Wednesday 4th of November 2026

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अनादिकाल से चल रही,झूलन की परंपरा : महंत राम नरेश शरण : समारोह पूर्वक लाल साहब दरबार में झूलनोत्सव का हुआ समापन, कलाकारों व संतों महंतों का महंत जी ने किया अभिनन्दन

अनादिकाल से चल रही,झूलन की परंपरा : महंत राम नरेश शरण

समारोह पूर्वक लाल साहब दरबार में झूलनोत्सव का हुआ समापन, कलाकारों व संतों महंतों का महंत जी ने किया अभिनन्दन

अयोध्या। प्रतिष्ठित पीठ लाल साहब दरबार के पीठाधीश्वर महंत राम नरेश शरण महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में अनादिकाल से झूलन की परंपरा चली आ रही है। उस परंपरा का हम सब आज भी निर्वाहन कर रहे हैं। हम संत, महंत अपने-अपने मंदिरों में युगल सरकार को झूलन पर पधराकर झूला झुलाते हैं। साथ ही साथ अनेकानेक झूलन के पद्य गाकर भाव के अंतरंग में आनंदित भी होते हैं। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम प्रभु श्रीराम व मां जानकी के लिए मणिपर्वत पर झूले का आयोजन किया गया था। जिस दिन झूले का आयोजन रहा। तब से प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल तृतीया को मणिपर्वत झूला मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन हम संत-महंत अपने मंदिरों के देव विग्रहों को पालकी पर बिठाकर गाजे-बाजे, हाथी घोड़ा संग मणिपर्वत ले जाते हैं और झूला झुलाते है। हरियाली तीज के दिन मणिपर्वत पर झूला पड़ने के साथ ही ऐतिहासिक झूला मेले का शुभारंभ हो जाता है। इसी दिन अयोध्या के मठ- मंदिरों में भी झूला पड़ जाता है। जो श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन तक अपने चरमोत्कर्ष पर रहता है। मंदिरों में सायंकाल झूलन झांकी सजती है, जिसका सिलसिला देररात्रि तक चलता है। अनेकानेक नामचीन कलाकार अपने गायन-वादन से झूलनोत्सव में चार-चांद लगाते हैं। संत, महंत अपने-अपने मंदिरों युगल सरकार को झूला झुलाते हैं। साथ ही कलाकारों को नेग- न्यौछावर भी भेंट करते हैं। झूलन महोत्सव का कार्यक्रम पूरे 15 दिनों तक अपने चरम पर रहता है। महंत राम नरेश शरण जी ने कहा कि झूलन में विराजमान युगल सरकार का दर्शन करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि झूलन का समापन रक्षाबंधन के दिन समारोह पूर्वक किया गया। जिसमें रामनगरी के संतों महंतो व कलाकारों का अभिनन्दन किया गया।

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