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: यज्ञ अनुष्ठान, भगवत चर्चा वैदिक सनातन धर्म के विस्तार का मूल आधार: वल्लभाचार्य

बमबम यादव

Thu, Oct 13, 2022

अद्वितीय 108 कुंडीय श्रीराममंत्र महायज्ञ व विशाल संत सम्मेलन का हुआ भव्य समापन

800 कुंटल हवन सामग्री से 9 दिनों में 1 करोड़ 30 लाख डाली गई आहुतियां

अयोध्या। रामनगरी के श्रीरामहर्षण मैथिल सख्यपीठ धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट चारूशिला मंदिर जानकीघाट में श्रीमद जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज संयोजन में अद्वितीय 108 कुंडीय श्रीराममंत्र महायज्ञ का भव्य समापन हुआ। 5 अक्टूबर से ऐतिहासिक कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुए इस महायज्ञ में 501 योग्य विद्वानों द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण पारायण एवं 13 करोड़ षड़ाक्षर श्री राम मंत्र का जप निरंतर चलता रहा। साथ ही 108 कुंडों में वैदिक विद्वानों और यज्ञ के यजमानों द्वारा निरंतर हवन हुआ। इस नौ दिवसीय श्री राम मंत्र महायज्ञ में 800 कुंटल हवन सामग्री का प्रयोग किया गया। 9 दिनों में कुल 1 करोड़ 30 लाख आहुतियां डाली गयी। साथ ही साथ वृंदावन धाम से पधारे जगद्गुरू द्वाराचार्य मलूकपीठाधीश्वर डॉ. राजेंद्रदेवाचार्य के श्रीमुख से श्रीरामकथा की अमृत वर्षा हुई। वृंदावन की प्रसिद्ध चैतन्य महाप्रभु लीला हाे रही है जिसका आनंद भक्तों ने लिया और सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए 11, 12 और 13 अक्टूबर को विशाल संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें अयोध्या ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से महान विद्वानों ने अपने व्याख्यानओं द्वारा देश विदेश से आए हुए भक्तों श्रद्धालुओं को आनंदित कराया और सनातन धर्म को कैसे बचाया जाए और विश्व में इसकी ख्याति और बढ़ाई जाए इस पर भी लोगों को दिशा निर्देश दिए।
जगतगुरु रामानन्दाचार्य वल्लभाचार्य महाराज ने श्री राम हर्षण भगवान के रजत जयंती श्री राम मंत्र महायज्ञ में पधारे सभी जगतगुरु, शंकराचार्य, महामंडलेश्वर और विद्वानों का स्वागत सत्कार किया और कहा कि यज्ञ अनुष्ठान और भगवत चर्चा ही वैदिक सनातन धर्म के विस्तार का मूल आधार है। सभी को निरंतर देश विदेश में भ्रमण करते हुए। विविध आयोजनों को करते रहना चाहिए जिससे आम जनमानस का लगाव सनातन धर्म के तरफ बढ़ेगा जिससे निश्चित ही सनातन धर्म का विस्तार होगा। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म आदि धर्म है बाकी सब पंथ हैं क्योंकि सनातन धर्म ही मूल है और अन्य धर्मों का प्रादुर्भाव सनातन धर्म के बाद हुआ है इसलिए आज धर्म की रक्षा के लिए हम सभी संतो को आगे आना होगा और इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है इसी क्रम में हम लोगों को आगे बढ़ कर के देश विदेश में सनातन धर्म के जड़ को और मजबूत करना होगा जिससे भारत पुनः अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त कर सके इसके लिए हमें निरंतर प्रचार-प्रसार के साथ अध्ययन भी करते रहना चाहिए।

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