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सुचना

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: बिना श्रद्धा के कोई राम कथा का आनंद नहीं ले सकता: संध्या

बमबम यादव

Wed, Jul 24, 2024

हनुमान बाग में महंत जगदीश दास महाराज के संयोजन में भव्य श्रीराम कथा का हुआ शुभारंभ

हनुमानगढ़ी से निकला शाही निशान जुलूस, हनुमान बाग में हुआ विधिवत पूजन

कार्यक्रम के संयोजक श्याम जी लाखोटिया जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों द्धारा किया गया है

अयोध्या। श्रद्धा का उदय बहुत ही बिरले लोगों के जीवन में होता है। जिनके जीवन में श्रद्धा नहीं है वह कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो राम कथा का आनंद रस ग्रहण नहीं कर सकता। उक्त बातें श्रीराम कथा में प्रख्यात कथावाचिका संध्या जी ने कही। संध्या जी के श्रीमुख से हनुमान बाग मंदिर में आज से भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का समारोह पूर्वक शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व हनुमानगढ़ी का विशेष शाही निशान जो हनुमानजी का प्रतिनिधित्व करती है,वह विशाल शाही जुलूस हनुमानगढ़ी से बैड़ बाजे के साथ निकली। जुलूस का भव्य स्वागत हनुमान बाग में हुआ। इसके बाद दूसरे सत्र में श्रीराम कथा की रसमयी वर्षा हुई।
व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए संध्या जी ने कहा कि सतीजी दक्ष पुत्री हैं। वे भगवान शिव से विवाह होने पर भी रामकथा का आनंद नहीं ले पाती हैं। उन्होंने सुना ही नहीं क्योंकि उनके हृदय में श्रद्धा वृत्ति की जगह संशय या भ्रम था। सती जब अगले जन्म में राजा हिमांचल के घर में जन्म लेती हैं तो दीर्घकाल की तपस्या के पश्चात भगवान शिव को पुन: पति के रूप में प्राप्त करती हैं। तब रामकथा की जो अद्भुत रसधारा संसार के समक्ष बहती है, उससे भगवती उमा स्वयं धन्य हुईं संसार के जीव आज भी धन्य हो रहे हैं।
संध्या जी ने कहा कि परमार्थ की प्राप्ति के लिए सनातन धर्म में अनगिनत मार्ग हैं पर प्रमुख रूप से मानस में ज्ञान भक्ति और कर्म की चर्चा की गई है। सभी मार्गों में श्रद्धा की आवश्यकता है। ज्ञान मार्ग की साधना उत्तर कांड में की गई है। उसमें गाय को श्रद्धा का प्रतीक बताया गया है। यह महोत्सव हनुमान बाग सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के आयोजक श्याम जी लाखोटिया जालना पूना महाराष्ट्र ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत जगदीश दास जी महाराज कर रहें। कार्यक्रम में निर्वाणी अनि अखाड़ा के महासचिव महंत नंदरामदास, सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिन दास, नितेश शास्त्री आदि कर रहें।

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