: हनुमानगढ़ी से नागा साधुओं ने निकाली तिरंगा यात्रा
Mon, Aug 15, 2022
सनातन संस्कृति और देश की रक्षा के लिए संत समाज की अहम भूमिका: महंत संजय दास
भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय हिंद के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हुई वैष्णव नगरी
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या की हृदय स्थली हनुमानगढ़ी से भव्य तिरंगा यात्रा निकली, जो नयाघाट तक गई। तिरंगा यात्रा में भारत माता की जय वंदे मातरम जय हिंद के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठी। यह मौका था आजादी के अमृत महोत्सव का जब देश को आजाद हुए 75 वर्ष पूरे होने वाले हैं और कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आवाहन किया था कि 13 तारीख से 15 तारीख शाम 5 बजे तक हर देशवासी अपने घर पर तिरंगा लगाए। इसी की अलख जगाने के लिए अयोध्या की सड़कों पर हजारों की संख्या में नागा साधु संत निकले और पूरी राम नगरी वंदे मातरम से गुंजायमान होगी। हनुमानगढ़ी से शाम 4 बजे संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज की अगुवाई में तिरंगा यात्रा निकली जिसका समापन नयाघाट पर हुआ। तिरंगा यात्रा को सम्बोधित करते हुए संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने कहा कि ने कहा कि देश के युवाओं में भक्ति के साथ राष्ट्रभक्ति भी रहे राम मंदिर निर्माण के साथ राष्ट्रीय भक्ति के प्रति युवाओं से लेकर हर वर्ग के लोग प्रेरित हुए हैं जो आज देखने को मिल रहा है अयोध्या से निकली है तिरंगा यात्रा देश नहीं पूरे विश्व के लिए संदेश है। विश्व की आदि नगरी अयोध्या रही है अयोध्या से विश्व के लिए संदेश जाता रहा है उसी संदेश को देने के लिए अयोध्यावासी साधु संत और वृद्ध समाज के लोग और नन्हे मुन्ने छात्र यात्रा में शामिल हुए हैं। यात्रा के संयोजक संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने कहा कि पूरे देश में तिरंगा यात्रा चल रही है अयोध्या में भी ऐसे महान क्रांतिकारी संत हुए हैं जिन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उसकी स्मृति युवाओं में जागृत करने के लिए हनुमानगढ़ी से नयाघाट तक तिरंगा यात्रा निकाली गई है तिरंगा यात्रा में पूज्य संत समाज के लोग स्थानीय निवासी और गृहस्थ बंधु शामिल हुए।
गद्दीनशीन के शिष्य हनुमत सस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डा महेश दास ने कहा कि तिरंगा यात्रा में जिस प्रकार से अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है उसमें साधु संत भी बढ़-चढ़कर भूमिका निभा रहे हैं हमारे संत महंत राष्ट्र को संदेश देने का काम कर रहे हैं कि हम लोग राष्ट्र प्रेम से प्रेरित होकर राष्ट्र के प्रति समर्पित हैं उसी समर्पण को व्यक्त करने के लिए 2 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है जिसमें दो हजार राष्ट्रभक्त भाग ले रहे हैं संत समाज पूरे राष्ट्र को संदेश देने का काम कर रहे हैं संत भी राष्ट्र के प्रति कटिबद्ध है। हरिद्धारी पट्टी के महंत मुरलीदास महाराज ने कहा कि राष्ट्रध्वज हमारी आन बान शान है हमारा तिरंगा शान से लहराता रहे इसीलिए आज साधु संत महात्मा इस यात्रा को प्रतिबद्ध होकर कार्य करें हम अपने तिरंगे को आन बान शान के प्रतीक तौर पर मानते हैं और उसको अमृत्व प्रदान करना ही अमृत महोत्सव है। इस मौके पर मुख्य रूप से महंत मुरली दास, महंत माधव दास, महंत सुरेंद्र दास, महंत रामशंकर दास, महंत सरोज दास, गद्दी नशीन के शिष्य डॉ महेश दास, महंत जनार्दन दास, महंत मनीष दास, महंत दिलीप दास, महंत इंद्रदेव दास, बाल योगी महंत रामदास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, राजेश पहलवान,अभिषेक दास, कृष्ण कांत दास, अंकित दास, शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
: राम नगरी में साधु संतों ने निकाली तिरंगा यात्रा
Sun, Aug 14, 2022
कहा सनातन संस्कृति और देश की रक्षा के लिए संत समाज की अहम भूमिका
माता की जय वंदे मातरम जय हिंद के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हुई रामनगरी
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्म स्थली अयोध्या 13 अगस्त को सुबह से ही भारत माता की जय वंदे मातरम जय हिंद के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठी। यह मौका था आजादी के अमृत महोत्सव का जब देश को आजाद हुए 75 वर्ष पूरे होने वाले हैं और कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आवाहन किया था कि 13 तारीख से 15 तारीख शाम 5 बजे तक हर देशवासी अपने घर पर तिरंगा लगाए। इसी की अलख जगाने के लिए अयोध्या की सड़कों पर सुबह हजारों की संख्या में गलियों से संत निकले और पूरी राम नगरी वंदे मातरम से गुंजायमान होगी। राम की पैड़ी से लगभग 9 बजे अयोध्या के सिद्ध पीठ श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास मां सरयू के पावन तट पर स्थित आचार्य पीठ लक्ष्मण किला के पीठाधीश्वर मैथिली रमण शरण, जगतगुरु रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य, जगतगुरु रत्नेश प्रपन्नाचार्य, मंगल पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास महाराज,हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदनी शरण, महंत वैदेही बल्लभ शरण, डांडिया मंदिर महंत गिरीश दास, तुलसीदास छावनी महंत जनार्दन दास, राम महल वैदेही के महंत रामजी शरण, पत्थर मंदिर के महंत मनीष दास, रामकचेहरी मंदिर के महंत शशिकांत दास,ज्योतिष शास्त्री महंत अंगद दास,महंत उद्धव शरण, श्री राम आश्रम के महंत जयराम दास, राघवेंद्र भवन के महंत शिवराम दास, महंत गणेशानंद दास महंत राम मिलन दास, मधु करिया संत एमबी दास,महापौर ऋषिकेश उपाध्याय,भाजपा महानगर महामंत्री परमानंद मिश्र, महापौर मीडिया प्रभारी आशीष मिश्र सहित शिवदयाल सरस्वती विद्या मंदिर व गुरु वशिष्ठ गुरुकुल विद्यापीठ के बच्चों सहित हजारों की संख्या में संत महंत एवं गृह हाथों में तिरंगा लेकर के 3 किलोमीटर टेढ़ी बाजार तक तिरंगा यात्रा निकाली और लोगों को जागरूक किया।
राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि न भूखा रहेगा न नंगा रहेगा बता दो सभी न दंगा रहेगा, हमे बंट दे सभी ऐसे झंडे झुका दो अब हमारे सिरों पर तिरंगा रहेगा। पूरे देश में तिरंगा यात्रा चल रही है अयोध्या में भी ऐसे महान क्रांतिकारी संत हुए हैं जिन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उसकी स्मृति युवाओं में जागृत करने के लिए नया घाट से टेढ़ी बाजार तक तिरंगा यात्रा निकाली गई है तिरंगा यात्रा में पूज्य संत समाज के लोग गुरुकुल और विद्यालयों के बच्चे स्थानीय निवासी और ग्रस्थ बंधु शामिल हैं।
जगतगुरु रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य ने कहा कि देश के युवाओं में भक्ति के साथ राष्ट्रभक्ति भी रहे राम मंदिर निर्माण के साथ राष्ट्रीय भक्ति के प्रति युवाओं से लेकर हर वर्ग के लोग प्रेरित हुए हैं जो आज देखने को मिल रहा है अयोध्या से निकली है तिरंगा यात्रा देश नहीं पूरे विश्व के लिए संदेश है विश्व की आदि नगरी अयोध्या रही है अयोध्या से विश्व के लिए संदेश जाता रहा है उसी संदेश को देने के लिए अयोध्यावासी साधु संत और व्रद्ध समाज के लोग और नन्हे मुन्ने छात्र यात्रा में शामिल हुए हैं।
जगतगुरु रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि तिरंगा यात्रा में जिस प्रकार से अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है उसमें साधु संत भी बढ़-चढ़कर भूमिका निभा रहे हैं हमारे संत महंत राष्ट्र को संदेश देने का काम कर रहे हैं कि हम लोग राष्ट्र प्रेम से प्रेरित होकर राष्ट्र के प्रति समर्पित हैं उसी समर्पण को व्यक्त करने के लिए 2 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है जिसमें दो हजार राष्ट्रभक्त भाग ले रहे हैं संत समाज पूरे राष्ट्र को संदेश देने का काम कर रहे हैं संत भी राष्ट्र के प्रति कटिबद्ध है।
मंगल पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास महाराज ने कहा कि राष्ट्रध्वज हमारी आन बान शान है हमारा तिरंगा शान से लहराता रहे इसीलिए आज साधु संत महात्मा इस यात्रा को प्रतिबद्ध होकर कार्य करें हम अपने तिरंगे को आन बान शान के प्रतीक तौर पर मानते हैं और उसको अमृत्व प्रदान करना ही अमृत महोत्सव है।
: वाल्मीकीय रामायण सृष्टि का प्रथम महाकाव्य: रामानुजाचार्य
Sun, Aug 14, 2022
रामलला सदन देवस्थान मंदिर में श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण महोत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ
भगवान राम व उनके भाइयों का गुरु वशिष्ठ ने किया था नामकरण संस्कार वही स्थान है रामलला सदन देवस्थान
अयोध्या। वाल्मीकीय रामायण सृष्टि का प्रथम महाकाव्य है। राम केवल व्यक्ति की संज्ञा नही अपितु एक जीवन-पद्धति की संज्ञा है।महर्षि वाल्मीकि ने राम के चरित्र को मानवीयता के धरातल पर चित्रित किया है।वाल्मीकीय रामायण का प्राण जानकी का चरित्र है। उक्त बातें रामलला सदन देवस्थान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने रामलला सदन देवस्थान में श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण कथा महोत्सव के प्रथम दिवस में कथा शुभारंभ के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि जानकी जी की वेदना को महर्षि वाल्मीकि ने अभिव्यक्ति दी है।वेदना के विना हम मानव कहलाने के अधिकारी नहीं हैं।श्रीजानकी का चरित्र करूणा का चरित्र है।श्रीजानकी चरित्र श्रवण का फल यह है कि हृदय में करूणा का अवतरण हो जाये। जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि तब तक रामायण की रचना नहीं कर पाये जब तक श्रीजानकी वाल्मीकि के आश्रम पर नहीं गयी।काव्य विना पीड़ा के प्रकट नहीं होता।महर्षि वाल्मीकि के हृदय में इतनी करुणा का उदय हुआ कि एक बहेलिये के बाण से मरे क्रौंच पक्षी को देखकर उनका हृदय रो उठा और सहसा एक शोक प्रकट हुआ जो श्लोक बन गया।दुनिया की पहली कविता वाल्मीकि की पीड़ा से प्रकट हुयी।पर इतनी पीड़ा करूणामयी जानकी के चरित्र को लिखने में समर्थ नहीं हो पायी।अत: श्रीराम ने जानकी को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पर भेजा।जब महर्षि वाल्मीकि ने श्रीसीता की पीड़ा देखी तो हृदय में इतनी करूणा आयी कि वो रामायण लिखने में समर्थ हो गये। रामानुजाचार्य जी ने व्यास से श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण की कथा को समझाते हुए कहा कि प्रश्न है कि श्रेष्ठ चरित्र किसका है?या श्रेष्ठजन किसके चरित्र का गान करते हैं?यह हमारे और आपके मन में उठने वाला ही प्रश्न नहीं है महर्षि वाल्मीकि से लेकर गोस्वामी श्रीतुलसीदास जी तक सबके मन में यही प्रश्न था।इसका उत्तर आप ढूँढने चलेंगे तो सबसे पहले जो बात आपके मन में आयेगी वो ये कि किसी के चरित्र को श्रेष्ठ माना जाय इसकी कसौटी क्या है?श्रीराम के अवतार से पहले शास्त्रों ने श्रेष्ठ चरित्र किसका माना जाय इसकी बहुत सी कसौटियाँ रखी हैं। उन्होंने कहा कि चरित्र का बल व्यक्ति को प्रभावी बनाता है।संसार में बहुत सारे लोग शरीर और स्वभाव से सौन्दर्यवान् होते हैं लेकिन चरित्र से दुर्बल होते हैं।चरित्र की कमज़ोरी सौन्दर्य के सारे गौरव को नष्ट कर देती है।श्रीराम का चरित्रबल ही उन्हें समस्त सृष्टि-जीवन में विशिष्ट बनाता है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान राम श्रृंगार पाण्डेय व उर्मिला पाण्डेय ने किया। कथा में राघवेंद्र मिश्रा अप्पू,मनोज जी, अवधेश शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।