: राम जन्म के गवाह दशरथ राज महल बड़ा स्थान की जीवंत है विरासत
Thu, Mar 31, 2022
त्रेता में भगवान राम ने राजा दशरथ के जिस महल में जन्म लिया था, उस विरासत की नुमाइंदगी आज भी कर रहा चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी का राजमहल
बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य के सानिध्य में पूरा महल उत्सव के आनंद में लगाता है गोता
यहां चारों महारानियों संग विराजते हैं श्रीराम सहित चारों भैया
अयोध्या। त्रेता में भगवान राम ने राजा दशरथ के जिस महल में जन्म लिया था, उस विरासत की नुमाइंदगी आज भी होती है। यह जिक्र है, चुनिंदा पीठों में शुमार चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ास्थान का। यूं तो इस पीठ की प्राचीनता अनादि है पर सन् 1704 ई. में इसके जीर्णोद्धार का श्रेय पहुंचे हुए पूज्य संत स्वामी रामप्रसादाचार्य को जाता है। उस समय यह स्थान वीरान पड़ा था पर श्रुतियों के आधार पर लोग इस स्थल को दशरथमहल के नाम से जानते थे। स्वामी रामप्रसादाचार्य ने इस स्थल पर धूनी तो रमाई पर निर्माण के नाम पर घास-फूस की कुछ झोपड़ियां ही बनवाईं। उनकी मान्यता थी कि साधु को महल में रहने की जरूरत नहीं है, उसे तो सिर छुपाने के लिए नाम मात्र की छत चाहिए। हालांकि उनके शिष्य एवं दशरथमहल के दूसरे पीठाधिपति स्वामी रघुनाथप्रसादाचार्य ने दशरथमहल को विरासत के अनुरूप आकार देने का प्रयास किया। महल की तरह भगवान धनुर्धारी का भव्य मंदिर बनवाया और करीब 25 बीघा के परिसर में संत निवास, अतिथि गृह, यज्ञशाला, उद्यान आदि का निर्माण कराया। दशरथमहल का स्वरूप बाद के कुछ और पीठाधिपतियों के प्रयास से और भव्य होता गया। वर्तमान पीठाधिपति बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य पीठ से पारंपरिक तौर पर जुड़े उन स्थलों की ओर ध्यान दिलाते हैं, जिससे यह साबित होता है कि यह स्थल त्रेता से ही दशरथमहल के रूप में प्रवाहमान है। त्रेता में राजा दशरथ के जिस मखौड़ा धाम पर पुत्रेष्टि यज्ञ का जिक्र मिलता है, वहां रामजानकी मंदिर के रूप में दशरथमहल की संपदा अभी भी पूरी जीवंतता से विद्यमान है। तो महल छोड़कर भरत जिस नंदीग्राम में तपस्या करने गए, वहां भी दशरथमहल से संबद्ध मंदिर विद्यमान है। मान्यता है कि विवाह के बाद मां सीता साथ में अपनी ईष्ट मां महागौरी को लेकर आईं और उन्हें महल के ईशानकोण पर प्रतिष्ठित किया गया, यह स्थान छोटी देवकाली के रूप में जाना जाता है और छोटी देवकाली आज भी दशरथमहल के स्वामित्व में है। देवेंद्रप्रसादाचार्य के अनुसार आज जिस स्थल को रामजन्मभूमि माना जाता है, वह दशरथ जी के महल का प्रसूति घर था और यहीं रानी कौशल्या ने प्रभु राम को जन्म दिया था। मंदिर की उपासना परंपरा से भी दशरथ राजमहल की विरासत प्रगाढ़ होती हैं। यहां भगवान की उपासना बाल एवं तरुण रूप में होती है। सामान्य तौर पर प्रत्येक मंदिर में भगवान को स्नान कराने और पूजन के बाद भोग लगाया जाता है पर यहां विराजमान भगवान को बालक रूप में मानकर जागरण के साथ ही उन्हें मेवा-मिश्री का भोग लगाया जाता है। यहां भगवान का धनुषधारी नामकरण भी दशरथमहल की विरासत को पुख्ता करता है, इस कथानक के साथ कि दशरथमहल से विश्वामित्र जिन राम को लेकर गए थे, वे धनुर्धारी थे।
मान्यता है कि त्रेता के दशरथ महल के सिद्ध संत बाबा श्री रामप्रसादाचार्य जी महाराज ने यहां पुनः मंदिर की स्थापना की और वर्तमान स्वरूप प्रदान किया। यह स्थान श्री वैष्णव परंपरा की प्रसिद्ध पीठ एवं बिंदुगादी की सर्वोच्च पीठ है। इसे बड़ा स्थान या बड़ी जगह भी कहा जाता है। यहां के संस्थापक सिद्ध संत बाबा श्रीरामप्रसादाचार्य जी महाराज करीब 300 वर्ष पूर्व अवतरित हुए थे।
बाबा श्री रामप्रसादाचार्य भक्त रूपा श्रीजानकी के अनन्य भक्त थे। अयोध्या के सीता कुंड क्षेत्र में तपस्या के दौरान एक दिन भूलवश बाबा तिलक लगाना भूल गए। जब वह पूजा में बैठ गए तो उनका अपूर्ण तिलक देखकर भक्त स्वरूपा किशोरी जी ने अपने पैर के अंगूठे से उनका तिलक लगा दिया।
बिंदु मिटने की जगह प्रकाशित होता गया
संतों ने कहा कि यह तिलक बिंदु हमारी परंपरा के अनुरूप नहीं है। अतः आप इसे मिटा दें. बाबा ने कहा कि यह किशोरी जी का प्रसाद है तो वे इसे मिटा नहीं सकते। अगर आप चाहें तो मिटा सकते हैं. बाबा के तिलक को संतों ने मिटाने का प्रयास किया, तभी बिंदु मिटने की बजाय प्रकाशित होता गया। इस चमत्कार को देखकर किशोरी जी की कृपा मानते हुए सभी संतों ने महाराज जी से क्षमा याचना की। इस घटना से बाबा की प्रसिद्धि पूरे भारत के समाज में सिद्ध संत की हो गई। इससे हजारों लाखों की संख्या में भक्त स्थान से जुड़े और पूरे भारत में भक्तों ने यहां से राम मंत्र प्राप्त किया। बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य ने बताया कि दशरथ महल में श्रीराम जन्मोत्सव का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर में अन्य उत्सव जैसे श्रीजानकी जयंती, सीता राम विवाह, सावन झूला आदि भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी महाराज ने बताया कि अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान में आने के बाद भक्तों को परम शांति का अनुभव होता है। यह स्थान मानव ही नहीं, बल्कि देवताओं के लिए भी बहुत ही आनंद देने वाला है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां का मुख्य उत्सव भगवान राम का जन्मोत्सव है। जन्मोत्सव पर मंदिर में विविध कार्यक्रम होता है। आज बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज व बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी महाराज ने हनुमानगढ़ी जाकर हनुमानजी महाराज का दर्शन पूजन किया। इस मौके पर धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के कृपापात्र शिष्य संकट मोचन सेना के कार्य वाहक अध्यक्ष पुजारी हेमंत दास ने बिंदुगाद्याचार्य जी व महंत कृपालु रामभूषण दास जी का अभिनन्दन किया।
दशरथ राजमहल बड़ा स्थान का मुख्य द्धार
: महंत कौशलकिशोर दास ने लगाई जानमाल के रक्षा की गुहार
Thu, Mar 31, 2022
अयोध्या। रामनगरी के नरहन मंदिर के महंत कौशलकिशोर दास चेला बजरंग दास ने जिला प्रशासन से अपने जानमाल के रक्षा की गुहार लगाई है। महंत कौशलकिशोर दास ने कहा कि इस संबंध में जिला प्रशासन से मिलकर प्रार्थना पत्र दे चुके है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि नरहन मंदिर बहुत ही जर्जर हालत में है जिसका जीर्णोद्धार कराना बहुत ही आवश्यक है। नगर निगम लगातार जर्जर मंदिरों के मरम्मत को लेकर महंतों को चेतावनी भी दे रहा है।महंत कौशलकिशोर दास ने कहा कि हम अपना मंदिर जीर्णोद्धार कराना चाहते हैं परंतु वहां कुछ अवैध किराएदार कब्जा कर रखे हैं जिससे मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं हो पा रहा है। अवैध किराएदार लगातार धमकी दे रहे हैं वा मंदिर की गरिमा के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं।महंत कौशलकिशोर दास ने कहा कि नरहन मंदिर पर कुछ भू माफियाओं की नजर पड़ गई है जिससे वह बहुत परेशान हैं। उन्होंने कहा कि हम जिला प्रशासन से मांग करते हैं कि हमारे जान माल की सुरक्षा की जाए। हमारे मंदिर को भू माफियाओं से बचाया जाए। उन्होंने कहा कि कि मैं मंदिर का वर्तमान सरवराहकार महंत हूं। यह लोग मेरे साथ कुछ अप्रिय घटना कर सकते हैं। इसलिए जिला प्रशासन मेरी जान माल की रक्षा करें। महंत कौशलकिशोर दास ने कहा कि उच्च न्यायालय द्धारा मंदिर के पक्ष में निर्णय आ चुका है जिसकी पुष्टि रेजीडेंट मजिस्ट्रेट व सीओ अयोध्या कर चुकें है। जहां सूबे की योगी सरकार हर वर्ग को शांति ढंग से जीवन जीने के लिए मददगार साबित हो रही है। तो वही रामनगरी अयोध्या के साधु संत मंदिर सुरक्षित नही है। इस मामले में सरकार को गम्भीर कदम उठाना चाहिए।
: हनुमत निवास के महंत बने मिथिलेशनंदिनी शरण
Wed, Mar 30, 2022
रामकथा के विशिष्ट विद्वान साहित्यिक डा मिथलेश नन्दनी शरण को रामनगरी के संत धर्माचार्यों ने कंठी चादर देकर सिद्ध पीठ हनुमत निवास का महंत बनाया
महंत मिथलेश नन्दनी शरण को महंताई देते सियाराम किला झुनकी घाट के महंत करुणानिधान शरण जी महाराज
आशीर्वाद देते जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य जी महाराज
महंत मिथलेश नन्दनी शरण जी को चादर देते अधिकारी राजकुमार दास जी महाराज
महंती समारोह में उमड़े रामनगरी के संत, धर्माचार्य व गणमान्य नागरिक हुआ भव्य आयोजन
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के सिद्ध पीठों में शुमार श्री हनुमत निवास पूज्य गोमती शरण जी महाराज की तपोभूमि के नाम से सुविख्यात है। आज उस सिद्ध पीठ को उसका सुयोग्य वारिस मिल गया। नगरी के वैभव जिन पर मां सरस्वती जी की कृपा अहर्निश बनी है प्रख्यात विद्धान महंत मिथलेश नन्दनी शरण को रामनगरी के संत धर्माचार्य ने गद्दी पर बैठाकर विधिवत कंठी चादर दे दिया। महंताई समारोह में पूरी अयोध्या के संत महंत व गणमान्य नागरिक शामिल हुए। सभी ने अपनी अपनी श्रद्धा निवेदित की। यह उत्सव हनुमत निवास के महंत सियाशरण जी महाराज के अध्यक्षता व राजगोपाल मंदिर के महंत कौशलकिशोर शरण फलाहारी जी महाराज के पावन सानिध्य में सम्पादित हुआ। हनुमत निवास समेत गोलाघाट के सभी मंदिरों की आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला के श्रीमहंत मैथिलीरमण शरण जी महाराज किलाधीश जी ने बताया कि हनुमत निवास अयोध्या के अत्यन्त सिद्ध मंदिरों में शामिल हैं।मंदिर के संस्थापक गोमती शरण महाराज ने करीब एक सौ साल पहले श्री हनुमान जी का साक्षात्कार प्राप्त किया था। वे चित्रकूट में कठिन तपस्या कर ईश्वरीय निर्देश पर अयोध्या आकर लक्ष्मण किला की गोशाला में रहने लगे।कालान्तर में यह स्थान हनुमत निवास के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस महंती समारोह में सद्गुरु सदन के महंत सियाकिशोरी शरण, दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य,मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य, श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख और विक्रमादित्य महोत्सव न्यास के अध्यक्ष पूज्य राजकुमार दास,अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता गौरीशंकर दास,जगदगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण,बिंदुगाद्याचार्य जी के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास,जगद्गरू रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य, आचार्य रघुनाथ दास शास्त्री,नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास,सियाराम किला झुनकी घाट के महंत करुणानिधान शरण, राजगोपाल मंदिर के अधिकारी डा शरद शरण,रामचरित मनास भवन के महंत अवधिबहारी दास उर्फ अर्जुन दास,हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास व राजू दास,महंत कमलादास रामायणी, महंत शशिकांत दास,महंत बलराम दास हनुमानगढ़ी,महामंडलेश्वर गिरीश दास,मधुकरी संत एमबी दास, महंत संजय दास,महंत मनीष दास,करतलिया बाबा आश्रम के पीठाधीश्वर महंत बालयोगी रामदास,महंत अंजनी शरण व महंत छोटू शरण व पूर्व सभासद महंत रामभद्र शरण, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, पार्षद आलोक मिश्र व अनुज दास,भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिंह,पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश पांडेय बादल, गिरीश पांडेय डिप्पुल,धर्मेन्द्र सिंह टिल्लू,विधायक प्रतिनिधि अमल गुप्ता, विशाल मिश्रा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।