: रामकोट में बंदिशों से आहत है संत धर्माचार्य
Tue, Oct 11, 2022
चेंकिग बैरियर पर बिना वजह रोकटोक उचित नहीं: महंत माधव दास
अयोध्या धाम के जनप्रतिनिधि गैरजिम्मेदार, जनता के सुखदुख से नही है सरोकार
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में भगवान रामलला का दिव्य भव्य मंदिर बनने से पूरी अयोध्या समेत पूरा देश आनंदित है।तो वही रामजन्मभूमि से सटे रामकोट मोहल्ला निवासियों की परेशानी खत्म होने का नाम ही नही ले रही है। रामकोट की समस्या अब और विकराल रुप ले ली है। मोहल्ले में प्रवेश के सारे मार्गों पर चेकिंग बैरियर पर हमेशा स्थानीय निवासियों व पुलिस से टकराव की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय निवासी के यहां गाड़ी आती है तो चेकिंग के नाम पर पुलिस वाले उन गाड़ियों को रोक देते हैं जिससे काफी जद्दोजहद करना पड़ता है या फिर उच्चाधिकारी को फोन करे तब वह गाड़ियां एंट्री होती है। इससे उनकी समस्या और भी विकराल रूप ले चुकी है। इससे संत, महंत भी आहत हैं। निर्वाणी अनी अखाड़ा के पूर्व प्रधानमंत्री हनुमानगढ़ी के महंत महंत माधव दास व्यथित होकर कहते हैं कि अयोध्या धाम के जनप्रतिनिधि बिल्कुल गैर जिम्मेदार हैं वह केवल वोट के नाम पर मिलते हैं जन समस्या से उनका कोई सरोकार नहीं है। हम लोग कितना परेशान होते हैं हमारे गायों के लिए भूसा आदि यह हमारे स्थान पर कोई संत व शिष्य परिकर आते हैं तो उनको नहीं आने दिया जाता है चेकिंग बैरियर पर ही गाड़ियां रोक ली जाती हैं यह कहां का न्याय है। हम लोग एक बैठक करके बहुत जल्द जिला प्रशासन से मिलकर अपनी बात रखेंगे।
: श्रीराममंत्र महायज्ञ का उल्लास अपने चरम पर
Tue, Oct 11, 2022
रामकथा के मंच पर श्रीहर्षण सौरभ ग्रंथ का विमोचन द्वाराचार्य स्वामी राजेन्द्र देवाचार्य सहित संतो ने किया
रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य के सानिध्य में महोत्सव में उमड़ा भक्तो का भारी हुजूम
स्वामी रामहर्षण के शिष्यों से पटी रामनगरी, सिया बाेल की गूंज से गुंजायमान है अयोध्या
अयाेध्या। श्रीरामहर्षण मैथिल सख्यपीठ धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट चारूशिला मंदिर, जानकीघाट में चल रहे दस दिवसीय श्रीराममंत्र महायज्ञ का उल्लास अपने चरम पर है। महोत्सव में भक्तों का भारी हुजूम उमड़ा है। श्रीरामहर्षण मैथिल सख्यपीठ चारूशिला मंदिर के श्रीमज्जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज ने कहा कि दस दिवसीय श्रीराममंत्र महायज्ञ का कार्यक्रम चल रहा है। पूरी अयाेध्यानगरी सिया बाेल की गूंज से गुंजायमान है। 108 कुंडीय यज्ञ मंडप में सौकड़ों वैदिक आचार्य के द्धारा निर्देशन में आहुति पड़ रही है। तो वही दूसरे सत्र में व्यासपीठ से श्रीरामकथा की अमृत वर्षा वृंदावन धाम के श्रीमद् जगद्गुरू द्वाराचार्य मलूकपीठाधीश्वर डॉ. राजेंद्रदेवाचार्य कर रहे है। व्यासपीठ से कथा का महत्व समझाते हुए मलूकपीठाधीश्वर डॉ. राजेंद्रदेवाचार्य जी ने कहा कि राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं।
वे सामाजिक हैं, लोकतांत्रिक हैं। वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं पर हित सरिस धरम नहीं भाई। राम देश की एकता के प्रतीक हैं। मलूक पीठाधीश्वर जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम समसामयिक है।भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे श्रीराम की महिमा अपरंपार है। जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित है। जिसके पास जितने श्रेष्ठ एवं पारमार्थिक विचार हैं वह उतना ही सम्पन्न प्राणी है। आज समाज में अशांति कोई पशु या जानवर नहीं फैला रहा, बल्कि अपने स्वरूप से अनभिज्ञ भौतिक पदार्थ की दौड़ में लगा मनुष्य ही फैला रहा है। दूसरों को शांत करने से पहले खुद शांत होना होगा। शांति व आनंद का स्रोत केवल ईश्वर है जो भक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
मनुष्य के अन्तःकरण में जो गुणों के बीज हैं, वे सत्संग और कुसंग के कारण अंकुरित होते हैं। अगर कुसंग के जल की वर्षा हो जाय तो अन्तःकरण में छिपे हुए दुर्गुण सामने आ जाते हैं। उन्होंने ने कहा कि व्यक्ति को कुसंग से बचना चाहिए, इसका तात्पर्य यह है कि अगर वर्षा ही नहीं होगी तो अंकुर भीतर से कैसे फूटेगा। अतएव यदि हम उन सहयोगियों के, जो हमारे दुर्गुणों को, हमारी दुर्बलताओं को बढ़ा दिया करते हैं, सन्निकट नहीं जावेंगे तो भले ही हमारे जीवन में दुर्गुणों के संस्कार विद्यमान हों, वे उभर नहीं पावेंगे।रामकथा के मंच पर श्रीहर्षण सौरभ ग्रंथ का विमोचन द्वाराचार्य स्वामी राजेन्द्र देवाचार्य सहित संतो ने किया।
इस ग्रंथ का लेखन पूर्व कुलपति प्रो. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी ने किया है। अ.भा. संत समिति के अध्यक्ष अविचल दास महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेन्द्र महाराज ने भी अपने विचारों से लोगों को अवगत कराया। जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य महाराज ने कहा कि आचार्यों के बताए मार्ग का अनुसरण श्रेयस्कर है।कथा में कार्यक्रम के संयोजक श्रीरामहर्षण मैथिल सख्यपीठ चारूशिला मंदिर के श्रीमज्जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज, जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य, महंत रामशरण दास, डा रामानन्द दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण, महंत सुरेश दास, महंत अवधेश दास, महंत कृपालु रामभूषण दास,महंत रामजीशरण सहित हजारों की संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: पंचरसाचार्य की रजत जयंती समारोह का हुआ भव्य शुभारंभ
Tue, Oct 11, 2022
भगवान इन्द्रदेव भी न रोक पाये स्वामी रामहर्षण दास के समर्पित शिष्यों की आस्था को
भारी बारिश के बीच हजारों महिलाएं सिर पर कलश धारक कर निकली यात्रा में
अयोध्या।पंचरसाचार्य स्वामी रामहर्षण दास महाराज की ओर से संस्थापित मंत्रार्थ मंडपम् में शुरु हुए श्रीरामनाम षडाक्षर मंत्रराज जप अनुष्ठान के रजत जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 51 कुण्डीय श्रीरामनाम महायज्ञ के दूसरे दिन यज्ञकुंड में अरणि मंथन द्वारा अग्नि देव का प्राकट्य हुआ और आहूतियां डाली जाने लगीं।
इसके पहले भारी बारिश के बीच हाथी-घोड़ा व बैंडबाजा के साथ कलशयात्रा निकाली गयी। रामहर्षण कुंज के महंत अयोध्या दास ने बताया कि 11 अक्तूबर से प्रसिद्ध कथावाचक पं. श्यामसुंदर पाराशर श्रीमद्भागवत कथा सुनाएंगे। कार्यक्रम की व्यवस्था में संत राघवदास जी लगे रहें।