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: अति प्राचीन छोटी कुटिया मंदिर में किराएदार कर रखें है जबरिया कब्जा

बमबम यादव

Thu, Jul 31, 2025

अति प्राचीन छोटी कुटिया मंदिर में किराएदार कर रखें है जबरिया कब्जा

जर्जर है मठ मंदिर, हो सकती है अप्रिय घटना प्रशासन घृतराष्ट की भूमिका में बंद किये है आंख मंदिर के महंत चाहते है दिव्य भव्य मंदिर का हो निर्माण, बाहर से आने वालों रामभक्तों की हो सेवा अयोध्या धाम जर्जर मठ मंदिरों को नगर निगम प्रशासन ने जारी कर रखा है नोटिस, नही हो रहा कोई कार्यवाही अयोध्या। प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या प्राचीनतम नगरों में से एक है और अभी भी यहां सैकड़ों हजारों वर्ष पुराने मंदिर और भवन जो जर्जर स्थिति में है, और जैसी बरसात पिछले दो दिनों से हो रही है वह कभी भी गिर सकते हैं, नगर निगम प्रत्येक वर्ष सावन मेला के पहले लिस्ट भी जारी करता है, मकान मालिकों और मंदिर के महंतों को नोटिस भी दी जाती है लेकिन कार्यवाही नहीं होती कहीं मंदिर के महंत और किराएदार का विवाद चल रहा है कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है तो कहीं मकान मालिक और किराएदार का झगड़ा चल रहा है उनका भी मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन जब स्वर्ग द्वार स्थित यादव मंदिर की घटना घटती है मंदिर भर भर के गिर जाता है तब कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आता ऐसे में जब राम मंदिर का निर्माण हो गया है प्रत्येक दिन लाखों श्रद्धालु अयोध्या धाम आते हैं, सावन मेला में तो यह संख्या और बढ़ जाती है फिर नगर निगम कोई ऐसा रास्ता क्यों नहीं निकलता जिससे अयोध्या के जर्जर मंदिरों मकान से मुक्ति मिले और आने वाले श्रद्धालुओं को खतरे से बचाया जा सके। आपको बताते हैं अगर आप खुली निगाह से देखेंगे तो राम पथ से जैसे ही मणि रामदास छावनी की तरफ मुड़ेंगे सड़क के दोनों तरफ जर्जर मकान ही दिखाई देंगे यह एरिया प्रमोद बन में आता है और यह वह सड़क है जो बीच से सीधे मणि रामदास छावनी और बाईपास को जोड़ती इस पर भीड़ का दबाव तब बढ़ जाता है जब लता मंगेशकर चौक से श्री राम पथ रोक दिया जाता है श्रद्धालुओं को लेकर के ई-रिक्शा सैकड़ो की संख्या में आते हैं और बाईपास से दूरी कम होने के कारण और प्रसिद्ध पीठ मणिरामदास छावनी में चार धाम मंदिर, वाल्मीकि भवन का भी दर्शन हो जाता है इसका उपयोग लोग पैदल भी करते हैं।सर्वाधिक जर्जर मंदिर व भवन स्वर्गद्वार मुहल्ले में हैं। इनके अलावा राम की पैड़ी, नयाघाट, देवकाली, तुलसीबाड़ी, कजियाना व अन्य मुहल्ले हैं। अधिकांश भवन व मंदिर रख-रखाव न होने के कारण जर्जर हो चुके हैँ। मालिकाना या किराएदारी के विवाद भी हैं। ज्यादातर भवनों को लेकर मुकदमेबाजी चल रही है। इन भवनों में रहने वाले बेहद कम किराए पर हैं। यही वजह कि वे जान का खतरा होने के बावजूद इन भवनों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इतने कम किराए पर अन्यत्र मकान मिलना भी संभव नहीं है। प्रमोद वन स्थित छोटी कुटिया मंदिर है जो अति प्राचीन है उस मंदिर में किराएदार जबरिया कब्जा कर रखे है। मंदिर के महंत चाहते है दिव्य भव्य मंदिर का निर्माण हो सके और बाहर से आने वालों रामभक्तों की सेवा हो सके। पर ये किराएदार है कि भवन खाली करने को तैयार नही है। भवन पूरा जर्जर है कभी भी गिर सकता है,कोई अप्रिय घटना हो सकती है। प्रशासन घृतराष्ट की भूमिका में आंख बंद किये हुए है।

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