: अनमय की मदद को आगे आए रामनगरी के संत
Thu, Sep 1, 2022
महंत बृजमोहन दास ने चलाया अभियान बचेगा अनमय, चलेगा अनमय
अयोध्या। सुल्तानपुर का अनमय। जिसकी उम्र करीब 7 माह है। उसके इलाज में करीब 16 करोड़ रुपये खर्च होंगे। घर वालों के पास इतने रुपये नहीं कि उसका इलाज करा पाएं। बच्चे की मां अंकिता की पुकार पर मदद के लिए रामनगरी अयोध्या के संत महंत आगे आए हैं। चौबृजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बृजमोहन दास महाराज ने लोगों से मदद की अपील की। आज अनमय की मां अंकिता सिंह जो सुल्तानपुर निवासी है वो अपने पति के साथ चौबृजी मंदिर पहुंची जहां भगवान का दर्शन पूजन कर महंत बृजमोहन दास महाराज का आशीर्वाद लिया। जब उन्होंने अपने बेटे के बारें में महंत बृजमोहन दास महाराज को बताया तो महंत जी की आंख भर आयी उन्होंने बच्चे के लिए आर्थिक मदद देते सभी अपने सभी शिष्यों से अपील की कि अधिक से अधिक रुपये से अनमय की मदद करे जिससे बच्चा स्वस्थ हो सके। महंत बृजमोहन दास ने अंकिता सिंह को भरोसा दिया कि चौबृजी मंदिर का द्धार उनके लिए हमेशा खुला है। वे आगे भी मदद करेंगे।महंत बृजमोहन दास ने कहा कि अनमय के लिए वो अपने शिष्यों से मिलकर भी कहेंगे और मदद करायेंगे भगवान बहुत जल्द ही बच्चे को स्वस्थ करेंगे।
अंकिता सिंह ने बताया कि अनमय 3 महीने का था। उसकी ग्रोथ नहीं हो रही थी। उसे दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में दिखाया। पता चला उसे स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी एस एम ए टाइप ओएनई नाम की बीमारी है। जिससे बच्चे की ग्रोथ नहीं होती है। हमारे पति सुमित कुमार यूको बैंक में नौकरी करते हैं। इतने रुपये नहीं हैं कि बेटे का इलाज करा सकें। अंकिता सिंह ने कहा कि डॉक्टारों ने बताया कि एस एम ए बीमारी करोड़ों बच्चों में एकाद को ही होती है। इस बीमारी के लक्षण मात्र 7 महीने में ही आने लगते हैं। 2 साल के भीतर ही बच्चे की मौत हो जाती है। इस बीमारी में जो इंजेक्शन लगता है, उसमें एक इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपये है।
सोशल मीडिया पर तमाम लोग इस बच्चे के लिए मुहिम छेड़ रखें है।सुल्तानपुर के डीएम रवीश गुप्ता भी मुख्यमंत्री विवकाधीन से संदर्भ में मदद के लिए शासन को पत्र लिखा है।
: स्वामी नारायण मंदिर में गणपति बप्पा मोरिया की मची धूम
Thu, Sep 1, 2022
रामनगरी के स्वामी नारायण मंदिर में गणेश उत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ, हुई महाआरती
नर नारायण देव गादीपति आचार्य मोटा महाराज ने मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के बारे में लोगो को रुबरु कराया: अखिलेश्वर शास्त्री
अयोध्या। बुधवार से रामनगरी गणेशोत्सव में मगन हो गई। भगवान राम की नगरी में पार्वती पुत्र गणेश के जन्मोत्सव का श्रीगणेश हुआ। रामनगरी में स्वामी नारायण संप्रदाय के आद्य संस्थापक घनश्याम महाराज की बाल्य स्थली स्वामीनारायण मंदिर रायगंज में प्रथमेश विराजमान हुए तो गणपति बप्पा मोरया के जयकारे के साथ पूजन आरंभ हो गया। बाल गणेश की प्राकट्य की बेला पर पूजन-स्तवन और शत-शत नमन करते भक्तों का मन भक्ति में रमा रहा। गणपति बप्पा दरबार में भक्तों ने शीश झुकाया। मंदिर के महंत अखिलेश्वर दास शास्त्री के अध्यक्षता में भगवान गणेश का भव्य श्रृंगार, पूजन एवं आरती के विधान संपादित किए गए। मंदिर के महंत शास्त्री अखिलेश्वर दास जी महाराज ने कहा कि यह महोत्सव जल झूलनी एकादशी तक चलेगा। जल झूलनी एकादशी को मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकलेगी जो भगवान गणेश जी की पालकी व विराजमान ठाकुर जी की पालकी के साथ निकलेगी। मां सरयू नदी पर भगवान को नौका विहार कराके प्रसाद वितरण होगा। इसके बाद भगवान गणेश जी का विसर्जन होगा। इसके बाद विराजमान ठाकुरजी की पालकी पुनः मंदिर वापस आएगी।
ज्ञातव्य हो स्वामी नारायण सम्प्रदाय का स्वर्णिम इतिहास बिना नर नारायण देव गादीपति आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद के बिना सम्भव ही नही है। महाराज तेजेन्द्र प्रसाद जी ने स्वामी नारायण सम्प्रदाय का डंका न सिर्फ भारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया है। मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के बारे में लोगो को रुबरु कराया। गुजरात के गलियों गलियो में घर घर जाकर भगवान स्वामी नारायण जी की महिमा का गुणगान कर लोगो को सम्प्रदाय से जोड़ा। आज वर्तमान में उनके बेटे नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए सम्प्रदाय को आगे बढ़ा रहे है। अयोध्या के समीप गोंडा की अलख गुजरात तक पहुंच कर पूरी दुनिया को मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के आराध्यदेव बाल स्वरूप घनश्याम प्रभु की जन्मस्थली छपिया से 60 किलोमीटर दूर रामनगरी अयोध्या में नूतन भव्य भवन का निर्माण है जो स्वामी नारायण मंदिर रायगंज के नाम से सुप्रसिद्ध है।
: विशुद्ध चित्त ही वसुदेव है और देवकी निष्काम भक्ति: राधेश्याम शास्त्री
Thu, Sep 1, 2022
मन ही हमारे बंधन और मोक्ष का कारण है: गोपाल कृष्ण
जानकी महल ट्रस्ट में व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा कर रहे वृंदावन धाम से पधारे गोपाल कृष्ण
अयोध्या। आध्यात्मिक योग मोक्ष का साधन है। मन ही हमारे बंधन और मोक्ष का कारण है। जब संत पुरुषों का संग होता है तो मन सतोगुण संयुक्त होकर भगवत चिंतन करता है जो ही मुक्तिका कारण भी बन जाता है।
उक्ताशय के उद्गार रामनगरी के जानकी महल ट्रस्ट में आयोजित श्रीमद् भागवत महोत्सव के तृतीय दिवस वृंदावन धाम से पधारे प्रख्यात कथावाचक गोपाल कृष्ण महाराज जी ने भागवत कथा में कपिल भगवान व माता देवहूति प्रसंग का वर्णन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब कर्म अथवा यज्ञ का उद्देश्य परमेश्वर के लिए होता है तो वह सफल होता है। कर्मों के उपभोक्ता तो वास्तव में ईश्वर ही है वही हमें कर्म फल प्रदान करते हैं। मनुष्य को अपने माता पिता, गुरु व अपने श्रेष्ठ का अपमान नहीं करना चाहिए। गुरु ज्ञान का दाता है, जो जीवन को परम लक्ष्य परमात्मा से मिलाता है। गोपाल कृष्ण जी ने कहा कि मनुष्य का जीवन अद्भुत है। एक बार ही मिलता है। मनुष्य ने जीवन को रसिकता के साथ जीना चाहिए। जीवन के प्रत्येक क्षण को अमूल्य मानकर उसका महत्तम आनंद उठाना, जीवन को सार्थक बनाता है। आनंद ईश्वरस्वरुप होता है। इसलिए दुखों को ज्यादा देर अपने मन में संजोये नहीं रखना चाहिए। यह महोत्सव पूज्य राधेश्याम शास्त्री जी महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रीकृष्ण नंद महोत्सव प्रसंग पर पूज्य राधेश्याम शास्त्री जी महाराज ने कहा कि विशुद्ध चित्त ही वसुदेव है और देवकी निष्काम भक्ति। इन दोनों के मिलन होने पर भगवान कृष्ण का जन्म होता है। जब बुद्धि ईश्वर का अनुभव करती है, तब संसार के सारे विषय बंधन टूट जाते है। जो भगवान को अपने मष्तक पर विराजमान करता है, उसके लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते है। कथा के शुभांरभ पर व्यासपीठ का पूजन आयोजक गीता देवी, कमला देवी, गिरवरलाल मोदी एवं समस्त मोदी परिवार करैरा ने किया। इस अवसर पर कन्हैयालाल पोद्दार, गोपाल जी पोद्दार सहित बड़ी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद रहें।