Wednesday 4th of November 2026

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सुचना

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हनुमत जयंती पर रामसेवकपुरम में भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ : प्रसिद्ध कथाव्यास इंद्रेश महाराज के प्रवचनों से गूंजा अयोध्या, श्रद्धालु हुए भावविभोर

हनुमत जयंती पर रामसेवकपुरम में भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ

प्रसिद्ध कथाव्यास इंद्रेश महाराज के प्रवचनों से गूंजा अयोध्या, श्रद्धालु हुए भावविभोर

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के रामसेवकपुरम में हनुमत जयंती के पावन अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का गुरुवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। सत्संग समिति गोरखपुर के तत्वावधान में आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश महाराज ने हनुमत चरित्र की कथा से की। वृंदावन से पधारे महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

कथा के दौरान इंद्रेश महाराज ने हनुमान जी के प्राकट्य का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि महाराज दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त चरु का एक अंश एक चील द्वारा माता अंजनी के आंचल में पहुंचा, जिसके परिणामस्वरूप भगवान शिव की कृपा से हनुमान जी का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि इसी कारण भगवान श्रीराम हनुमान जी को अपने भ्राता भरत के समान प्रेम करते हैं। “तुम मम प्रिय भरत सम भाई” का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जहां-जहां भरत जी उपस्थित नहीं रहे, वहां हनुमान जी ने उसी समर्पण भाव से सेवा की।

महाराज ने कहा कि यदि किसी जीव पर हनुमान जी की कृपा हो जाए तो उसे प्रभु श्रीराम का सान्निध्य अवश्य प्राप्त होता है। उन्होंने सुग्रीव प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि हनुमान जी ही वह सेतु बने, जिन्होंने सुग्रीव को प्रभु श्रीराम से मिलवाया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि “राघव को पाना है तो हनुमान को मनाना होगा।”

कथा में हनुमान जी की विनम्रता का भी विशेष उल्लेख किया गया। महाराज ने कहा कि हनुमान जी ने कभी स्वयं को भगवान नहीं कहा, बल्कि संतों ने उन्हें गुरु के रूप में स्वीकार किया है। “जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं” का भाव समझाते हुए उन्होंने कहा कि हनुमान जी से श्रेष्ठ गुरु कोई नहीं हो सकता।

इस अवसर पर हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास जी महाराज भी कथा स्थल पर पहुंचे, जहां सत्संग समिति गोरखपुर द्वारा उनका विधिवत पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। कथा के अंत में भागवत माहात्म्य का भी वर्णन किया गया और इंद्रेश महाराज ने भजनों के माध्यम से भक्तों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम के समापन पर समिति की ओर से मक्खन गोयल एवं शकुंतला गोयल ने आरती कर श्रद्धालुओं के साथ कथा का विश्राम किया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में भक्ति की गूंज सुनाई देती रही।

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