Monday 2nd of November 2026

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दिगंबर अखाड़ा में हुतात्मा कारसेवक स्मृति सभा का भव्य आयोजन, चंपत राय बोले- 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान

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कारसेवकों के बलिदान को किया नमन, संतों ने सुनाई 1990 के गोलीकांड की द : दिगंबर अखाड़ा में हुतात्मा कारसेवक स्मृति सभा का भव्य आयोजन, चंपत राय बोले- 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान

कारसेवकों के बलिदान को किया नमन, संतों ने सुनाई 1990 के गोलीकांड की दास्तां

दिगंबर अखाड़ा में हुतात्मा कारसेवक स्मृति सभा का भव्य आयोजन, चंपत राय बोले- 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान का परिणाम है भव्य राम मंदिर

अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को शहीद हुए हुतात्मा कारसेवकों की स्मृति में रविवार को शहीद मार्ग स्थित दिगंबर अखाड़ा परिसर में भव्य श्रद्धांजलि सभा एवं संत समागम आयोजित किया गया। हुतात्मा कारसेवक स्मारक समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में संत-महंतों, जनप्रतिनिधियों और रामभक्तों ने कारसेवकों के बलिदान को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में वक्ताओं ने 1990 के गोलीकांड की घटनाओं को याद करते हुए राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष और कारसेवकों के त्याग को विस्तार से बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ हुतात्मा कारसेवकों के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ। संत-महंतों और जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धांजलि सभा का विधिवत शुभारंभ किया। विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और वेदपाठ कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिगंबर अखाड़ा के श्रीमहंत सुरेश दास महाराज ने की। संयोजन उनके उत्तराधिकारी महंत राम लखन दास महाराज तथा संचालन वाबन मंदिर के श्रीमहंत वैदेही वल्लभ शरण महाराज ने किया।

सभा में मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय और राष्ट्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज शामिल हुए। चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन 500 वर्षों के संघर्ष और असंख्य रामभक्तों के त्याग का परिणाम है। वर्ष 1990 में निहत्थे और शांतिपूर्ण कारसेवकों पर गोलियां चलाई गईं। 30 अक्टूबर और दो नवंबर को अपने प्राणों की आहुति देने वाले कारसेवकों का बलिदान आज भव्य राम मंदिर के रूप में साकार हुआ है। उनके त्याग और समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

महंत राम लखन दास महाराज ने कहा कि संतों के आह्वान पर गांव-गांव से लाखों रामभक्त अयोध्या पहुंचे थे। उस समय बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और गोलीकांड की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हनुमानगढ़ी और शहीद मार्ग पर हुई घटनाएं राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय हैं। कारसेवकों का बलिदान आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा देने वाला साबित हुआ।

महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि आज अयोध्या वैश्विक सांस्कृतिक पहचान बना रही है। इसके पीछे हुतात्मा कारसेवकों का त्याग और संघर्ष भी महत्वपूर्ण आधार है। नगर निगम उनकी स्मृतियों को स्थायी रूप से संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास महाराज ने कहा कि वर्ष 1990 में अयोध्या के आश्रमों ने घायल कारसेवकों को आश्रय और सहायता दी थी। उन बलिदानियों का योगदान राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली के श्रीमहंत डॉ. भरत दास महाराज ने कहा कि हुतात्मा कारसेवकों ने रामभक्ति के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। दो नवंबर का दिन पीड़ा और प्रेरणा दोनों का प्रतीक है। उनकी शौर्यगाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है। संत समाज के वक्ताओं ने कहा कि कारसेवकों पर चली गोलियां केवल व्यक्तियों पर हमला नहीं थीं, बल्कि राम मंदिर आंदोलन के इतिहास की एक मार्मिक घटना थीं।

अध्यक्षीय संबोधन में श्रीमहंत सुरेश दास महाराज ने कहा कि दिगंबर अखाड़ा और शहीद मार्ग इस ऐतिहासिक संघर्ष के साक्षी रहे हैं। कारसेवकों की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए यहां स्थायी स्मारक बनाया जाएगा और प्रत्येक वर्ष श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती रहेगी।

कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान, जिला पंचायत सदस्य आलोक सिंह रोहित, चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह टिल्लू तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महानगर संघचालक प्रो. विक्रम प्रसाद पांडेय सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

संत समाज की ओर से दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के विंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य, महंत कमलनयन दास, रसिक पीठाधीश्वर श्रीमहंत जन्मेजय शरण, बड़ा भक्तमाल के श्रीमहंत अवधेश दास, महंत गौरीशंकर दास, महंत दिनेश दास, महंत धर्मदास, त्रिवेणीराम, अंतरराष्ट्रीय कथावाचक बाल भारत महाराज सहित अयोध्या के अनेक संत-महंत उपस्थित रहे।

अंत में उपस्थित संतों, जनप्रतिनिधियों और रामभक्तों ने हुतात्मा कारसेवकों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। सभा में कारसेवकों के बलिदान को स्मरण करते हुए उनकी स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

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