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: सनातन सभ्यता और प्रकृति की आध्यात्मिकता को समर्पित हनुमान बाग

बमबम यादव

Thu, Sep 1, 2022

हनुमान बाग मंदिर गौसेवा, भजनानंदी सन्तसेवा, ब्राह्मण सेवा एवं आश्रम संचालन सम्पूर्ण विश्व में सनातन ध्वजा को लहरा रहा

महान्त जगदीशदास महाराज इस परम्परा में एक अद्भुत प्रतिभा के परिचायक सिद्ध हुए

अयोध्या। हनुमान बाग रामनगरी के प्रतिष्ठित मंदिरों में शुमार है। वर्तमान परम्परावाहक म. श्रीजगदीशदासजी महाराज उक्त विरासत को समेटे हुए गौसेवा, भजनानंदी सन्तसेवा, ब्राह्मण सेवा एवं आश्रम संचालन से सम्पूर्ण विश्व में सनातन ध्वजा लहरा रहे हैं। भजनानन्दी सन्तो में महान्त श्री जयरामदासजी महाराज भगवान श्रीरामनाम का स्मरण करते हुए श्रीहनुमत् आराधना में अपने जीवन को समर्पित करते हुए महान्त श्रीरामगोपालदास जी महाराज को उत्तराधिकारी बनाते हुए इस साधना परम्परा को आगे बढ़ाया। ईश्वरीय शक्ति ही इनकी परमनिधि एवं श्रीराम एवं श्रीहनुमान का भजन ही इनकी आराधना एवं रामनाम परमनिधि को संजोते हुए समाज के हित के लिए बिखेरते रहे। भजनानन्दी सन्त श्री महान्त श्रीरामगोपालदास जी महाराज के परमकृपापात्र महान्त जगदीशदासजी महाराज इस परम्परा में एक अद्भुत प्रतिभा के परिचायक सिद्ध हुए। कहा जाता है कि प्रतिभा किसी का मोहताज नहीं होता सुगन्ध बिखरने वाला पुष्प सहज ही सनातन सभ्यता और प्रकृति की आध्यात्मिकता को स्वयंमेव समर्पित हो जाता है। परमार्थ परायण जीवन के निमित्त महाराज श्री ने भव्य कथामण्डप पूजागृह आवास गौशाला का निर्माण श्रीहनुमानबाग सेवा संस्थान के तत्त्वावधान में कराया। श्रीमहाराज जी के विनम्र स्वभाव एवं लोक कल्याणभद्र भावना को दृष्टिगत रखते हुए भारत ही नहीं वरन् विदेशों के हनुमत भक्त भी महाराज श्री के अनुयायी बनकर दरिद्रनारायण और अयोध्याधाम की सेवा करने लगे। महाराज श्री ने अयोध्या में संस्कृत के पठन-पाठन की महती आवश्यकता समझकर भोजन प्रसाद सहित छात्रावास एवं शिक्षण संस्थान का निर्माण कराया। जहाँ सैकड़ों संस्कृतनिष्ठ वेदपाठी अध्ययन कर सनातन समाज की सेवा में समर्पित होंगे ऐसा विश्वास है। अभ्यागत भक्तों में जरूरतमन्दों के लिए महाराज ने आधुनिक आवास का निर्माण कराया गया है। जिसमें भोजन प्रसाद स्नान ध्यान के दिव्य प्रबन्ध हैं।सेवा साधना उच्चस्तरीय मानव कल्याण प्रद भावना ही महाराज जी का संकल्प है।
बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार। की भावना से ओतप्रोत अष्टयाम सेवा निरंतर हनुमान बाग में हो रही है। यहां भक्तों, संतो विद्यार्थियों सभी के लिए अलग-अलग भोजन हुआ रहने की व्यवस्था है। श्रीमहंत जगदीश दास महाराज सभी संतों की दंडवत प्रणाम करते हुए कहते है सभी महापुरुषों की कृपा बनी रहें। महाराज जी के अनुसार दूसरे को सुखी बनाये रखने में ही अपना सुख है। साहस एवं सकल्प के बल पर महाराज श्रीनिरन्तर आध्यात्मिक अवदान प्राप्त कर श्रेष्ठता की सूची में सन्तश्रेष्ठ के रूप में सुविख्यात हैं। मुख्य परम्पराओं में कार्तिक चतुर्दशी को मनाया जाता है। जिसमें हनुमानजन्म महोत्सव श्रीअन्नकूट महोत्सव श्रीराम विवाह महोत्सव एवं पूर्वाचार्यों से सम्बन्धित भण्डारा आदि है। प्रतिदिन हजारो अभ्यागतों को भोजनप्रसाद से सेवा कर पुण्य लाभ किया जाता है। श्रीहनुमानजी श्रीराम श्री शिव परिवार के लिए वस्त्र आदि आते हैं। मन्दिर के दिव्य प्रतिमा की विशेषता यह है कि मात्र दर्शन से ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मन को बहुत शान्ति प्राप्त होती है। मंदिर के व्यवस्था देखरेख में पुजारी योगेश दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री सहित पूरा हनुमान बाग लगा रहता है।

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