: राम के सद्गुणों का आदर्श प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का उद्देश्य: राम प्रसाद
Fri, May 17, 2024
हनुमान बाग में बह रही रामकथा की रसधार,महोत्सव का विश्राम शनिवार को
महंत जगदीश दास के अध्यक्षता में हो रहा महोत्सव, चहुंओर उत्सव का माहौल
अयोध्या। राम के सद्गुणों का उच्चतम आदर्श समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना रामकथा का प्रमुख उद्देश्य है। एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, भ्राता एवं आदर्श राजा एक वचन, एक पत्नी, एक बाण जैसे व्रतों का निष्ठापूर्वक पालन करने वाले राम का चरित्र उकेरकर अहिंसा, दया, अध्ययन, सुस्वभाव, इंद्रिय दमन, मनोनिग्रह जैसे षट्गुणों से युक्त आदर्श चरित्र की स्थापना रामकथा का मुख्य प्रयोजन है। उक्त बातें राम सनेही संप्रदाय से बड़ा रामद्वारा सूरसागर जोधपुर (राजस्थान) के गादीपति संत डॉ. श्री राम प्रसाद जी महाराज ने हनुमान बाग मंदिर में आयोजित राम कथा के सातवें दिवस में कही। उन्होंने कहा कि राम परिवार के वैचारिक, भाषिक एवं क्रियात्मक पराक्रम का वर्णन करना ही वाल्मीकि रामायण का प्रधान हेतु रहा है। स्वामीजी ने कहा कि रामचरित्र के महासागर में डूबे, राम जल से आकंठ भीगे, करुणा-प्रेम, भक्ति जैसे सकारात्मक रसों से आप्लावित वाल्मीकि तमसा नदी के तट पर स्नान की इच्छा से आए। उनके हृदय में रामभक्ति का समुद्र लहरा रहा था। सारी सृष्टि ही मानो राममय हो गई थी। राम के दैविक गुण, मानवीय वृत्तियाँ, दया, उदारता, अहिंसा, अक्रोध, परदुःख, कातरता अभी भी उनके मन-मस्तिष्क पर छाई हुई थी कि शांत रस का सामना वीभत्स एवं हिंसा वृत्ति से हुआ। शीतल भूमि पर एकाएक दग्धता का अनुभव हुआ, जब सामने ही एक बहेलिए ने हिंसक भावों को प्रकट करते हुए निरपराध, मूक, प्रेमालाप करते हुये क्रौंच पक्षी को स्वार्थवश बाण से आहत कर दिया। अभी-अभी तो नारद से राम बाण, राम के शर संधान की कथा सुनी थी कि राम ने शौर्य, पराक्रम, दयालुता, उदारता आदि भावों का संरक्षण करते हुए दुष्टों के नाश एवं सज्जनों के परित्राण हेतु शस्त्र उठाए थे। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज कर रहें है।कथा में श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानगढ़ी के संत मामा दास, लवकुश दास सहित बड़ी संख्या में रामनगरी के संत धर्माचार्यो ने शिरकत कर अपने अपने विचारों से श्रीरामकथा में भगवान राम के चरित्र का गुणगान किया। आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन हनुमान बाग के सुनील दास व रोहित शास्त्री ने किया। कथा में सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: श्री जानकी महल ट्रस्ट में श्रीराम की चिरसंगिनी का मना भव्य प्राकट्योत्सव
Fri, May 17, 2024
माता जानकी का वैदिक मंत्रोच्चारण संग पंचामृत एवं सुगंधित औषधियों से हुआ अभिषेक-पूजन
अयोध्या। आस्था सच्ची हो, तो पत्थर भी पिघल सकता है। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्री जानकी महल ट्रस्ट में मां जानकी का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया।जानकी महल किशोरी जी का महल है यहा पर माता सीता जी का बेटी के रुप सेवा सत्कार पूजा होती है। सीता जी व भगवान राम जी को दुल्हा सरकार मान अष्टयाम सेवा होती है। गुरुवार को जानकी जन्मोत्सव के परिप्रेक्ष्य में जब रामनगरी श्रीराम की चिरसंगिनी को भक्ति में डूब रही। प्राकट्योत्सव पर सर्वप्रथम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान माता जानकी का सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण संग पंचामृत एवं सुगंधित औषधियों से अभिषेक-पूजन हुआ। तदुपरांत उन्हें नूतन वस्त्र धारण कराया गया। दूसरी बेला में 12 बजे घंटे, घड़यालों और शंख की करतलध्वनि बीच मां जानकी का प्राकट्य हुआ और भव्य आरती उतारी गई। अंत में मां जानकी के प्राकट्योत्सव का प्रसाद वितरण किया गया। माता के जन्मोत्सव में सम्मिलित होकर भक्तगणों ने अपना जीवन धन्य बनाया। श्री जानकी महल ट्रस्ट के ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी महल में वैशाख शुक्ल नवमी तिथि पर मां जानकी का प्राकट्योत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। जिसे हम सब जानकी नवमी के नाम से भी जानते हैं। जानकी नवमी पर सुबह से लेकर देररात्रि तक उत्सव का सिलसिला चलता रहा। रामनगरी के कलाकारों ने अपने गायन-वादन से उत्सव की महफिल को सजाया। उन्होंने कहा कि हमारे यहां का मुख्य उत्सव जानकी नवमी, राम नवमी व राम विवाहोत्सव है।उन्होंने कहा कि किशोरी जी के छ्ठोत्सव पर 56 भोग लगेगा। इस अवसर पर पूरा महल उत्सव से पुलकित रहा। भक्तजनों ने जानकी नवमी पर मां सीता का दर्शन कर अपना जीवन कृतार्थ किया।
: सात दिवसीय पुत्रेष्टि यज्ञ का हुआ समापन
Fri, May 17, 2024
12 वर्षों से भव्य मंदिर निर्माण की कामना से राम महायज्ञ होता रहा, भव्य मंदिर में रामलला की स्थापना के बाद अब रामराज्य की कामना से यहां राम महायज्ञ किया गया: बिंदुगाद्याचार्य
बस्ती, अयोध्या। रामनगरी से 20 किलोमीटर यह यज्ञ उसी भूमि पर संपादित हुआ, जहां युगों पूर्व श्रीराम जैसे श्रेष्ठतम पुत्र के लिए राजा पर दशरथ जी ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था। सात दिवसीय यज्ञ में नित्य सवा क्विंटल हवन सामग्री से आहुतियां डाल रहे यज्ञ के संरक्षक एवं मखधाम सहित रामकोट स्थित दशरथ राज महल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने ये बताया कि तब भी श्रीराम इष्ट थे और आज भी श्रीराम इष्ट हैं। तब जन पुत्र के रूप में महाराज दशरथ ने उनकी कामना की थी, आज हम राजा के रूप में उन्हें चाहते हैं उन्होंने युगों पूर्व जिस रामराज्य का आदर्श प्रस्तुत किया, वह पुनः फलीभूत होना 140 करोड़ भारतीयों के हित में है। दशरथमहल पीठाधीश्वर ने कहा, इसके लिए जन-जन को रामराज्य के मूल्यों और आदशों से अनुप्राणित होना होगा। इस त्रेतायुगीन यज्ञ भूमि पर बिंदुगाद्याचार्य जी के ही संयोजन में गत 12 वर्षों से भव्य मंदिर निर्माण की कामना से राम महायज्ञ होता रहा। भव्य मंदिर में रामलला की स्थापना के बाद अब रामराज्य की कामना से यहां राम महायज्ञ किया गया।