Wednesday 4th of November 2026

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नर्मदेश्वर के रुद्राभिषेक से हुआ पुण्यतिथि महोत्सव का शुभारंभ : गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत

नर्मदेश्वर के रुद्राभिषेक से हुआ पुण्यतिथि महोत्सव का शुभारंभ

गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत डॉ. ममता शास्त्री

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी राष्ट्रीय संत, प्रखर वक्ता, मानस एवं कर्मकांड के मर्मज्ञ साकेतवासी महंत ब्रह्मचारी श्री विश्वनाथ दास शास्त्री जी महाराज (पूर्व सांसद) की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दो दिवसीय पुण्यतिथि महोत्सव का शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में शुभारंभ हुआ। दर्शन भवन, जानकी घाट स्थित जगद्गुरु स्वामी रामानंद जी के मंदिर परिसर में आयोजित महोत्सव के पहले दिन नर्मदेश्वर भगवान शिव के भव्य रुद्राभिषेक से धार्मिक अनुष्ठानों का आरंभ हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे पुष्पों से आकर्षक ढंग से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर नजर आया।प्रातः सात बजे से दस बजे तक श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से नर्मदेश्वर भगवान का रुद्राभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार और भगवान शिव के जयघोष से मंदिर परिसर गूंजता रहा। इसके बाद अपराह्न दो बजे से सुंदरकांड का सामूहिक पाठ हुआ। पाठ के उपरांत श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।

    सायंकाल मंदिर के मुख्य द्वार पर अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराया गया।महोत्सव की विशेषता यह रही कि शुक्रवार से ही ठाकुरजी को झूलन महोत्सव में विराजमान कराया गया। अयोध्या धाम के प्रसिद्ध रसिक संतों की ओर से विशेष झूलन की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। सावन के पदों और भक्ति संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच ठाकुरजी के झूलन दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इसके साथ ही सांस्कृतिक संध्या एवं शास्त्रीय संगीत का भी आयोजन हुआ।शनिवार को होगी पुण्यतिथि श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होगा उसके पूर्व सद्गुरुदेव भगवान के प्रतिष्ठित विग्रह का अभिषेक, विशेष पूजन-अर्चन एवं आरती होगी। इसके पश्चात अयोध्या धाम के प्रतिष्ठित संतों द्वारा जेवनार गायन किया जाएगा। दोपहर में संत-भंडारा आयोजित होगा, जिसमें अयोध्या के संत-महंतों सहित श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।महंत डॉ. ममता शास्त्री ने बताया कि महंत ब्रह्मचारी श्री विश्वनाथ दास शास्त्री जी महाराज ने धर्म, अध्यात्म और समाज के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके जीवन का प्रत्येक पक्ष रामभक्ति, भारतीय संस्कृति और संत परंपरा के प्रति समर्पित रहा। उनकी पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर है।

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