: राजगोपाल मंदिर में शुरु हुआ रामभक्तों की प्रसाद सेवा
Fri, May 31, 2024
मां सीता राम रसोई फाउंडेशन द्धारा चलाया जा रहा अनवरत प्रसाद सेवा भंडारा
जिसके हृदय में मंगलमय भगवान की स्मृति होती है, उसके जीवन में हर दिन उत्सव ही है: डा सर्वेश्वर दास
अयोध्या। राम ही भारत का धर्म हैं। धर्म की मूर्ति भी राम हैं। महर्षि वाल्मीकि कहते हैं- रामोविग्रहवान धर्मः। राम में ही धर्म है, राम में ही रस है। राम को बार-बार जप लिया, तो आप धर्म से परे नहीं जाएंगे। आप में वैराग्य रहेगा, मर्यादाएं रहेंगी, त्याग रहेगा। आप किसी का अहित नहीं करेंगे। राम धर्म ही हैं। जिसके हृदय में मंगलमय भगवान की स्मृति होती है, उसके जीवन में हर दिन उत्सव ही होता है। बाहर और भीतर की संपदा उसके साथ होती है। उक्त बातें राजगोपाल मंदिर के अधिकारी डा सर्वेश्वर दास शरद जी की है। उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही मंदिर में विभिन्न प्रकार के आयामों से रामभक्तों की सेवा की जा रही है। रामभक्तों के लिए इस बार मा सीता राम रसोई फाउंडेशन द्धारा भंडारे की व्यवस्था की गई है जो अनवरत चार माह चलेगा। जिसमें भक्तों के लिए रोटी, सब्जी, दाल व चावल के साथ मीठा भी भंडारे में परोसा जायेगा। प्रतिदिन करीब 40 हजार भक्तों की भोजन सेवा की जायेगी। यह सेवा चार माह के बाद आगे भी किया जा सकता है। आज भंडारे के शुभारंभ में मणिराम छावनी के महंत कमलनयन दास,जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बावन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत वैदेही बल्लभ शरण, हनुमत सदन पीठाधीश्वर महंत अवधकिशोर शरण, एमबीदास, रामनन्दन दास आदि लोग मौजूद रहे। आये हुए अतिथियों का स्वागत श्री राज गोपाल मंदिर के महंत सीता राम शरण ने किया। भंडारे में रामभक्तों को प्रसाद ग्रहण कराते हुए राजगोपाल मंदिर के अधिकारी डा सर्वेश्वर दास शरद जी ने कहा कि जिसने गुरु और भगवान के वचनों को अपने हृदय में धारण किया है, वह चाहे कैसी भी स्थिति में हो, आनंद में रहता है। श्रीराम जैसा दयालु कोई नहीं। उन्होंने दया कर सभी को अपनी छत्रछाया में लिया। उन्होंने सभी को आगे बढ़कर नेतृत्व करने का अधिकार दिया। व्यवस्था की देखरेख में राजगोपाल मंदिर के शिष्य परिकर लगे हुए है।
: श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का हुआ विश्राम
Wed, May 29, 2024
श्रीधाम वृंदावन के स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा की रसमयी वर्षा से संत साधकों ने लगाया गोता
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में चल रहें श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का समापन आज समारोह पूर्वक किया गया। महोत्सव के समापन सत्र पर व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा करते हुए आचार्य कुटी श्रीधाम वृंदावन के स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि गिरिराज भगवान का पूजन करके इंद्र का मान मर्दन किया भगवान ने। भगवान अपने भक्तो का सब कुछ सहन कर सकते है पर अपने भक्तो का अभिमान सहन नही कर सकते। देवों के राजा को अभिमान हो गया की हम सबसे बड़े देव है सब मेरी ही पूजा करे ब्रजबाशी कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को इंद्र का पूजन करते है। ब्रजबाशियों से भगवान ने कहा आज से इंद्रयज्ञ नही हम लोग अपने गोवर्धन का पूजन करे। मानो प्रभु चाहते की प्रकृति का पूजन होना चाहिए इस लिए इसलिए सभी ने गोवर्धन का पूजन किया। आगे कथा में स्वामी जी ने रास लीला का दिव्य वर्णन जिसमे महारास में एक लाख गोपियों के बीच में अकेले गोबिंद ने रास किया। जिसको काम विजय लीला भी कहते है और अपने मामा कंस का वध कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन किया था। यही वजह है कि इस तिथि को कंस वध के तौर पर भी जाना जाता है। कृष्ण जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मामा कंस का वध भी है। रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन लीलाओं से भरा हुआ है। उनके जन्म से लेकर अंतिम वक्त तक सभी कुछ उनकी लीला ही नजर आती है। कृष्ण जी का जन्म भी विकट परिस्थितियों में हुआ था जिसकी वजह दुष्ट मामा कंस ही था। एक भविष्यवाणी की वजह से राजा कंस अपने ही भांजे श्रीकृष्ण को मारना चाहता था, इसके लिए उसने कई प्रयास भी किए लेकिन आखिर में उसका अंत भगवान श्रीकृष्ण के हाथों से ही हुआ। गोबिंद का माता रुक्मणि जी के साथ गोविंद का विवाह संपन्न हुआ। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज कर रहें व देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें। कथा में रामनगरी के विशिष्ट संतों का समागम नित्य हो रहा। कथा श्रवण करने आए सभी संतो महंतों का अभिनन्दन स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज के भक्तों ने स्वागत किया। कथा में कमलेश सुषमा बसेड़िया, नितिन आरती बसेड़िया, सनत, सनातन बसेड़िया, कटारे परिवार, दीक्षित परिवार, शर्मा परिवार उपाध्याय परिवार, श्रोती परिवार, रेडियेंट परिवार व मारुतिनंदन परिवार विशेष रूप से मौजूद रहें।
: बिना गुरु कृपा व संतो के सन्निधि के भक्ती मार्ग की प्राप्ती संभव नहीं है: रामानुजाचार्य
Wed, May 29, 2024
अशर्फी भवन के माधव भवन में हो रही श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। अशर्फी भवन के माधव भवन में दौसा राजस्थान के भक्तों द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में व्यासपीठ पर विराजमान जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कथा का विस्तार करते हुए कहा 5 वर्षीय अबोध बालक ध्रुव की तरह अविरल भक्ति जब साधक के मन में व्याप्त हो जाती है तब वह साधक भगवान को प्राप्त करता है। पापी अजामिल की कथा का श्रवण कराते हुए जगद्गुरु जी ने कहा जन्म से ही पाप कर्म में लीन अजामिल प्रभु भक्ति में लीन संत जनों की कृपा पाकर के भगवान के धाम को प्राप्त करता है। बिना गुरु कृपा व संतो के सन्निधि के भक्ती मार्ग की प्राप्ती संभव नहीं है। भी वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य जन्म को प्राप्त करके प्रभु के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करके सभी साधक भक्तजन सभी सुखों को प्राप्त कर सकते हैं। हिरण्यकश्यप में घोर तप किया ब्रह्मा जी से वरदान भी प्राप्त किया लेकिन साधक भक्तों के मन में यदि अभिमान व्याप्त हो जाता है तो वह साधक भक्त भी भक्ति मार्ग से अलग हो जाता है और पाप कर्म में लीन हो जाता है हिरण्यकशिपु के पुत्र बालक प्रहलाद मां के गर्भ में ही देवर्षि नारद से नवधा भक्ति का श्रवण करने के प्रभाव से अनेकों यातनाएं पिता से पाकर भी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ते हैं। प्रह्लाद जी की दृढ़ भक्ति को देख कर भगवान भक्त प्रहलाद को बचाने नरसिंह रूप धारण करके दुष्ट हिरण्यकशिपु का वध करते हैं। सुखदेव जी महाराज से कथा का श्रवण करके राजेंद्र परीक्षित जी का विश्वास और भी दृढ़ हो गया सभी भक्तजन कथा श्रवण कर आनंदित हो रहे हैं।