: रंग महल का ऐतिहासिक राम विवाह महोत्सव होगा आकर्षण का केंद्र
Tue, Dec 3, 2024
रंग महल का ऐतिहासिक राम विवाह महोत्सव होगा आकर्षण का केंद्रराम विवाहोत्सव में राजसी वैभव के साथ निकलेगी रंग महल से भगवान राम की भव्य बारातअयोध्या। रामनगरी के रामकोट मोहल्ले में राम जन्म भूमि के निकट भव्य रंग महल मन्दिर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि जब सीता माँ विवाहोपरांत अयोध्या की धरती पर आयीं। तब कौशल्या माँ को सीता माँ का स्वरुप इतना अच्छा लगा कि उन्होंने रंग महल सीता जी को मुँह दिखाई में दिया था। यह रस्म बसन्त ऋतु में हुआ था। इस कारण कौशल्याजी ने इसका नाम रंग महल रख दिया था। यहां सावन झूला, सीताराम विवाह, रामनवमी, बसन्त पंचमी तथा जानकी नवमी विशेष रुप से मनाया जाता है। यहां मा सीता की उपासना होती है। जिस तरह मिथिला में मा सीता की पूजा होती है वैसे ही यहां भी की जाती है। विवाह के बाद भगवान श्री राम कुछ 4 महीने इसी स्थान पर रहे। और यहाँ सब लोगों ने मिलकर होली खेली थी। तभी से इस स्थान का नाम रंगमहल हुआ। इस मन्दिर में आज भी होली का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया जाता है। फाल्गुन माह में यहाँ होली खेलने का विशेष इंतजाम होता है। यहाँ चारों अखाड़े के नागा साधू होली खेलने आते हैं। पंचमी को यहाँ सीता राम विवाह मनाया जाता है। विवाह समारोह से पहले भव्य राम बारात निकलती है जिसमें हांथी, घोड़े, रथ समेत हजारों भक्त बारात में नाचते गाते शामिल होते है। सीता राम के विवाह के समय द्वारचार, कन्यादान, भांवर, कलेवा आदि अनुष्ठान विधिवत होते हैं। सम्पूर्ण विवाह मैथली शैली में आयोजित होते हैं।रामनगरी में रामविवाहोत्सव के अवसर पर राजसी वैभव के साथ भगवान राम की बारात निकलती है। श्री सीताराम विवाह शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। बारात में दूल्हे के भेष में भगवान राम का दर्शन करने के लिए भक्तों का समूह उमड़ पड़ता है। भजनों व गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बनता है। दिव्य अलौकिक रथ पर सवार भगवान की राम की एक छलक पाने के लिए भक्त व्याकुल हो जाते हैं।बारात निकले के पूर्व भगवान के विग्रह व प्रतिरुपों का पूजन व आरती किया जाता है। तत्पश्चात वैदिक मंत्रोचार के साथ श्री सीताराम को रथ पर बैठाकर बैंड बाजे के साथ बारात निकाला जाता है। वैसे तो अयोध्या के खास मंदिरो में रामविवाह का उत्सव मनाया जाता है जैसे रंग महल मंदिर, चक्रवती महाराज दशरथ जी का राजमहल, कनक भवन, हनुमान बाग, लक्ष्मण किला, रामहर्षण कुंज, जानकी महल ट्रस्ट ,विहउती भवन, दिव्यकला मंदिर, सहित अयोध्या के कई मंदिरों से बारात निकलती है। लेकिन अयोध्या के रामकोट मुहल्ले में स्थित प्राचीन रंगमहल मंदिर में श्री सीताराम विवाह की धूम चार दिनों से चलती रहती है। मंदिर में श्री राम विवाह महोत्सव को देखने के लिए पूरे भारत से संत साधक आकर उत्सव का आनन्द लेते हैं। जगह जगह बारात का स्वागत कई जगहों पर आरती पूजन होता है। बारात लौटने के बाद देर रात तक भगवान सीताराम के विवाह पूरे वैदिक रीतिरिवाज के साथ का आयोजन किया जाता है। विवाह के दूसरे दिन कलेवा होता जिसमें भगवान को पकवान बनाकर भोग लगाया जाता है और लोगों में प्रसाद वितरण किया जाता है।रंगमहल के वर्तमान पीठाधीश्वर श्री महंत रामशरण दास जी ने बताया कि रंगमहल मां कौशल्या ने विदेहनंदिनी भगवती सीता को मुंह दिखाई में दी थी। ऐसे में इस स्थल पर रामवविवाह को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती। महंत जी ने बताया कि हमारे यहां का विवाह मंडप 300 साल पुराना है। आश्रम में संचालित रामलीला मुनि आगमन, ताड़का, मारीच-सुबाहु बध, नगर दर्शन, धनुषयज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद से होती हुई रामविवाह के प्रसंग को जीवंत करेगी। हालांकि उत्सव का शिखर रामबरात के साथ परिभाषित होगा। इस दौरान संगीत, सत्संग की भी सरिता प्रवाहित हो रही है, जिसमें हजारों की संख्या में संत एवं श्रद्धालु शिरकत कर रहे हैं।विवाह उत्सव 3 दिसंबर से प्रारंभ होकर के 6 दिसंबर तक चलेगा। विवाह की तैयारी के लिए आश्रम से जुड़े श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। इस महोत्सव की देखरेख व व्यवस्था में पुजारी साकेत जी व राहुल जी लगे हुए है।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए श्रीलालसाहेब दरबार के पूर्वाचार्यों
Sat, Nov 30, 2024
शिद्दत से शिरोधार्य हुए श्रीलालसाहेब दरबार के पूर्वाचार्योंपूर्वाचार्य हम लोगों के बीच नही हैं, लेकिन उनकी यश-कीर्ति हमेशा हम सबके साथ रहेगी: श्रीमहंत रामनरेश दासअयोध्या। रामनगरी के कनक भवन प्रांगण में स्थित सिद्धपीठ श्रीलालसाहेब दरबार के पूर्वाचार्यों महंत जानकी जीवन शरण की 26वीं, महंत रामकृपाल शरण की 22वीं एवं महंत जानकी शरण महाराज की 5वीं पुण्यतिथि पर संतों ने नमन किया। मंगलवार को मठ में पूर्व आचार्यों की पुण्यतिथि निष्ठापूर्वक मनाई गई। श्रद्धांजलि सभा में रामनगरी समेत अन्य प्रांतों से पधारे हुए संत-महंतों ने साकेतवासी महंतों की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर शिद्दत से याद किया। संतों ने उनके कृतित्व- व्यक्तित्व का बखान भी किया। श्रीलालसाहेब दरबार के वर्तमान पीठाधीश्वर श्रीमहंत रामनरेश दास महाराज ने कहा कि मठ में पूर्वाचार्यों की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। पूर्वाचार्यों ने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। जीवन भर मंदिर की उत्तरोत्तर समृद्धि में लगे रहे। उन्हीं की देन है कि आज आश्रम की गणना अयोध्यानगरी के प्रमुखतम पीठों में होती है। जहां भगवान की सेवा संग गौ, संत, विद्यार्थी, अतिथि सेवा सुचार रूप से चल रही है। सभी उत्सव, समैया और त्योहार परंपरागत रूप से मनाया जा रहा है। पूर्वाचार्य हम लोगों के बीच नही हैं। लेकिन उनकी यश-कीर्ति हमेशा हम सबके साथ रहेगी। भिवानी से पधारे महंत रामाश्रय शरण, लालसाहेब दरबार पीठाधिपति महंत रामनरेश शरण व तपोवन मंदिर रांची झारखंड के महंत ओमप्रकाश शरण द्वारा आए हुए संत महंतों का स्वागत-सत्कार किया गया। काफी संख्या में संत-महंत, भक्तजनों ने प्रसाद ग्रहण किया। पुण्यतिथि पर मणिरामदास दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, वेदमंदिर के श्रीमहंत रामनरेश दास, महंत रामाश्रय शरण भिवानी, तपोवन मंदिर रांची झारखंड के महंत ओमप्रकाश शरण, श्रीमहंत धर्मदास हनुमानगढ़ी, महंत रामकरन दास, महंत रामलोचन शरण, महंत रामकुमार दास, महंत उद्धव शरण, महंत उत्तम दास, आचार्य लक्ष्मण शास्त्री, महंत अवधकिशोर शरण, महंत रामप्रिया शरण, महंत राजीवलोचन शरण, महंत रामनारायण दास, पूर्व पार्षद पुजारी रमेश दास, महंत रामगोविंद शरण, सुमित शरण, व्यास श्याम दास, संतदास, प्रियेश दास आदि संत- महंत, भक्तजन मौजूद रहे।
: मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम प्रभु के सभी जीवन चरित्र प्रेरणास्पद:महंत सुदर्शन दास
Fri, Nov 29, 2024
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम प्रभु के सभी जीवन चरित्र प्रेरणास्पद:महंत सुदर्शन दाससिद्धपीठ श्रीकरूणानिधान भवन में श्रीसीताराम विवाहोत्सव का हुआ शुभारंभअयोध्या। भगवान श्रीसीताराम विवाहोत्सव के पावन अवसर पर गुरुवार को सिद्धपीठ श्रीकरूणानिधान भवन रामकोट में नव दिवसीय श्रीरामकथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा महोत्सव को श्रीकरूणानिधान भवन के वर्तमान पीठाधीश्वर श्रीमहंत रामजी दास महाराज सानिध्यता प्रदान कर रहे हैं। व्यासपीठ पर विराजमान वृंदावन धाम से पधारे प्रख्यात कथाव्यास महंत सुदर्शन दास महाराज ने श्रीरामकथा के प्रथम दिवस भक्तजनों को रसास्वादन कराते हुए कहा कि हम सभी जीव प्रभु के अंश एवं प्रभु ही हमारे अंशी हैं। जीवन में बिना प्रभु भक्ति कुछ भी संभव नहीं है। अतः हमें निरंतर प्रभु के स्मरण चिंतन भजन में लगे रहना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि 5 सौ वर्षों बाद प्रभु श्रीरामलला अपने निज मंदिर में विराजमान हो गए हैं। यह बड़ा ही सौभाग्य है। हम प्रभु श्रीराम का दर्शन उनके निज मंदिर में कर रहे हैं। सभी मनुष्यों को मानवता की शिक्षा देने के लिए प्रभु मनुष्य रूप में सप्त पुरियो में प्रतिष्ठित श्रीअवधपुरी में पधारते हैं। भगवान श्रीराम के जीवन चरित्रों में से एक चरित्र भी हम अपने अंदर उतार लें। तो निश्चित ही हमारे मानव जीवन में कली का प्रभाव व्याप्त नहीं होगा। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम प्रभु के सभी जीवन चरित्र प्रेरणास्पद हैं। श्री अवधपुरी में एक क्षण निवास कर लेने से करोड़ों जन्मों के हमारे पाप नष्ट होते और पुण्य उदित हो जाते हैं। इससे पहले कथा के यजमान द्वारा व्यासपीठ की भव्य आरती उतारी गई। अंत में कथा के विश्राम पर प्रसाद वितरित हुआ। इस पर करूणानिधान भवन के अधिकारी महंत रामनारायण दास महाराज समेत बड़ी संख्या में साधु-संत एवं भक्तजन अमृतमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ कर रहे थे।