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: निष्काम भक्ति की पराकाष्ठा है प्रभु के प्रति केवट का प्रेम: स्वामी चिदम्बरानन्द

बमबम यादव

Sun, Jan 21, 2024

राम महल वैदेही भवन में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में राम कथा की बह रही रसधार, चहुंओर छाया रामकथा का उल्लास

अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर में भगवान रामलला का प्राण प्रतिष्ठा होने के कुछ घंटे शेष है अयोध्या के चारों तरह खुशियां बयां हो रही है। मंदिर में कथा प्रवचन चल रहा है। रामनगरी के राममहल वैदेही भवन में भव्य रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। व्यासपीठ से मुम्बई से चलकर आये सनातन धर्म प्रचारक एवं प्रखर राष्ट्रवादी चिन्तक व संस्थापक चिद्ध्यानम आश्रम व गौशाला, चिदसाधना साध्यम ट्रस्ट, मुंबई के महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज कथा कह रहें है। कथा के पंचम दिवस स्वामीजी ने कहा कि श्रीराम चरणों की कृपा पाने वाले सरल सहज भक्तों की श्रेणी में प्रभु श्री राम के अत्यंत प्रिय भक्त जिनकी भक्ति में कुछ भी पाने की कामना नहीं है ऐसे भक्त की भक्ति से ही भगवान प्रसन्न होते हैं भक्त और भगवान एक दूसरे के पूरक हैं। भक्त से ही भक्ति का प्रचार प्रसार होते आया है इसीलिए कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े यह उक्ति चरितार्थ होती है। रामकथा के पंचम दिवस राम महल वैदेही भवन में अपार जन समूह को भगवान के भक्त का जीवंत उदाहरण देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी ने भक्त और भगवान के बीच के मर्म को सुनाया।
कथा प्रसंग की विशद व्याख्या करते हुए पूज्य श्री ने केवट के पावन चरित्र को सुनाते हुए कहा कि वास्तव में सच्चा भक्त तो वही है जिसे भगवान से कुछ पाने की इच्छा न हो क्योंकि स्वार्थ सिद्ध करने के लिए की हुई भक्ति तो सौदा हो गया। निः स्वार्थ भक्ति कर भगवान को पाने का सहज साधन है ऐसे ही कुछ सत्कर्मों से पूरित केवट हुए। प्रभु श्रीसीताराम पिता के वचन को मान वनगमन करते हैं। मार्ग में चलते हुए गंगा पार उतरने के लिए केवट से नाव की याचना करते हैं। भगवान के वचन सुन केवट ने उनके मर्म को अन्तर्मन में सोच विचार कर कहा की चरणों की रज मिल जाए तो मै आपको गंगा पार उतार दूं। स्वामी जी ने राम केवट प्रसंग का बड़ा ही मार्मिक भजन सुनो रघुनाथ तुमको पार अब कैसे उतारूं मैं सुना अपार जन समूह को भावविभोर व अश्रुपूरित किया। भगवान ने केवट के प्रेम से भरे वचनों को सुन प्रसन्न हो चरण पखारने की स्वीकृति दी मानो प्रभु ने उसके सम्पूर्ण जीवन की भक्ति को धन्य कर दिया हो। बड़ी उत्सुकता से चरण रज पा कर मानो जगत की अनमोल सम्पदा पा ली हो। करकमल और चरणकमल पाने के अतिरिक्त केवट की कोई कामना नहीं रह गई।भगवान की इच्छा में ही अपना कल्याण मानकर भक्ति मार्ग पर चलने से ही भगवान प्रसन्न होकर भक्त के आधीन हो जाते हैं।

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