: रामलला को भेंट की एम्बुलेंस
Fri, Apr 5, 2024
एम एस रमैया फाउंडेशन ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को प्रदान की सर्वसुविधायुक्त एंबुलेंस
अयोध्या। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या मे प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। ऐसे में में मंदिर परिसर मे किसी भी समय आवश्यकता पड़ने पर किसी भी श्रद्धालु को यदि स्वास्थ्य सेवा देने के लिए यदि अस्पताल पहुंचा हो तो एम्बुलेंस की जरूरत रहती हैं। वहीं अब रामनवमी नजदीक आते ही एक फाउंडेशन ने रामलला को एम्बुलेंस भेंट किया गया की है। श्रीराम लला के भक्तों को परेशानियों से बचाने के लिए कर्नाटक के एम एस रमैया फाउंडेशन की ओर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को श्री राम लला को सर्वसुविधायुक्त एंबुलेंस प्रदान की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या को विश्व के मानचित्र में अनोखा स्थान दिलाने में जुटे हुए हैं। रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होते ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। सरकार अयोध्या पहुंचने वाले हर एक श्रद्धालुओ के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित रहती है। जिले का स्वास्थ्य महकमा भी प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अलर्ट पर है। फाउंडेशन के एम.आर.पट्टाभिराम और उनकी पत्नी अनिता की ओर से ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि,डा.अनिल मिश्र, स्वामी प्रसन्न तीर्थ, निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने एंबुलेंस स्वीकार की। अनिल मिश्र ने बताया कि श्रीराम लला के भक्तों को आवश्यकता पड़ने पर शीघ्र स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के निमित्त गिफ्ट के रूप में यह एंबुलेंस दी गई है।
प्राण प्रतिष्ठा से ही रामलला पर उपहारों की बौछार हो रही है। सोने चांदी के आभूषण से लेकर अन्न धन तक लोग यथाशक्ति न्यौछावर कर रहे हैं। बड़े-बड़े औद्योगिक घराने के लोगों ने स्वर्ण मालाओं से लेकर हीरे जड़ित मुकुट तक भेंट किया है। बड़े-बड़े कारोबारियों ने रामलला के दर्शन करने पहुंचे भक्तों के लिए भी अपना खजाना खोल दिया था। रामलला के भक्तों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा यहां आने वाले हर श्रद्धाल का ख्याल भी रखा जा रहा है। ताकि किसी तरह की परेशानी न हो। खास तौर से स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अक्सर तैयार रहती। श्रद्धालुओं को सुगम यातायात व्यवस्था भी बनाई गई दर्शन करने के लिए।
: अयोध्या में अंत्येष्टि स्थल पर इलेक्ट्रिक और गैस से संचालित शवदाह की व्यवस्था
Fri, Apr 5, 2024
आदित्य भवन द्धारा सरयू नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए पहल
आदित्य भवन का सजा मुख्य द्वार
समाजसेवी हरिओम राय ने कहा अयोध्या सनातनियों की पवित्र भूमि,विकास को लेकर आदित्य भवन सदैव तत्पर
आदित्य भवन में सेवा भाव के लिए बने कमरें
अयोध्या। पावन सरयू नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए पहल शुरू हो गई है। लंबी प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में अंत्येष्टि स्थल पर इलेक्ट्रिक और गैस से संचालित शवदाह की व्यवस्था की गई है। इसके चलते अब सरयू नदी को काफी हद तक प्रदूषण मुक्त किया जा सकेगा। वहीं यहां अंत्येष्टि के लिए शव लेकर आने वालों को भी तमाम दिक्कतों से छुटकारा मिल जाएगा।
आदित्य भवन की ओर से इसकी व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी है। बताया गया कि काफी लंबे समय से अयोध्या स्थित अंत्येष्टि स्थल पर इलेक्ट्रिक शव दाह की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी के चलते आदित्य भवन द्वारा इसका बीड़ा उठाते हुए गैस और बिजली से चलने वाली अत्याधुनिक मशीन प्रदान की गई है। इसके अलावा उनकी ओर से रितेश मिश्रा को एक एम्बुलेंस भी प्रदान किए जाने की स्वीकृति दी गई है। जो जरूरतमंदों के लिए कार्य करेगी। समाजसेवी हरिओम राय ने बताया कि इलेक्ट्रिक शवदाह शुरू होने से दूरदराज से आने वाले लोगों को लकड़ी और अन्य व्यवस्था के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक शव दाह द्वारा किए जाने वाले अंतिम संस्कार में अंत्येष्टि के सभी नियमों का पालन किया जाएगा।
शवदाह स्थल का निर्माण,जिसे आदित्य भवन ने अयोध्या नगर निगम को समर्पित किया है
: यज्ञोपवीत संस्कार सनातन धर्म में 16 संस्कारों में महत्वपूर्ण: किलाधीश
Fri, Apr 5, 2024
आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किलाधीश महंत जु ने सभी बटुकों के गायत्री मंत्र देकर के वेद अध्ययन के लिए दी अनुमति
यज्ञोपवीत संस्कार का कार्यक्रम श्री लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण के संयोजन में हुआ
अयोध्या। चैत मास के कृष्णपक्ष की पापमोचनी एकादशी को आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला में पीठाधीश्वर महंत मैथिलीरमण शरण महाराज के अध्यक्षता में वैदिक बटुकों को वेद अध्ययन के लिए विधि-विधान से दो दर्जन बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। वैदिक सनातन परंपरा के अनुसार यज्ञोपवीत संस्कार के बाद ही कोई भी व्यक्ति अध्ययन कर सकता है। लक्ष्मण किला में ठाकुर राम जानकी के सामने विद्वान आचार्यों ने मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञोपवीत संस्कार कराया, आचार्य के रूप में लक्ष्मण किला धीश महंत मैथिलीरमण शरण महाराज ने सभी बटुकों के गायत्री मंत्र देकर के वेद अध्ययन के लिए अनुमति प्रदान की। यज्ञोपवीत संस्कार का कार्यक्रम श्री लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण महाराज के संयोजन में कराया गया।
किलाधीश श्री महंत मैथिलीरमण शरण महाराज ने बताया कि यज्ञोपवीत संस्कार भारतीय गुरुकुल परंपरा में यज्ञोपवीत संस्कार को बहुत ज्यादा महत्व दिया गया है यज्ञोपवीत होने के बाद ही बालक गुरुकुल में प्रवेश लेता है और गुरुकुल के दिनचर्या का पालन पठन-पाठन अध्ययन गुरुकुल परंपरा के अनुसार सुरु होता है सनातन धर्म में 16 संस्कारों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य प्रकाश शरण महाराज ने बताया कि जनेऊ धारण के समय बालक के हाथ में एक दंड होता है और वह बगैर सिला एक ही वस्त्र पहनता है, उसके गले में पीले रंग का दुपट्टा होता है। मुंडन के बाद शिखा रखी जाती है। पैर में खड़ाऊ होती है। मेखला, कोपीन, दंड : कमर में बांधने योग्य नाड़े जैसे सूत्र को मेखला कहते हैं। मेखला को मुंज और करधनी भी कहते हैं। कपड़े की सिली हुई सूत की डोरी, कलावे के लम्बे टुकड़े से मेखला बनती है। कोपीन लगभग 4 इंच चौड़ी डेढ़ फुट लम्बी लंगोटी होती है। इसे मेखला के साथ टांक कर भी रखा जा सकता है। दंड रूप में लाठी या ब्रह्म दंड जैसा रोल भी रखा जा सकता है। यज्ञोपवीत को पीले रंग में रंगकर वैदिक मंत्रो के साथ धारण कराया जाता है आचार्य मंत्र देते हैं इन्हीं नियमों का पालन करते हुए आज लगभग दो दर्जन बटुकों का आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला में शास्त्रोक्त विधि विधान से गुरुकुल परंपरा के अनुसार वैदिक सदाशिव तिवारी ने संपन्न कराया। इस मौके पर प्रिया प्रीतम शरण राजेश झा सुशील नारायण झा आचार्य प्रियांश आचार्य संजय शर्मा आदि उपस्थित रहे।