: सत्संग व भगवत कथा श्रवण का सुअवसर भगवान की असीम कृपा से मिलता है: रामानुजाचार्य
Mon, Apr 4, 2022
श्रीरामजन्म महोत्सव में हो रहे राम कथा में जगद्गुरू जी ने भगवान के बाल स्वरूप एंव उनके अद्भुत बाल क्रीड़ाओं पर अद्भुत रस का किया वर्षण
अयोध्या। रामनगरी के सिद्धपीठ श्री हनुमान बाग में श्रीरामजन्म महोत्सव के अवसर पर भव्य श्रीराम कथा आज तृतीय दिवस की कथा में जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज श्री भगवान के बाल स्वरूप एंव उनके अद्भुत बाल क्रीड़ाओं पर अद्भुत रस का वर्षण किया। कथा को विस्तार करते हुए महाराज श्री ने कहा कि
सत्संग व भगवत कथा श्रवण का सुअवसर भगवान की असीम कृपा से प्राप्त होता है। मानव जीवन में ऐसा मौका तब आता है जब जन्म-जन्मांतर के पुण्य प्रकट होते हैं। इसके लिए मन की शुद्धि आवश्यक है और भगवान की कथा अंत:करण व मन को पवित्र कर देती है। सत्संग के बिन मन को पवित्र करने वाला दूसरा कोई साधन नहीं है। क्योंकि तन तो गंगा स्नान से शुद्ध हो जाते हैं। पंचगव्य पान से शरीर के रोम-रोम से लेकर हड्डी के अंदर तक की अशुद्धि दूर हो जाती है। लेकिन मन को केवल भगवत कथा सत्संग ही शुद्ध कर सकता है।
रामानुजाचार्य जी ने कथा के क्रम में कहा कि मन की पवित्रता के बिना सभी सत्कर्म निष्फल हो जाते हैं। मन ही मनुष्य के बंधन व मुक्ति दोनों का करण हैं। विषयों में आशक्त मन बंधन का कारण है, जबकि विषयों से विरक्त मन मुक्ति का हेतु है। भगवान के कथनों का उल्लेख करते हुए महाराज श्री ने कहा कि श्री हरि खुद कहते हैं कि मेरी इस गाथा को ज्यो-ज्यों सुना जाता है, त्यों-त्यों आत्मा का परिमार्जन व मन विशुद्ध होने लगता है। कथा को विस्तार देते हुए स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान की कथा भक्तों का आहर है।कथा से पूर्व यजमान शुभ लक्ष्मी शर्मा, निशांत शर्मा रायपुर छत्तीसगढ़ ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा में सिद्धपीठ श्री हनुमान बाग के महंत जगदीश दास, मंदिर के व्यवस्थापक सुनील दास, रोहित शास्त्री, पूज्य राघवाचार्य जी के शिष्य परिकर मनोज जी सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: नकारात्मकता नष्ट होगा तो सकारात्मकता श्रद्धा बढ़ने लगती है:यज्ञपीठाधीश्वर
Mon, Apr 4, 2022
कनक महल जानकी घाट में विद्यावाचस्पति यज्ञपीठाधीश्वर संत इंद्रदेव सरस्वती जी महाराज के श्री मुखारविंद रामकथा अमृत वर्षा हो रही
6 अप्रैल को शाम 6 बजे अयोध्या के सभी संत धर्माचार्यों का होगा विशाल सन्त सम्मेलन एवं साधु-भोज
अयोध्या। कनक महल जानकी घाट में वृंदावन से पधारे विद्यावाचस्पति यज्ञपीठाधीश्वर संत इंद्रदेव सरस्वती जी महाराज के श्री मुखारविंद से निसृत श्री राम कथा में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के आज तीसरे सत्र में यज्ञपीठाधीश्वर संत इंद्रदेव सरस्वती जी महाराज ने कहा कि शाश्वत आत्मा में समाई हुई है, कुछ लोग उसे आत्मज्ञान कहते हैं। शरीर में व्याप्त आत्मा अमृत है अर्थात वह कभी मृत नहीं होती। तीर्थ में घूमने से पाप का भार कम होता है, शरीर में पाप अर्थात् ही नकारात्मकता नष्ट होगा तो सकारात्मकता अर्थात् ही श्रद्धा बढ़ने लगती है। उन्होंने कहा कि निरन्तर राम का नाम रटने से कोई पाप कर्म हमारे हाथों नहीं होगा। हमें राम जी को सर्वत्र समान समझना चाहिए, जहाँ कम समझ लिया वहां हम पाप में डूबते हैं। संत इंद्रदेव सरस्वती जी ने कहा कि काव्य की गणना को कांड कहते हैं। जीवन जीने के लिए गणित की नहीं अनुभव की आवश्यकता है। यदि आपका विश्वास गुरुदेव पर है तो गुरु की दी हुई गाली या अपशब्द भी आपके लिए वरदान बन जाता है। प्रमाद काल दोपहर के 1 बजे से 4 बजे के बीच आपके प्रतिकूल होता है, उसको जिसने साध लिया, इस समय में जिसने अपने आसन को साध लिया, अपनी निद्रा पर जीत हासिल कर ली, वह जीत जाता है। साधुओं को श्वान निद्रा में सोना चाहिए। दिन भर यदि भजन न हो सके तो सोने से पूर्व भजन कर लेना चाहिए। घर में जो मधुर भोजन बनता है उसे यज्ञ की आहुति बनाकर आहूत करें। जिन जिन चीजों से प्राणों को सहायता मिलती है वह भगवान ही है। बाहर का क्लेश कभी घर में नहीं लाना चाहिए, ऐसा हम शंकर भगवान से सीखना चाहिए। गाय का दूध पीए जो, दोनों समय अग्निहोत्र यज्ञ करने वाला, त्रिकाल संध्या करने वाला ब्राह्मण यदि हमारे लिए रामायण पाठ करता है तब हमारे वारे न्यारे हो जाते हैं।आगे सन्त जी बताते हैं कि प्रजापति दक्ष द्वारा आयोजित महायज्ञ में श्री रुद्र भगवान को अपमानित करने पर रूष्ट हुए रुद्र भगवान को शांत करने के लिए भगवान श्री नारायण ने शिवलीलामृत का पाठ किया था।ज्ञात हो कि इसी कथा के उपरांत 6 अप्रैल को संध्याकाल 6 बजे अयोध्या जी के समस्त साधु-संतों का सन्त सम्मेलन एवं साधु-भोज का आयोजन है, अतः सन्त श्री का आह्वान है कि अधिक से अधिक इस अवसर का लाभ लेवें।साथ ही श्री राम कृपा महायज्ञ का आयोजन तारीख 10 अप्रैल को श्री रामनवमी के अवसर पर किया गया है।
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Mon, Apr 4, 2022
रामजन्मोत्सव पर सजा सियाराम किला,नवाह्न पारायण व बधाई गायन से सराबोर
भक्ति, श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का प्रतीक बना झुनझुनिया बाबा आश्रम
दो दशक से आश्रम को सर्वोच्च शिखर पर स्थापित किया श्रीमहंत करूणा निधान शरण जी महाराज ने
अयोध्या। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की धराधाम को सन्तो की सराह भी कही जाती है। या हम यूं कह ले कि रामनगरी में अनेक भजनानन्दी सन्त हुये उनमें से एक रहे विभूषित जगदगुरू स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनिया बाबा जो रामनाम के सच्चे साधक के रूप में न सिर्फ अयोध्या अपितु पूरे भारत में रामनाम की अलख जगायी।
झुनझुनिया बाबा का नाम अयोध्या के सिद्ध संतों में शामिल है। बाबा को सीता जी की सखी चंद्रकला का अवतार कहा जाता है। यही वजह थी कि बाबा हमेशा स्त्री रूप में रहते थे और राम धुन में लीन रहते थे। रसिक भाव से श्रीराम नाम का प्रचार कर उसे जनमानस के हृदय में प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी जानकी शरण महाराज उर्फ झुनझुनिया बाबा की गिनती अयोध्या के सिद्ध संतों की अग्रणी पंक्ति में की जाती है। महाराजश्री को सीता जी की सहेली चंद्रकला का अवतार माना जाता है। उन्होंने सरयू के तट पर जहां तपस्या की थी। वहां सियाराम किला भव्य मंदिर बना हुआ है।
सरयूतट पर सुशोभित श्री सियाराम किला झुनकी घाट के आचार्य श्री की तपोस्थली आज अपने सर्वोच्च शिखर की ओर अ्रग्रसर है। यह आश्रम मां सरयू के पावन तट पर स्थित है। जो चतुर्दिक धर्म की स्थापना, समाज सेवा गौ सेवा अतिथि सेवा विद्यार्थी सेवा संत सेवा व दरिद्र नारायण की सेवा में भी दिन प्रतिदिन निरंतर आगे बढ़ रहा है। जहां पर पूरी निष्ठा व ईमान से सभी सेवा किया जा रहा है। इस आश्रम में भक्तों की एक लम्बी फेरहिस्त है। जिसमें पूरे भारत से लाखों भक्त इस आश्रम से जुड़े हुये है। श्री सियाराम किला को भक्ति श्रद्धा समर्पण और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। मां सरयू के तट पर भव्य और आकर्षक श्री सियाराम किला झुनकीघाट भक्ति और साधना के दृष्टि से भी सर्वोत्तम स्थान माना जाता है। यहां पहुंचकर सन्त साधक अपने परमाराध्य प्रभु की आराधना कर अपने को कृत्य-कृत्य करते है। मन्दिर के जगमोहन में युगल सरकार की प्रतिमा संगमरमर से बनी दिव्य मूर्ति का दर्शन करते है। मन्दिर में लगातार आज भी सीताराम धुनि कीर्तन संपदितकर महौल को भक्मिय बना देता है। कहते है सौन्दर्यशाली, शांत वातावरण सरयूतट साकेत लोक का अनुभव सदा सर्वदा शीतल मंद सुगंध समीर अनुपम सूर्यास्त दर्शन भजनांदियो के लिए उत्तम शोर से परमशांत गुफा किला से सरयू तक जाने का गुप्त मार्ग झुनकी उद्यान मिथिला वाटिका सत्ंसग भवन श्री युगल बिहारी जू का अद्भुत दर्शन जैसी भाव-भंगिमा रखे ठाकुर जी वैसा ही बन जाए आदि सियाराम किला का विशिष्ठ गुण हे। स्वामी जानकी शरण उर्फ झुनझुनिया बाबा उल्टी खाट पर बैठकर श्री राम नाम सत्य है की धुन लगाते हुए यात्रा करते थे। झुनझुनिया बाबा कानों में बाली हाथों में कंगन पैरों में घुंघरू पहन के सीता जी की सखी चंद्रकला के रूप में ही आजीवन भगवान श्रीराम की आराधना में लीन रहे। उन्होंने सत्यभाव से श्री सीताराम की उपासना की धारा प्रज्वलित की, जो आज भी करोड़ों लोगों को रामनाम रूपी दिव्य रस का अनुभव कराती है. मंदिर के महंत करुणानिधान शरण महाराज कहते हैं की झुनझुनियां बाबा ने कई दशक तक कठोर तपस्या कर भगवान का साक्षात दर्शन प्राप्त किया। किशोरी जी से उन्हें जन कल्याण का आदेश मिला।
इस आश्रम को दो दशक से अपने सर्वोच्चत शिखर पर निरन्तर ले जाने के लिए आज भी वर्तमान महन्त श्री करूणा निधानशरण जी महराज लगे रहते हे। आश्रम से जुड़े प्रख्यात कथावाचक जिनका नाम देश विदेश के नामचीन कथावाचकों में लिया जाता है। परमश्रेद्धय स्वामीजी प्रंभजनानन्द शरण जी महराज प्रभुवन्दन एवं जनसेवा संस्थान द्वारा निरन्तर दीन-दुखी असहाय की मदद करना चिकित्सालयों की स्थापना कर रोगियों को निःशुल्क उपचार करना वृद्धजनों व वृद्धा आश्रम असहाय व निर्धन कन्याओं का विवाह करना विशाल गौशाला प्राकृतिक प्रकोप यानि बाढ़ भूकप में राहत देना सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार करना जैसी तमाम योजनाएं चला कर निरन्तर लोगों की मदद करते चले आ रहे है। आश्रम में सभी उत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। यहां का मुख्य उत्सव रामनवमी मेला है। रामजन्मोत्सव पर पूरा मंदिर दुल्हन की तरह से सजाया गया है। चारों तरह खुशियां मनाई जा रही है। सुबह 21 वैदिक आचार्य नवाह्न पारायण पाठ कर रहे तो शाम मंदिर में बधाइयां बाज रही है।
नवाह्न पारायण पाठ कर करे आचार्य का सम्मान करते श्रीमहंत जी
मंदिर में कलश स्थापना की पूजा करते श्रीमहंत करुणानिधान शरण महाराज