: लता मंगेशकर के नाम से बन रहे चौराहे का संतों ने जताया विरोध
Thu, Aug 18, 2022
सीएम योगी के योजना के विरोध में संतों हुई बैठक,संतों का आरोप मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे अधिकारी
पीएम मोदी व सीएम योगी को पत्र भेज कर देंगे जानकारी
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के मुख्य प्रवेश मार्ग नया घाट चौराहे को लता मंगेशकर के नाम से बनाए जाने की योजना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा स्वीकृति दिए जाने के बाद कार्य शुरू होते ही अयोध्या कि साधु-संतों योजना का विरोध कर रहे हैं। संतों की माने तो अयोध्या सनातन नगरी है। इसलिए नया घाट चौराहे को जगद्गुरु रामानंदाचार्य के नाम से बनाया जाए। वहीं सन्तो ने इस योजना का विरोध करते हुए बोर्ड न लगाने व उद्घाटन नही होने देने की भी चेतावनी दे दी है।
अयोध्या भव्य मंदिर निर्माण चल रहा है और केंद्र व राज्य सरकार के करोड़ों की योजनाओं से अयोध्या सजाई व सवारी जा रही है इसी क्रम में भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर के नाम से नया घाट चौराहे का नामकरण कर 40 फीट ऊंची वीणा लगाने का कार्य विकास प्राधिकरण कर रहा है।जिसका दीपोत्सव में उद्घाटन भी होना है। इसी के विरोध में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज के मंदिर मणिराम दास छावनी में संतों की बैठक हुई जिसमें एक स्वर से अयोध्या के सभी संतो महंतों लता मंगेशकर चौराहे का विरोध किया और जगद्गुरु रामानंदाचार्य भगवान के नाम से चौराहे का नामकरण कर मूर्ति लगाई जाए और राम जन्मभूमि तक जाने वाले मार्ग को उन्हीं के नाम से किया जाए ऐसा प्रस्ताव रखा और कहा की लिखित रूप में यूपी के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को प्रार्थना पत्र भी सौंपेंगे और 2 दिन के अंदर योगी आदित्यनाथ से मिलकर चौराहे का नाम जगद्गुरु रामानंदाचार्य भगवान के नाम पर करने का प्रस्ताव देंगे।
मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा कि अयोध्या का प्रवेश द्वार नया घाट है और जो भी व्यक्ति अयोध्या आता है वहां निश्चित जाता इसलिए उसका नाम जगतगुरु रामानंदाचार्य भगवान के नाम पर ही रखा जाये दूसरा नाम स्वीकार नहीं। श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास महाराज ने कहा कि अगर सरकार ना बनवाना चाहे तो संत अपने पैसे से चौराहे का निर्माण करेंगे और जगतगुरु रामानंदाचार्य भगवान के नाम से सत्संग भवन भी बनाएंगे। डॉ रामानंद दास महाराज ने कहा कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य भगवान स्वयं राम जी के अवतार थे और अयोध्या रामानंदी संतो की है इसलिए अयोध्या और किसी को स्वीकार नहीं करेगी। तेरा
भाई त्यागी खाक चौक के श्री महंत बृजमोहन दास महाराज ने कहा कि रामानंद भगवान की मूर्ति संतो के आदेशानुसार मैं बनवाकर दूंगा।
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री को संतो की बात को सुनना होगा और रामानंद भगवान के नाम से चौराहे का उद्घाटन होगा। मंगल पीठाधीश्वर कृपालु राम भूषण दास महाराज ने कहा कि स्वर कोकिला लता मंगेशकर की मूर्ति अयोध्या में कहीं भी लगाई जा सकती है लेकिन सरयू तट के मुहाने पर भगवान रामानंद भगवान की मूर्ति और चौराहा ही स्वीकार है। राम महल वैदेही भवन के महंत रामजीशरण ने कहा कि नयाघाट अयोध्या जी का मुख्य मार्ग है। मां सरयू जाने वाले इसी रास्ते से जाते है और कोई भक्त जब अयोध्या आता है तो इसी रास्ते से आता है। जगद्गुरू रामानन्दाचार्य भगवान का प्रतिमा वचौराहे पर लगना चाहिए और उनके नाम से चौराहे को सजाना चाहिए।सरकार को इस बात की गम्भीरता समझनी होगी। अधिकारी योगी जी को गुमराह कर रहे है।करतलिया बाबा आश्रम के महंत बाल योगी रामदास ने कहा कि सरकार को अपने प्रस्ताव को बदलकर संतो की बात मानते हुए नया घाट चौराहे का नामकरण रामानंद भगवान के नाम से कर देना चाहिए। इस अवसर पर महंत बलराम दास हनुमानगढ़ी, महामंडलेश्वर गिरीश दास महामंडलेश्वर अवधेशानंद महाराज अधिकारी छविराम दास महंत कमला दास रामायणी महंत अंजनी शरण महंत राम जी शरण सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
: भगवान का भजन ही एक माध्यम है जीव के कल्याण का: महंत गणेश दास
Thu, Aug 18, 2022
काठिया मंदिर के ठाकुर जी के पाटोत्सव पर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का हुआ शुभारंभ
अयोध्या। भव्य और दिव्य कलश यात्रा के साथ काठिया मंदिर के ठाकुर जी के पाटोत्सव के अवसर पर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का हुआ शुभारंभ। 17 अगस्त से महंत गणेश दास जी महाराज द्वारा प्रातः 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रथम सत्र की कथा प्रारंभ हुई और द्वितीय सत्र की कथा सायं 4 बजे से 7 बजे तक 24 अगस्त तक प्रतिदिन चलेगी।
प्रथम दिन के प्रथम सत्र की कथा में व्यासपीठ से महंत गणेश दास महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा महात्मा की कथा को विस्तार से सुनाया। उन्होंने गोकर्ण उपाख्यान के माध्यम से जिओ के वास्तविक स्वरूप का बोध कराया। संसार के प्रपंच में ना पढ़कर नित्य निरंतर भगवान का भजन करते रहना चाहिए जिससे लोगो का कल्याण होता है और भगवान का भजन ही एक माध्यम है जिससे जीव का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम संकीर्तन ही कलिकाल में जीव को सद् गति प्रदान करने वाला है। इस अवसर पर ब्रह्म पीठाधीश्वर राम रतन देवाचार्य महाराज, सीताराम दास सूरदास सहित अन्यान संत महंत एवं भक्तगण श्रीमद् भागवत कथा श्रवण के लिए पधारे।
: राम देश की एकता के प्रतीक हैं: राघवाचार्य
Thu, Aug 18, 2022
कहा, जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित
अयोध्या। श्रीरामलला सदन देवस्थान ट्रस्ट रामकोट अयोध्या में चल रही श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा के पंचम दिवस जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं।
वे सामाजिक हैं, लोकतांत्रिक हैं। वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं पर हित सरिस धरम नहीं भाई। राम देश की एकता के प्रतीक हैं। जगद्गुरू जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम समसामयिक है।भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे श्रीराम की महिमा अपरंपार है। जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित है। जिसके पास जितने श्रेष्ठ एवं पारमार्थिक विचार हैं वह उतना ही सम्पन्न प्राणी है। आज समाज में अशांति कोई पशु या जानवर नहीं फैला रहा, बल्कि अपने स्वरूप से अनभिज्ञ भौतिक पदार्थ की दौड़ में लगा मनुष्य ही फैला रहा है। दूसरों को शांत करने से पहले खुद शांत होना होगा। शांति व आनंद का स्रोत केवल ईश्वर है जो भक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
मनुष्य के अन्तःकरण में जो गुणों के बीज हैं, वे सत्संग और कुसंग के कारण अंकुरित होते हैं। अगर कुसंग के जल की वर्षा हो जाय तो अन्तःकरण में छिपे हुए दुर्गुण सामने आ जाते हैं। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि व्यक्ति को कुसंग से बचना चाहिए, इसका तात्पर्य यह है कि अगर वर्षा ही नहीं होगी तो अंकुर भीतर से कैसे फूटेगा। अतएव यदि हम उन सहयोगियों के, जो हमारे दुर्गुणों को, हमारी दुर्बलताओं को बढ़ा दिया करते हैं, सन्निकट नहीं जावेंगे तो भले ही हमारे जीवन में दुर्गुणों के संस्कार विद्यमान हों, वे उभर नहीं पावेंगे। मानवीय जीवन के सद्गुणों के अंकुरित होने के लिए जिस जल की अपेक्षा है, वह है सत्संग का जल। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान ने किया।इस मौके पर विनोद कुमार मिश्र, मनोज कुमार तिवारी,राघवेंद्र मिश्र अप्पू, दया शंकर शुक्ल, रमेश मिश्र शिब्बू सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।