: सीताराम विवाहोत्सव के साथ रामलला सदन देवस्थान में महोत्सव का हुआ समापन
Sat, Jun 4, 2022
दक्षिण से उत्तर के संबंध को जोड़ने का सेतु बनेगा रामलला सदन
राम लला सदन में नामकरण संस्कार किया जाना होता है बेहद शुभ
करीब तीन सौ वर्ष प्राचीन है रामलला सदन, मंदिर का दक्षिण भारत की पारम्परिक शैली में निर्माण कराया गया
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या के रामकोट स्थित श्री राम जन्मभूमि से चंद कदम दूरी पर स्थित दक्षिण भारतीय शैली से बने श्री रामलला देवस्थानम में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में सीताराम विवाहोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया इसी के साथ भव्य मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन भी हो गया।
अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर के साथ-साथ अब मंदिर और मूर्तियों के शहर अयोध्या में आकर्षण का केंद्र होगा रामलला सदन देवस्थान होगा। जिसको रामलला के नामकरण स्थल के रूप में देवस्थान माना जाता है। जो भगवान रामलला के गर्भगृह से सटा हुआ है। प्राचीन मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्री राम समेत उनके तीनों भाइयों का नामकरण रामलला सदन में हुआ था। जहां पर भगवान वशिष्ठ ने प्रभु राम के साथ उनके तीनों भाइयों का नामकरण किया था। उसकी तमाम कथाएं पुराणों में भी मिलती हैं। राजा दशरथ के महल से ईशान कोण पर स्थित भगवान रामलला की जन्मस्थली से चंद कदम की दूरी पर यह स्थान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आज भी लोग इस स्थल पर अपने परिवार में जन्म लेने वाले नवजात के नामकरण करने के लिए यहां आते हैं। लोगों का मानना है कि राम लला सदन में नामकरण संस्कार किए जाना बेहद शुभ होता है। 5 दिवसीय महोत्सव में दक्षिण भारत से आये वैदिक आचार्यों ने पूरे रीति रिवाज से दक्षिण परम्परा में पूजन अर्चन कराया। महोत्सव रामनगरी के चर्चा का विषय रहा। रामनगरी के विशिष्ट संतो का सम्मान रामलला सेवा सदन के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी ने किया।
रामलला सदन के जीर्णोद्धारक जगदगुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज ने बताया कि यह स्थान करीब तीन सौ वर्ष प्राचीन है। इस मंदिर का दक्षिण भारत की पारम्परिक शैली में निर्माण कराया गया है।उसी परम्परा में उपासना भी होती है। इसके कारण मंदिर में प्रतिष्ठित होने वाले भगवान राम-लक्ष्मण व सीताजी समेत रामानुजीय परम्परा के आचार्यों की मूर्तियां भी महाबलीपुरम में ही निर्मित हैं। मंदिर के अचल विग्रह शालिग्राम शिला से निर्मित हैं।मंदिर में भगवान के प्राण प्रतिष्ठा के साथ गरुण स्तम्भ व गोपुरम का भी पूजन किया गया।
रामलला सेवा सदन के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य डा राघवाचार्य बताते हैं कि महर्षि बाल्मीकि ने अपनी बाल्मीकि रामायण में भी इसका जिक्र किया है। जिसमें वर्णित है कि भगवान राम के चारों भाइयों का नामकरण इसी जगह पर हुआ था।इसीलिए इस पूरी जगह को रामलला सदन के नाम से जाना जाता है। डा राघवाचार्य ने कहा कि भगवान श्री राम,भरत,शत्रुघ्न समेत लक्ष्मण का नामकरण संस्कार गुरुदेव वशिष्ठ ने यहीं पर किया था। महोत्सव में आये संत धर्माचार्य का अभिनन्दन जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज व महोत्सव के मुख्य यजमान गोविंद कुमार लोहिया ने किया। कार्यक्रम की देखरेख में गुड्डू मिश्रा, रमेश मिश्रा सिब्बू,राघवेंद्र मिश्रा अप्पू, विनोद जी, मनोज जी,प्रमोद सहित स्वामीजी के शिष्य परिकर लगे रहें।
: श्रीअवध बिहारी कुंज का 16 वां पाटोत्सव धूमधाम से मनाया गया
Sat, Jun 4, 2022
ब्रह्म मुहूर्त में ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक कर नवीन वस्त्र धारण करा सुगंधित पुष्प मालाओं से किया गया आच्छादित
अयोध्या। अयोध्या के बेगमपुरा मुहल्ले में स्थित श्रीअवध बिहारी कुंज के पीठाधीश्वर महंत गणेश दास जी महाराज के सानिध्य में ठाकुर जी का 16 वां पाटोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। 3 दिनों से चल रहे पाटो उत्सव महोत्सव के अंतिम दिन शनिवार को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ठाकुर जी का पंचामृत से अभिषेक किया गया नवीन वस्त्र धारण कराया गया सुगंधित पुष्प मालाओं से आच्छादित किया गया। वैदिक विद्वानों द्वारा स्वस्तिवाचन करके भगवान को नाना प्रकार के व्यंजनों से भोग लगाया गया और प्रसाद को सभी संतो महंतों एवं शिष्य गणों में वितरण किया गया।
अवध बिहारी कुंज के पीठाधीश्वर महंत गणेश दास जी महाराज ने बताया कि ठाकुर जी का पाटोत्सव गुरुदेव भगवान के सानिध्य में प्रतिवर्ष निरंतर मनाया जा रहा था लेकिन इस बार गुरुजी की भाव मई उपस्थिति में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया और निरंतर हर वर्ष मनाया जाएगा।पाटोत्सव महोत्सव में हनुमानगढ़ी के महंत मुरली दास महंत केदार दास जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जनमेजय शरण महंत रामशरण रामायणी महामंडलेश्वर गिरीश दास बेतिया बिहार के महंत कामता दास सहित अयोध्या के सैकड़ों संत महंत पाटोत्सव में सम्मिलित हुए।
: अव्यवस्था फैलाने वालों के सपने नहीं होंगे पूरे : डॉ. दिनेश शर्मा
Sat, Jun 4, 2022
पूर्व उप मुख्यमंत्री ने महंत नृत्गोपाल दास के जन्मोत्सव समारोह का किया उद्घाटन
अयोध्या। सूबे के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत में कानपुर दंगे को लेकर कि कुछ लोग अव्यवस्था फैलाने के सपने देखते हैं। उनके सपने चूर-चूर होंगे। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। बताया कि कानपुर में बवाल करने वाले दोषियों को दंडित करने का काम शुरू हो गया है।श्री शर्मा ने कहा कि 57 ऐसी योजनाएं चल रही हैं, जिसमें यूपी नंबर वन है। पहली बार भारत में प्रदेश को यह स्थान मिला है। सांप्रदायिक दंगा हो, जातीय दंगा हो, क्षेत्रीय दंगा हो या हुड़दंग हो। अब यह सब पिछले जमाने की बात है। अब प्रदेश में कानून का राज है। चारों तरफ प्रदेश का विकास हो रहा है। जनता सब देख रही है।इससे पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का 84 वें जन्मोत्सव महोत्सव का उद्घाटन डॉ दिनेश शर्मा ने किया। यह महोत्सव दस दिनों तक चलेगा।महोत्सव के संयोजक महंत कमलनयन दास महाराज ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की देखरेख विहिप प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा जी कर रहे है।