: शिद्दत से शिरोधार्य हुए रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य
Tue, Mar 4, 2025
शिद्दत से शिरोधार्य हुए रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्यमंदिर आंदोलन में उनकी गणना अग्रणी पंक्ति के याेद्धाओं में हाेती थी, रामजन्मभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्याैछावर कर दिया: विश्वेश प्रपन्नाचार्यअयाेध्या। श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के महानायक, शलाका पुरुष एवं ऐतिहासिक पीठ सुग्रीवकिला पूर्वाचार्य श्रीमज्जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य महाराज काे संताें ने छठवीं पुण्यतिथि पर शिद्दत से याद किया। पुण्यतिथि पर संत-महंताें द्वारा मंदिर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया गया। संताें ने साकेतवासी महंत के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस माैके पर सुग्रीवकिला के वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव विद्वान संत रहे। विद्वता में उन्हें महारथ हासिल था। उनकी गणना विद्वान संताें में हाेती थी। वह विलक्षण प्रतिभा के धनी संत हाेने के साथ-साथ गाै और संत सेवी रहे। उन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। गुरूदेव का सपना था, श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का। जाे श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े रहे। उस आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मंदिर आंदोलन में उनकी गणना अग्रणी पंक्ति के याेद्धाओं में हाेती थी। रामजन्मभूमि के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्याैछावर कर दिया। उनका सपना पूरा हुआ। श्रीरामजन्मभूमि पर दिव्य, भव्य, नूतन मंदिर बनकर तैयार हो गया, जिसमें श्रीरामलला सरकार विराजमान हुए। भव्य राममंदिर निर्माण ही गुरूदेव काे सच्ची श्रद्धांजलि है। इस अवसर पर काफी संख्या में संत-महंत, भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण किया। सुग्रीवकिला के उत्तराधिकारी स्वामी अनंत पद्मनाभाचार्य महाराज द्वारा आए हुए संत-महंत तथा भक्तगणों का स्वागत-सत्कार किया गया।
: महापौर के साथ बड़ा भक्तमाल मंदिर में संतों ने की बैठक
Tue, Mar 4, 2025
महापौर के साथ बड़ा भक्तमाल मंदिर में संतों ने की बैठकमंदिर की सम्पत्ति भगवान के नाम है तो फिर टैक्स कैसा: महंत अवधेश दाससंतों ने उठाया बिजली बिल अधिक आने का मसला, हाउस टैक्स को लेकर संतों में रोषसीवर जल्द से जल्द सफाई के दिए निर्देशअयोध्या। महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने बड़ा भक्तमाल मंदिर परिसर में आयोजित संतों की बैठक में उनकी समस्याएं सुनी और समाधान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिरों का गृह कार्य एवं जलकर माफ कर रखा कर दिया है। इस कारण मंदिर परिसर में चलने वाली अन्य गतिविधियों से संबंधित टैक्स लिया जाएगा। उन्होंने संतों को बताया कि मंदिरों से प्रतीकात्मक धनराशि ही ली जाएगी। मंदिर के जगमोहन, गौशाला, धर्मशाला, पाठशाला, यज्ञशाला, पाकशाला, परिक्रमा पथ, महंत का आवासीय परिसर आदि का टैक्स निर्धारित नहीं किया जाएगा। केवल गेस्ट हाउस, बारात घर अथवा दुकानों से संबंधित टैक्स लिया जाएगा।संतों ने बिजली बिल अधिक आने का मसला भी उठाया। इस पर महापौर ने मुख्य अभियंता विद्युत से दूरभाष पर वार्ता की। उन्होंने संतों की समस्याओं के समाधान का निर्देश दिया। बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास ने कहा कि मंदिर की सम्पत्ति भगवान के नाम है उसका बैक भी वैल्यू नही लगाता है तो फिर टैक्स कैसा। हाउस टैक्स को लेकर संतों में रोष रहा। इस मौके पर माघ मेले में हनुमानगढ़ी, अमावा मंदिर, रामकचहरी, रामनिवास मंदिर आदि इलाके में सीवर की सफाई का भी मुद्दा सामने आया, जिसे जल्द से जल्द समाधान का वादा महापौर ने किया। इस मौके पर महंत अवधेश दास, संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण,महंत शशिकांत दास, महंत राम लखन दास, नागा रामलखन दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,शिवम श्रीवास्तव सहित कई संत मौजूद थे।
: जन्मकल्याणक महाेत्सव में निकली विशाल शोभायात्रा
Tue, Mar 4, 2025
जन्मकल्याणक महाेत्सव में निकली विशाल शोभायात्राजन्मोत्सव की रस्म स्वर्णजड़ित संदूक में भगवान ऋषभदेव की छोटी प्रतिमा प्राप्त किए जाने से संपादित होती हैअयोध्या वैष्णवों के साथ जैन धर्म की भी आस्था के केंद्र है:पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामीअयोध्या ।दिगंबर जैन मंदिर की शीर्ष पीठ रायगंज स्थित भगवान ऋषभदेव मंदिर में साेमवार काे धूमधाम से जन्मकल्याणक महाेत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण से गाजे-बाजे, घाेड़े और रथ संग विशाल ऐतिहासिक शाेभायात्रा निकाली गई। जैसे सूर्य के उदित होने की आहट से तारे टिमटिमाते लगते हैं, उसी तरह महासूर्य रूपी भगवान के जन्म लेने की आहट से इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है और पद-प्रतिष्ठा से लेकर अपना सिंहासन बचाने को आतुर इंद्र उसी समय से भगवान की खुशामद में लग जाते हैं।भगवान ऋषभदेव के जन्मोत्सव के साथ यह पटकथा रायगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर में मोहक नाट्य के रूप में प्रस्तुत हुई। न केवल स्वर्ग की आभा-प्रभा और वैभव का भान कराते मंच, बल्कि कलाकारों का परिधान, उनकी भाव-भंगिमा और सधा अभिनय कुछ पल के लिए सृष्टि के आरंभ के उसी दौर में खींच ले गई, जब भगवान ऋषभदेव ने गर्भ धारण किया होगा। आस्था का गहन संचार करती मोहक प्रस्तुति से जीवंत गर्भ कल्याणक के संस्कार का शीघ्र समापन होता है और जन्म कल्याणक के साथ जैन मंदिर का विशाल प्रांगण आस्था के नए सूर्य से जगमग होता है। जन्मोत्सव की रस्म स्वर्णजड़ित संदूक में भगवान ऋषभदेव की छोटी प्रतिमा प्राप्त किए जाने से संपादित होती है। इसी के साथ मंदिर का विशाल प्रांगण मंगल गीतों, भांति-भांति के वाद्यों, पुष्प वर्षा और बधाई के आदान-प्रदान के प्रवाह से आच्छादित हो उठता है। कुछ पलों की तैयारी के बाद मंदिर से नर्तकों-नाट्यकर्मियों, वादकों, गायकों, श्रमण-श्रमणियों से लेकर श्रद्धालुओं की अनेक मंडलियों से युक्त भव्य शोभायात्रा प्रस्थान करती है। जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी ज्ञानमती माता की प्रेरणा और प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माता तथा दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष एवं दर्जनों मंदिरों की श्रृंखला से युक्त पीठ के अधिपति रवींद्रकीर्ति स्वामी के मार्गदर्शन में निकली शोभायात्रा आस्था का संचार करती हुई सरयू तट तक पहुंची और वहां से वापस अयोध्या की धरा तथा यहां की आबोहवा शिरोधार्य करती हुई वापस जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री अमरचंद जैन, मंत्री विजयकुमार जैन, कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन, जैन दर्शन के मर्मज्ञ डा. जीवनप्रकाश जैन, मनोज जैन, पंकज जैन, लल्ला जैन आदि के रूप में प्रबंधन से जुड़े प्रमुख घटकों सहित उत्तरप्रदेश, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र तक के हजारों श्रद्धालु शामिल रहे।छह मार्च तक प्रस्तावित पंचकल्याणक महोत्सव 30 कालों और पराजगत में हुए सभी 24 तीर्थंकरों की 720 प्रतिमाओं सहित भगवान ऋषभदेव के 101 पुत्रों तथा कर्म के अनुसार विभिन्न लोकों में गति प्राप्त करते प्रसंगों को अभिव्यंजित करतीं 727 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा के क्रम में संयोजित है।शोभायात्रा में पूरे उत्साह और प्रसन्नता से शामिल हुए जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि अयोध्या वैष्णवों के साथ जैन धर्म की भी आस्था के केंद्र में है और हम सभी को मिलकर अयोध्या को शिरोधार्य करना है। उन्होंने कहा, यह अनुभूति बहुत गौरवान्वित करती है कि श्रीराम प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव के वंशज थे और कई अन्य तीर्थंकर श्रीराम की तरह इक्ष्वाकु वंश में ही पैदा हुए। उन्होंने याद दिलाया कि प्रथम तीर्थंकर के अलावा अयोध्या दूसरे तीर्थंकर अजितनाथ, चौथे तीर्थंकर अभिनंदननाथ, पांचवें तीर्थंकर सुमतिनाथ तथा चौदहवें तीर्थंकर अनंतनाथ की भी जन्मभूमि है और यहां इनके मंदिर भी तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने संरक्षित कर रखे हैं।