: खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना ‘माह-ए-रमजान': नन्हे मिंया
बमबम यादव
Sun, Apr 2, 2023
माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश का वकफा है बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है: मोहम्मद इमरान

अयोध्या। रमजान का महीना चांद के दीदार के साथ शुरू होता है। इस वर्ष में ये पवित्र महीना 2 मार्च से शुरू हो हुआ। रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत की जाती है। इन दिनों नमाज पढ़ने का विशेष महत्व माना जाता है।
रामनगरी अयोध्या को गंगा जमुनी तहजीब के धरती भी कहा जाता है। यहां पर मुस्लिम समाज के पैगम्बर हुए है।अयोध्या में हिंदू मुसलमान एक साथ रहते हुए सभी के सुख दुख में शरीक भी होते है। गंगा जमुनी तहजीब के सबसे बड़े झंडाबरदार समाजसेवी मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया कहते है कि खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश का वकफा है बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है। मौजूदा हालात में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। नन्हे मिंया कहते हैं कि इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है और भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस माह में दोजख नरक के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत की राह खुल जाती है।नन्हे मिंया कहते है कि कुरान में जिक्र है कि रमजान माह में अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद साहब को अपने दूत के रूप में चुना है। इसलिए रमजान का महीना मुसलमानों के लिए पाक है।
समाजसेवी मोहम्मद इमरान अंसारी कहते है कि इस्लाम मजहब में रमजान के महीने को बेहद पाक पवित्र माना जाता है। मान्यता के अनुसार रमजान महीना अल्लाह की इबादत के लिए होता है। इस महीने रोजा उपवास रखें जाते हैं। पांचों वक्त की नवाज अदा की जाती है। कहा जाता है कि इस महीने की जाने वाली इबादत का सवाब अन्य महीनों से कई गुना ज्यादा मिलता है। रोजेदार के लिए अल्लाह जन्नत की राह खोल देता है। इमरान कहते हैं कि इस्लाम की रवायत के अनुसार रमजान के महीने में रोजा रखना अनिवार्य होता है। रमजान के महीने में सहरी और इफ्तार ये दो महत्वपूर्ण रस्में होती हैं। रमजान के दिनों में सुबह के समय में जब भोजन किया जाता है तो उसे सहरी कहते हैं। सहरी दिन में सूरज के निकलने से पहले किया जाता है। सेहरी करने को सुन्नत कहते है। वहीं दिनभर रोजा रखने के बाद शाम के समय जब सूरज डूब जाता है तब रोजा खोला जाता है इसे इफ्तार कहा जाता है। रमजान माह के तीस दिनों को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है पहला हिस्सा अशरा रहमत का होता है। दूसरा अशरा मगफिरत का और तीसरा हिस्सा अशरा यानि दोजख से आजादी दिलाने का होता है। इस महीने रोजेदार को झूठ नहीं बोलना चाहिए।
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