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मां सरयू भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र की प्रत्यक्ष साक्षी:मलूकपीठाधीश : सरयू जयंती महोत्सव के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला

मां सरयू भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र की प्रत्यक्ष साक्षी:मलूकपीठाधीश्वर

सरयू जयंती महोत्सव के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला

अयोध्या। रामनगरी के राम की पैड़ी स्थित सहस्त्रधारा घाट पर आयोजित पांच दिवसीय सरयू जयंती महोत्सव के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीराम कथा के दौरान जगद्गुरु द्वाराचार्य एवं मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने मां सरयू की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि वशिष्ठ जी के नेत्रों से प्रकट हुई मां सरयू की महिमा का जितना गुणगान किया जाए, उतना कम है।उन्होंने कहा कि मां सरयू भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र की प्रत्यक्ष साक्षी हैं। आज भी जो श्रद्धालु पूर्ण आस्था और समर्पण भाव से मां सरयू की शरण में आता है, उसे उनकी कृपा और महिमा का साक्षात अनुभव होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मां सरयू के प्रति श्रद्धा, सेवा और संरक्षण का भाव बनाए रखने का आह्वान भी किया।

आंजनेय सेवा संस्थान विकास समिति की ओर से आयोजित महोत्सव में समिति के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास महाराज ने पधारे संत-महंतों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत व सम्मान किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उपस्थित रहे।

संध्या बेला में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने महोत्सव को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। भजन, गीत-संगीत और भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग की संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों पर पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने देर रात तक भक्ति रस में डूबकर कार्यक्रमों का आनंद लिया। इस अवसर पर महंत गौरीशंकर दास, महंत जनार्दन दास, अर्जुनद्वाराचार्य जगतगुरु कृपालु रामभूषण दास, महंत मनीष दास, वशिष्ठ पीठाधीश्वर, महंत राघवेश दास सहित सैकड़ों लोगों नई कथा श्रवण की मां सरयू की आरती उतारी।

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