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: बिना डरे बिना भाई के समाज को एक करने का काम करते रहना चाहिए- संत परीक्षा साहेब

बमबम यादव

Sun, Oct 13, 2024

कबीर धाम मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय सत्संग समारोह का हुआ समापन

अयोध्या।कबीर धर्म मंदिर जियनपुर के संस्थापक सद्गुरु रामसूरत साहेब की पुण्य स्मृति में तीन दिवसीय सत्संग समारोह का हुआ समापन समापन सत्र की अध्यक्षता रामसूरत साहेब के उत्तराधिकारी एवं कबीर की परंपरा के प्रख्यात उपदेशक संत परीक्षा साहेब ने किया और बताया कि अगर मध्यकाल में सदगुरु कबीर का प्रादुर्भाव ना हुआ होता तो वर्तमान भारत की स्थिति और खराब हो जाती शायद हम और टुकड़ों में बट जाते क्योंकि जब हम बृहद भारत की कल्पना करते हैं तब हमें मालूम होना चाहिए, कि हमारे भारत के कितने भूभाग हमसे अलग हो गए और इसका मूल कारण था जातियों में बंटना। जब हमारा भारत धर्म संप्रदाय जाति के घोर जाल में फंसा हुआ था उसे समय सदगुरु कबीर ने इन सभी मिथकों तोड़ने के लिए संघर्ष किया और देश को बचाया और हम ऐसे संघर्षशील सदगुरु कबीर के अनुयाई हैं हमको हमेशा उनके पद चिन्हों पर चलते हुए बिना डरे बिना भाई के समाज को एक करने का काम करते रहना चाहिए।
संत कबीर की जन्मस्थली से पधारे संत प्रेम साहेब ने बताया कि हमारा कर्तव्य है कि जो हमारे इष्ट है सद्गुरु कबीर साहेब उन्होंने जाति और कट्टर पंथ की आलोचना करते हुए पूरा जीवन संघर्ष किया आप कल्पना करिए की मध्यकाल में कबीर का जन्म काशी मे हुआ और काशी में रहकर के उन्होंने सब मार्ग का रास्ता नहीं छोड़ा रूढ़ियों पर कुठारा घात करते रहे जो लोग कबीर को मुस्लिम कहते हैं वह कबीर को समझ ही नहीं पाए, सगुण उपासक राम के अनुयाई भी सदगुरु कबीर साहब के विचारों को सुनते हैं और अमल करते। उन्होंने कहा कि हम ऐसे सदगुरु कबीर के अनुयाई हैं कि हमें जाति से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने का कार्य करते रहना है। अगर सदगुरु कबीर मध्य काल में ना आए होते तो शायद भारत की स्थिति भी अन्य देशों जैसी होती। उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम कबीर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं और समय की मांग है की सदगुरु कबीर को सभी को जानना होगा। विवेक साहेब ने बताया कि जब तक अंदर की आंख नहीं खोलेंगे तब तक मंजिल प्राप्त नहीं हो सकती और साधु का कार्य है लोगों के सोए हुए आंख को खोलना निरर्थक विचार को खत्म करना और जब तक विवेक का जागरण नहीं होगा तब तक निरर्थक विचार आते रहेंगे।
कार्यक्रम के संयोजक धर्म प्रकाश साहेब ने बताया कि सतगुरु रामसूरत साहेब अयोध्या में मठ की स्थापना सेवा के लिए किया था वैसे ही सेवा परीक्षा साहेब के निर्देशन में चल रही है लेकिन वर्तमान में कुछ लोग मंदिर की संपत्ति जो अब करोड़ों करोड़ों की हो गई है हड़प कर बेचना चाहते हैं विवाद पैदा किए हैं, मैंने तो संकल्प लिया है की रामसूरत साहेब ने जिस उद्देश्य के लिए मठ की स्थापना की थी अपने जीवन भर उसी रास्ते पर चलेंगे और मठ की सुरक्षा करेंगे आप लोगों को भी मठ के बारे में चिंता करने की आवश्यकता है। अंत में उन्होंने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।निष्ठा साहेब बाराबंकी, संजीवन साहेब कटिहार बिहार, रतन साहेब इटावा उत्तर प्रदेश,कसार साहेब रामपुर दिल्ली, विचार साहेब नवापारा छत्तीसगढ़, अचल साहेब बड़ौदा गुजरात, मुक्तिशरण साहेब धमतरी छत्तीसगढ़, घनश्याम साहब मंदौर छत्तीसगढ़, सत्यपाल साहेब राजस्थान, रहस्य साहेब कोटा राजस्थान ने भी अपने विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन सदगुरु कबीर के पूजन से हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ बिहार गुजरात राजस्थान मध्य प्रदेश सहित पूरे भारत के लोग उपस्थित हो करके सदगुरु कबीर के वचनों को सुने और पालन करने का संकल्प लिया।अचिंत दास, दुःख समन दास, सरल दास, विवेक शरण दास, विनय शरण दास ने अतिथियों का स्वागत सत्कार किया।

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