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: जिसका मन काबू में नहीं उसकी भक्ति किसी काम की नही: साक्षी गोपाल

बमबम यादव

Fri, Feb 24, 2023

हनुमान बाग मंदिर में सौकड़ों वैदिक आचार्यों का भंडारा शनिवार को

अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में इन दिनों व्यासपीठ से श्रीमद् वाल्मीकि रामायण कथा की अमृत वर्षा साक्षी गोपाल दास कर रहें हैं। यह महोत्सव हनुमान बाग के भजनानंदी संत महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा के पंचम दिवस साक्षी गोपाल दास ने कहा कि आप उन लोगों को मिलते हैं जो दीन हीन हो कर अपना जीवन व्यतीत करते हैं उनको आप मिलते हैं जो अपने पद का, अपने धन का, अपने सौंदर्य के मद में डूब जाता है उसको आप नहीं मिलते हो जब तक हमारे ह्रदय इन उपाधियों से छुटकारा नहीं पा लेता तब तक हमारा ह्रदय शुद्ध नहीं होगा और जब तक ह्रदय शुद्ध नहीं होगा तब तक हमे भगवान मिलने वाले नहीं है। श्रील रूप गोस्वामी जी कहते हैं कि जब व्यक्ति अपने हृदय को शुद्ध कर लेगा विनम्रता से तो कही जाकर शुद्ध ह्रदय में भक्ति पैदा होगी

जिस प्रकार सत्संग सुनने के लिए हम अपनी चप्पल जूते बाहर उतार कर आते हैं उसी प्रकार अपने जीवन में भक्ति पाने के लिए हमें अपने सारे पद प्रतिष्ठ सभी उपाधियों को जीवन से उतार देना चाहिए। जब तक हम भगवान की प्रसन्नता के लिए कार्य नहीं करेंगे तब तक हमे भगवान मिलने वाले नहीं।  रूप गोस्वामी जी कहते हैं कि भगवान को प्राप्त करने का एकमात्र मूल्य है अपने हृदय को भगवान को पाने की उत्कंठा मैं लगाना हमें अपने हृदय में भगवान को पाने की उत्कंठा होनी चाहिए। जब तक उत्कंठा नहीं होगी तब तक भगवान मिलने वाले नहीं है।  ज्ञान के बलबूते पर हम भगवान को नहीं पा नही सकते।  जो दशरथ जी थे वह ज्ञान स्वरूप थे और कौशल्या माताजी भक्ति स्वरूप थीं। भगवान जब भी कभी किसी को मिलेंगे तो वह केवल भक्ति के माध्यम से ही मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान को भक्ति बहुत प्रिय है भक्ति और भगवान में कोई अंतर नहीं है। जिस जीव आत्मा के जीवन में भक्ति आ गई फिर भगवान बिना बुलाए अपने आप आ जाएंगे।  जिसने अपने मन को अपने वश में कर लिया उसका जीव का मन उस जीवात्मा का सबसे बड़ा मित्र है और जिसका मन काबू में नहीं है उस जीव का मन उस जीव आत्मा का सबसे बड़ा शत्रु है। हमने किसी भी तरह से समझा-बुझाकर अपने मन को भगवान की भक्ति में लगाना है अगर हम आपना मन  नहीं लगा सके तो हमारा जीवन व्यर्थ है।  मेरे अलावा तुमरहे मन को समझने वाला और कोई नहीं है। इसलिए तुम अपने मन मुझ में लगाओ अगर तूने अपना मन मुझ में लगा दिया तो मैं तुम्हारे मन को अपने मस्तक पर धारण कर लूंगा और जब मैं नाचुगा तब तुम्हरा मन भी नाचे गा।कार्यक्रम की देखरेख सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री कर रहें है। इस मौके पर राजरानी, चरणदास, ममता अग्रवाल,विनोद अग्रवाल, गीता शर्मा ,राजीव मोहन ने दीप प्रज्वलित कर और प्रभु जी को माल्यार्पण करके आशीर्वाद प्राप्त किया।

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