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: भरत जैसा चरित्र व आचरण हमें जीवन में उतारना चाहिए : जगद्गुरू

बमबम यादव

Sat, Dec 17, 2022

भरत तपोस्थली भरतकुंड में श्री रामकथा का उल्लास चरम पर

अयोध्या। भरत तपोस्थली भरतकुंड में श्री रामकथा की अमृत वर्षा में संत साधक गोता लगा रहे है। व्यासपीठ से रामकथा की रसधार जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के श्री मुख से बह रही है। आज कथा में भरत चरित्र की कथा सुनाते हुए जगद्गुरू जी ने बताया कि भरत ने बड़े भाई भगवान श्रीराम की चरणपादुका को चौदह वर्षों तक उनकी पूजा अर्चना उनका दास बनकर अयोध्या की प्रजा की सेवा की। कथाव्यास ने बताया कि यदि हमारे समाज के लोग श्रीराम चरित मानस का अनुकरण करते हुए जीवन निर्वाह करने की कला सीख ले तो समाज की सभी प्रकार की समस्याओं का निस्तारण अपने आप हो जाएगा। कथा व्यास ने कहा कि भगवान की कथा हमारे समाज को अनुशासन और प्रेम तथा सद्भाव का संदेश देती है। जिन घरों में भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण सहित हमारे देवी देवताओं एवं महापुरुषों की कथाओं का गुणगान होता है उन परिवारों में हमेशा सुख शांति बरसती है। राम लक्ष्मण भरत शत्रु जैसे भाई से हमे सभी गुण सीखना चाहिए और जिस तरह भरत ने अपने चरित्र आचरण और सादगी के साथ राज्य चलाया और प्रजा को सब कुछ दिया उससे हमे सीख लेने की जरूरत है। कथा की अध्यक्षता दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज कर रहें है। आज की कथा में व्यासपीठ का पूजन कैसरगंज के लोकप्रिय सांसद भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह, अयोध्या के लोकप्रिय नेता पूर्व मंत्रालय तेजनारायण पाण्डेय पवन ने किया।आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन बिंदुगाद्याचार्य के उत्ताराधिकारी महंत रामभूषण दास कृपालु जी ने किया। गौरव शास्त्री व शिवेंद्र शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।

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