Wednesday 4th of November 2026

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सुचना

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अयोध्या की भाजपा इकाई में अंदरूनी जंग तेज : उठने लगा असंतोष का धुंआ

अयोध्या की भाजपा इकाई में अंदरूनी जंग तेज

उठने लगा असंतोष का धुंआ

अयोध्या। भारतीय जनता पार्टी में नेताओं के बीच अंदरूनी जंग तेज हो गई है। दो उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। पहले जिस तरह मिल्कीपुर के पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा ने पूर्व सांसद लल्लू सिंह पर सआदतगंज मतदान केंद्र के आठ में से पांच बूथों पर उनके हारने का दवा एक निजी एजेंसी के पॉडकास्ट से वार्ता में किया, उसे समान्य नहीं माना जा सकता। यह अलग तथ्य की पूर्व सांसद ने एक मंजे हुए नेता की तरह अपने चेलों को आगे कर पूर्व विधायक के दावों को तथ्यों के साथ प्रस्तुतिकरण कर झुठलाया। पूर्व विधायक उसके बाद उन तथ्यों को झूठलाने नहीं आये।यह भी बता दे की पूर्व सांसद का आवास सआदतगंज ही है। पुश्तैनी गांव रायपुर है जो शहर से चंद किलोमीटर दूर है। पूर्व विधायक में उसे सैनी गांव में भी हारने का ही नहीं रानी बाजार मंडल में लोकसभा चुनाव में पराजित होने का दावा किया है। पूर्व सांसद पर इस तरह आरोप लगाने फिर लगता है कि भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं है।

दूसरा रुदौली के विधायक रामचंद्र यादव का है। रुदौली एसडीएम विकासधर दुबे को प्रोटोकॉल के उल्लंघन में शिकायत कर अपने उन विरोधियों को एक मौका बैठे बिठाये उपलब्ध करा दिया जिनपर पार्टी के कुछ ताकतवर नेताओं की शह हासिल होने का आरोप लगाते हैं। सोशल मीडिया पर जिस तरह एसडीएम के पक्ष में माहौल बनाते हुए दिख रहे हैं, उससे लगता है कि पार्टी का ही कोई ना कोई उनके पीछे होगा। विधायक से जनता की नाराजगी स्वाभाविक है। पर सवाल यह भी है अगर इतने आलोकप्रिय होते तो लगातार तीसरी बार विधायक रुदौली विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित ना होते। यह सही है कि पार्टी में वह सत्ता का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरे हैं जो पार्टी के उन नेताओं को रास नहीं आ रहा है जिनका पार्टी के प्रति समर्पण निर्विवाद है या यह कह लीजिए की भाजपा की विचारधारा से कभी अलग नहीं हुए। इसीलिए पार्टी के कुछ नेता दल बदलुओं पर पार्टी में आकर सत्ता की मलाई खाने का आरोप लगाते रहे हैं। निशान उनका विधायक रामचंद्र ही होते हैं लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि रुदौली ही नहीं बीकापुर, मिल्कीपुर, अयोध्या व गोसाईगंज गंज के विधायक भी खांटी न होकर आयातित भाजपाई हैं। वे भी तो दूसरे दलों से आए हैं जिनको पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने टिकट देकर विधानसभा पहुंचाया। संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे पदाधिकारी भी दूसरे दलों में रह चुके हैं। पूर्व सांसद लल्लू सिंह जरूर इसके अपवाद हैं।

बात फिर से हम एसडीएम रुदौली के प्रोटोकॉल उल्लंघन की करते हैं। विधायक ने जिन तीन घटनाओं का विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत में उल्लेख किया है वे एक माह पहले अगस्त की है। सात दिन में एसडीएम को अपना स्पष्टीकरण शासन को भेजना है। शासन से जनप्रतिनिधि के लिए जारी शिष्टाचार की गाइडलाइन एसडीएम ही नहीं कलेक्टर, कमिश्नर व शासन के अधिकारियों तक के लिए है। पीसीएस अधिकारी होने की वजह से वह इससे अनजान नहीं होंगे। फिलहाल एसडीएम के स्पष्टीकरण से विधायक के लगाए गए आरोपी की सच्चाई का पता चलेगा।

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