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: सेवा हि परमोधर्म को चरितार्थ कर रहा सियाराम किला झुनकी घाट

बमबम यादव

Mon, Jan 22, 2024

सियाराम किला मंदिर में प्रतिष्ठित हुए प्रथम आचार्य, महंत करुणानिधान शरण ने आचार्यों का किया अभिनन्दन

जिसकी साधना में निरंतरता होगी, उसी की उपासना भी सफल होगी: प्रभंजनानन्द शरण

अयोध्या। भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठित के साथ ही आज सिद्धपीठ श्री सियाराम किला झुनकी घाट के प्रथम आचार्य परम पूज्य महंत मिथिलाशरण महाराज का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठित हुए। वैदिक आचार्यों ने पूजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता झुनकी पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण ने किया। तो वही दूसरी तरफ शाम को व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक प्रेममूर्ति स्वामी प्रभंजनानन्द शरण महाराज कर रहें है। कथा के छटवें दिवस स्वामी प्रभंजनानन्द शरण महाराज ने कहा कि भगवान की कोई आकृति नहीं होती है। भक्त जिस भाव से प्रभु में अपनी आस्था रखता है भगवान उसी स्वरूप में भक्त के समक्ष प्रकट होते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को कर्म में निरंतरता बनाकर रखना चाहिए निरंतरता होने से ही सफलता प्राप्त होती है। अभ्यास के द्वारा मुढ़ से मुढ़ व्यक्ति भी विद्वान बन सकता है जिसकी साधना में निरंतरता होती है उसी की उपासना भी सफल होती है। उन्होंने कहा कि कभी भी स्वयं की तुलना दूसरों से न करें अपने भाग्य की तुलना दूसरों से कर व्यक्ति व्यर्थ ही तनाव लेता है। परमात्मा भाग्य का चित्र अवश्य बनाता है मगर उसमें कर्म रूपी रंग तो व्यक्ति स्वयं भरता है। स्वामीजी ने कहा कि हर परिस्थिति में व्यक्ति को प्रसन्न रहना चाहिए कर्म में निरंतरता बनाकर के रखना चाहिए और यह सूत्र अपने जीवन में उतार ले ईश्वर कृपा से जो प्राप्त है वह पर्याप्त है। इस मौके पर सियारामकिला झुनकी घाट के संत साधक व शिष्य परिकर मौजूद रहें।

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