: गुरु अर्जुन देव जी ने धर्म के लिए अपने प्राणों तक की आहुति दे दी: सरदार कवलजीत
Fri, Jun 3, 2022
अयोध्या। सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी को याद करते हुए अयोध्या के समाजसेवी सरदार कवलजीत सिंह कहते हैं कि गुरु अर्जुन देव का पूरा जीवन मानव सेवा को समर्पित रहा है। वे दया और करुणा के सागर थे। वे समाज के हर समुदाय और वर्ग को समान भाव से देखते थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1581 में गुरु अर्जुन देव सिखों के पांचवे गुरु बने। उन्होंने ही अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी, जिसे आज स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है। कहते हैं इस गुरुद्वारे का नक्शा स्वयं अर्जुन देव जी ने ही बनाया था। सरदार कवलजीत सिंह ने कहा कि गुरु अर्जुन देव सिख धर्म के पहले शहीद थे और मुगल सम्राट जहांगीर के आदेश पर उन्हें फांसी दी गई थी। मुगल उत्तर भारत में उसके बढ़ते प्रभाव और सिख धर्म के प्रसार से डरते थे। उन्होंने सिख ग्रंथ आदि ग्रंथ का पहला संस्करण संकलित किया था। जिसे अब गुरु ग्रंथ साहिब के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि अकबर की मौत के बाद उसका पुत्र जहांगीर बादशाह बना। जहांगीर को गुरु जी की बढ़ती लोकप्रियता को पसंद नहीं करता था। जहांगीर ने लाहौर जो की अब पाकिस्तान में है, अत्यंत यातना देकर उनकी हत्या करवा दी। अनेक कष्ट झेलते हुए गुरु जी शांत रहे, उनका मन एक बार भी कष्टों से नहीं घबराया। उन्हें शहीद करने का डर दिखाकर अपनी मर्जी के कार्य करवाने की कोशिश की लेकिन गुरु जी ने झूठ का साथ देने से साफ इनकार कर दिया और शहादत को चुना। गुरु अर्जुन देव जी ने धर्म के लिए अपने प्राणों तक की आहुति दे दी।
: सेवा,सिमरन और श्रद्धा के साथ मनाया गया शहीदों के सिरताज का शहीदी दिवस
Fri, Jun 3, 2022
गुरु अर्जुन देव ने जाति धर्म के नाम पे बिखरे समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम किया: जत्थेदार बाबा महेन्द्र सिंह
अयोध्या। अयोध्या स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा नज़रबाग में 3 जून शुक्रवार को गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्पूर्ण पाठ की समाप्ति
के बाद अरदास और कीर्तन करके पांचवे गुरु जी के बलिदान को श्रद्धा के सुमन अर्पित किए गए ।इसके बाद गुरुद्वारा नजरबाग के सभी सेवादार और अयोध्या फैजाबाद नवाबगंज मास्किनवा मनकापुर सोहावल से आई संगत ने जत्थेदार बाबा महेन्द्र सिंह जी की सरपरस्ती श्रृंगारहाट राज सदन के सामने आम जनमानस और सृद्धालुओ को पारंपरिक छबील ठंडा शरबत और चने का प्रसाद वितरित करके अयोध्या नगरी से गुरु जी को सेवामई श्रद्धांजली अर्पित की गई।
जत्थेदार बाबा महेन्द्र सिंह जी ने बताया कि गुरु जी का जन्म 15 अप्रैल सन 1563 में हुआ और 30 मई 1606 ई. में गर्म तवे पे बैठा के सिर में तपता हुआ रेता डाल के तरह तरह के तसीहे दे के गुरु जी को शहीद कर दिया गया। मात्र 46वर्ष की आयु गुरु जी ने एक रचनाकार के रूप में अध्यात्म का सर्वोच्च स्वरूप गुरु ग्रंथ साहिब का संकलन किया, समाज को एक नई दिशा और ऊर्जा देने के लिए कबीर,धन्ना जाट,रविदास, सैन नाई, नामदेव, शेख फरीद, त्रिलोचन, पीपा,सधना जैसे लगभग 15 शीर्ष भक्तों की बाणी गुरु ग्रंथ साहिब में अंकित करके जाति धर्म के नाम पे बिखरे समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम किया ,लगभग 31 रागों में संकलित गुरु ग्रंथ साहिब का आध्यात्मिक स्वरूप गुरु की संगीत में प्रकांड विद्वता को दर्शाती है ।इसके अलावा गुरु जी को हिंदी,अवधी,संस्कृत,फारसी व अरबी आदि अनेक भाषाओं का ज्ञान था।
शस्त्र और शास्त्रों में गुरु जी को महारत हासिल थी।आज पूरे विश्व में सेवा और अध्यात्म का केंद्र अमृतसर में स्थित हरिमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर का निर्माण कर, मूर्त रूप देकर हम सब को शिल्पकला और सेवा सिमरन का एक अलौकिक स्थान प्रदान किया।
सेवादार सरदार नवनीत सिंह ने बताया कि गुरु अर्जुन देव जी के शांत स्वभाव और कुशाग्र बुद्धि के श्रेष्ठ गुणों को देख पिता रामदास जी ने मात्र 18 साल की उम्र में ही उन्हें गुरुगद्दी सौंप दी थी। गुरुगद्दी पर बैठते ही उन्होंने अपने पिता के आरंभ किए हुए सभी काम करना शुरू कर दिए। गुरु अर्जुन देव ने सिखों को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया। बाद में इसे धर्म का अंग बना दिया गया। ऐसे मानवीय कार्य में सभी लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लेने लगे थे। आज हम सब मिलकर गुरु के शहीदी दिवस पर सेवा करते है।
: नन्दनी नगर से बैठकर करुंगा अयोध्या वासियों की सेवा: बृजभूषण शरण सिंह
Fri, Jun 3, 2022
संतो, सरयू मैया व हनुमानजी की कसम खा कर कहता हूँ नहीं लड़ूंगा अयोध्या से चुनाव: सांसद कैसरगंज
कहा,अयोध्या धाम का कर्ज हम जीवन भर नही उतार सकते,रामनगरी के संतो का खून है हमारे अंदर
सांसद ने स्व महंत हरिशंकर दास,महंत ज्ञानदास महाराज, महंत डा रामविलास वेदांती, अधिकारी राजकुमार दास, महंत बलराम दास व पुजारी हेमंत दास का लिया नाम
अयोध्या। 5 जून को सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस को ऐतिहासिक बनाने व उत्तर भारतीय के सम्मान को बुलंद करने के पावन उद्देश्य से कैसरगंज के लोकप्रिय सांसद अयोध्या के संतो के दुलारे बृजभूषण शरण सिंह लगातार संघर्ष करते हुए रोड पर पसीना बहा रहे है। उम्र के इस पड़ाव पर सांसद बृजभूषण शरण सिंह के परिश्रम को देख हर कोई तारीफ कर रहा है। नेताजी का अयोध्या के प्रति इतना लगाव देख अयोध्या वासी मुक्त कंठ से सांसद बृजभूषण शरण सिंह की तारीफ कर रहे है। आज अयोध्या की हर गलियों में सिर्फ नेता बृजभूषण की चर्चा हो रही है। अपने 5 जून के कार्यक्रम को और कसने व तैयारियों के क्रम में आज पूज्य परमहंस रामचन्द्र दास जी महाराज के समाधि स्थल पर सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मत्था टेका। इसके बाद हवन पूजन कर संतों का आशीर्वाद लिया। महंत डा रामविलास वेदांती, श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, हनुमानगढ़ी से महंत बलराम दास, महंत इन्द्रदेव दास, संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष पुजारी हेमंत दास, कामधेनु आश्रम के महंत महामंडलेश्वर आशुतोष दास नारायण मिश्रा सहित बड़ी संख्या से संत महंत ने सांसद बृजभूषण शरण सिंह का जोरदार स्वागत कर उनको दर्जनों गदा भेंट कर आशीर्वाद दिया। लोगों के इस प्यार दुलार अपना पन देख सांसद बृजभूषण शरण सिंह खुद को रोक न पाये और भावुक हो गये। उन्होंने बिना नाम लिये कहा कि कुछ लोग कह रहे है कि मेरा ये अभियान चुनावी है मुझे यहां से चुनाव लड़ना है। मै उन सभी लोगो को साथ में पूरे अयोध्या वासियों को ये आश्वासन देता हूँ सरयू मैया को साक्षी मान कर, संतो को साक्षी मानकर वचन देता हूँ कि मै अयोध्या से कोई चुनाव नही लड़ूंगा। उन्होंने कहा कि जैसे अयोध्या की रक्षा भरत जी महाराज ने नन्दी ग्राम से रहकर तपस्या करते हुए रामजी के खड़ाऊ रखकर की थी उसी प्रकार मै नन्दनी नगर बैठकर सरयू जी के उसपार रहकर सेवक की तरह अयोध्या वासियों की सेवा करुंगा संतो की सेवा करुंगा। सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मै नन्दनी नगर से ही सभी संतो की सेवा अनवरत करता रहूंगा। उन्होंने कहा कि मेरे अन्दर संतो का खून है। जब मुझे खून चाहिए था तो हमारे बड़े भाई पूज्य महंत ज्ञानदास महाराज ने मुझे खून देकर मेरी जान बचायी थी उनका ऋण मै आजीवन नही उतार सकता हूँ। सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जब मैं तिहाड़ जेल में बंद था तो अयोध्या के संतों ने गोण्डा में मेरे चुनावी रैली को सफल बनाया था ये सब संतों का प्रेम और आशीर्वाद ही है जो मै आज यहा हूँ। नेताजी अपने संबोधन में स्व महंत हरिशंकर दास,महंत ज्ञानदास महाराज, महंत डा रामविलास वेदांती, अधिकारी राजकुमार दास, महंत बलराम दास व पुजारी हेमंत दास का नाम लिये। इस सफल व ऐतिहासिक कार्यक्रम में नेताजी के करीबी नन्दनी नगर सज जुड़े महेंद्र त्रिपाठी का बड़ा योगदान रहा।