को खिला रही हैं, फलस्वरूप रोगों का होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय शिक्षा का अभाव नहीं है किन्तु शिक्षा, किस प्रकार से प्रदान की जाए, उस प्रकिया का अभाव है। श्री प्रखर परोपकार मिशन संस्कृत एकेडमिक के डॉयरेक्टर डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी ने कहा कि पतिव्रता नारी, साक्षात् भगवती दुर्गा का ही स्वरूप है एवं वही परम शक्ति है। उन्होंने महाभारत के एक प्रसंग के माध्यम से बताया कि पतिव्रता नारी की शक्ति का समार्थ्य यह है कि गान्धारी ने अपने पूत्र दुर्योधन को जब अपने नेत्रों से देखा तो दुर्योधन का शरीर वज्र का बन गया। अतः नारी शक्ति को अपने सामर्थ्य को पहचानना होगा एवं उसका प्रयोग करना होगा, तभी नारी शक्ति का विकास सम्भव है। विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक आदरणीय बड़े दिनेश जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहाँ देवता भी निवास करते हैं, क्योंकि नारी इस सृष्टि के सृजन का आधार एवं केन्द्रबिन्दु है। उन्होंने कहा कि वेद के अनुसार समाज की इकाई, परिवार है अतः अपने परिवार को तैयार करना नारी शक्ति के लिए बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके निर्वहन के लिए ही यजुर्वेद में नारी को श्रेष्ठ प्रबंधक की संज्ञा दी गई है। विन्ध्यांचल से आये उमेश महाराज, अयोध्या धाम के आचार्य वेद प्रकाश, स्टेशन मन्दिर के महन्त रामसेवकदास रामायणी, कैलीफोर्निया से आयी डॉ० पूर्वा, बावन मन्दिर के महन्त वैदेही बल्लभ शरण महाराज, ऋषिकेश से अयोध्यादास रामायणी, ब्रह्मचारी आनन्द प्रकाश, डॉ० स्वामी राघवाचार्य महाराज, सुप्रसिद्ध कथा व्यास कोलकाता से आचार्य शिवाकान्त महाराज एवं काशी से स्वामी ओमा ने भी सभा को अपने सम्बोधित किया। महायज्ञ स्थल पर राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, प्रवीन नेमानी, अरुए काजरिया, विकास मित्त, गौरव मित्तल, श्रीमती सुषमा अग्रवाल, श्रीमती आँचल मित्तल, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, अभिषेक गुप्ता, डॉ० जी०सी० पाठक, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, दिनेश मिश्रा, सीताराम बडोनी, अवधेश जी, भानू जी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।