Thursday 5th of November 2026

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गंगा दशहरा पर की गई मां सरयू की भव्य आरती : आंजनेय सेवा संस्थान तत्वावधान में सजा घटा,हुई 1100 बत्ती की महाआरती

गंगा दशहरा पर की गई मां सरयू की भव्य आरती

आंजनेय सेवा संस्थान तत्वावधान में सजा घटा,हुई 1100 बत्ती की महाआरती

कहा, गंगा नदी को केवल एक नदी नहीं, बल्कि मां का दर्जा दिया गया है

अयोध्या। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मां सरयू की महाआरती और पूजन हुआ। रामनगरी अयोध्या के सिद्धपीठ श्री राम कचेहरी चारों धाम मंदिर के पीठाधीश्वर मां सरयू की नित्य आरती करने वाली संस्था आंजनेय सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास महाराज के संयोजन में मां सरयू का घाट फूलों से सजाया गया।

 आंजनेय सेवा संस्थान के तत्वावधान में पूरा घटा दीपों से सजाकर मां सरयू की 1100 बत्ती की महाआरती की गई। आंजनेय सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास महाराज ने बताया कि गंगा दशहरा पर हर वर्ष ये भव्य आयोजन होता है। उन्होंने कहा कि उत्सव पर यह आयोजन और भी भव्य हो जाता है।महंत जी कहते है कि हिन्दू धर्म में तिथि का विशेष महत्‍व है। प्रत्येक महीने में एक पूर्णिमा तिथि होती है और साल में 12 पूर्णिमा तिथियां होती हैं। प्रत्येक पूर्णिमा तिथि अपने आप में अलग महत्व रखती है और हर पूर्णिमा तिथि में अलग ढंग से पूजन करने का विधान है। आज के आयोजन में भक्तों की भारी भीड़ रही।

तो वहीं पत्थर मंदिर के महंत मनीष दास ने गंगा दशहरा के पावन अवसर पर कहा कि गंगा दशहरा का पर्व हर साल ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। तिथि अनुसार इस बार भी रामनगरी में गंगा दशहरा का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा, सरयू आदि पौराणिक नदियों में स्नान कर दान पुण्य किया। इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। माना जाता है कि इसी दिन भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं ताकि राजा सगर के पुत्रों को मुक्ति मिल सके। यह पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में गंगा नदी को केवल एक नदी नहीं, बल्कि मां का दर्जा दिया गया है। माना जाता है कि गंगा का जल पवित्र, पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला होता है। इसी कारण गंगा दशहरा का पर्व अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। गंगा दशहरा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो माँ गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। इस दिन गंगा स्नान, दान, जप और पूजा करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति व आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवेश होता है। महंत ने बताया कि गंगा दशहरा के दिन दान पुण्य करने की विशेष परंपरा है। इस दिन जल, अन्न, फल, वस्त्र और पूजा सामग्री का दान शुभ माना जाता है। इसके अलावा घी, तेल, नमक, शक्कर तथा स्वर्ण आदि का दान भी बहुत पुण्यदायी माना गया है। श्रद्धा और सामथ्र्य के अनुसार किया गया दान जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है। इस मौके पर श्रीरामबल्भाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत जनार्दन दास, महंत गिरीश दास, महंत छवि राम दास, महंत मनीष दास, प्रथम महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, पार्षद अनुज दास सहित बड़ी संख्या में साधु संत व आमजन मौजूद रहें।

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