: ऋषि-मुनियों ने भारतीय संस्कृति एवं वेदों के रक्षणार्थ अपने प्राणों की आहुति दी:अनिरुद्धाचार्य
बमबम यादव
Wed, Feb 28, 2024
महायज्ञ के 40 पाठशालाओं में 1700 विद्वान ब्राह्मणों कर रहें दुर्गासप्तशती एवं गणपत्यथर्वशीर्ष पाठ

महायज्ञ मेन सन्त सम्मेलन, श्रीराम कथा, श्रीराम लीला एवं श्रीकृष्ण लीला का हो रहा अद्भुत मंचन
अयोध्या। यज्ञ सम्राट महामण्डलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज के पावन सानिध्य एवं श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज के पावन संयोजकत्व में सरयू तट, गोला घाट, अयोध्या धाम में हो रहे श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्री राम यज्ञ के दौरान प्रातः से लेकर रात्रि तक विविध कार्यकमों की श्रृंखला जारी है, जिसमें प्रखर परोपकार मिशन संस्कृत एकेडमी के डॉयरेक्टर डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी के निर्देशन में महायज्ञ की विशाल 40 पाठशालाओं में 1700 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा दुर्गासप्तशती एवं गणपत्यथर्वशीर्ष पाठ प्रतिदिन किए जा रहे हैं। महायज्ञ की 100 कुण्डीय विराट महायज्ञशाला में यजमानों द्वारा यज्ञाचार्य पं० लक्ष्मीकान्त दीक्षित काशी के आचार्यत्व में प्रातः के समय पूजन एवं सायंकाल में हवन करने का सौभाग्य प्रतिदिन प्राप्त हो रहा है। महायज्ञ स्थल पर निर्मित भगवान श्रीराम मन्दिर एवं माता दुर्गा जी के मन्दिर में भी प्रतिदिन पूजन-आराधना का कम जारी है। महायज्ञ स्थल पर निर्मित दो अतिरिक्त यज्ञशालाओं में श्रौत यज्ञ के अन्तर्गत अग्निहोत्रद्वय श्रीराम द्विवेदी के द्वारा मित्रविन्दाष्टिः एवं श्री अरविन्द पाण्डेय के द्वारा चातुर्मास्येष्टिः की जा रही है।
महायज्ञ के विशाल पण्डाल में प्रातः सन्त सम्मेलन एवं सायंकाल के समय श्रीराम कथा की अर्मतवर्षा हो रही। महायज्ञ के लीला मण्डप में दिन के समय श्रीराम लीला एवं रात्रि के समय श्रीकृष्ण लीला का अद्भुत मंचन श्रीराधा सर्वेश्वर रासमण्डली, वृन्दावन के द्वारा प्रतिदन किया जा रहा है। सायं के समय प्रतिदिन 7 बजे से सरयू आरती का भी दर्शन भक्तों को प्रतिदिन प्राप्त हो रहा है।कोशलेस सदन पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य स्वामी श्री विद्या भास्कर जी महाराज जी की अध्यक्षता में आज का सन्त सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित वक्ताओं ने वेद की महिमा पर प्रकाश डाला गया। वृन्दावन से पधारे ख्यातिलब्ध कथा व्यास अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने सन्त सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि सभी जानते हैं कि किस तरह से हजारों वर्षों तक भारत पहले मुगलों से एवं बाद में अंग्रेजों के आधीन रहा है। मुगल एवं अग्रेज, दोनों ने ही भारतीय संस्कृति व वेदों को नष्ट करने का कार्य किया है किन्तु भारत के ऋषि-मुनियों ने भारतीय संस्कृति एवं वेदों के रक्षणार्थ अपने प्राणों की आहुति देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब यह जिम्मेदारी हम सब पर है कि हमारी वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ी इससे लाभान्वित कैसे हो।
श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयुक्त सचिव माता चिदानन्दमयी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे वेदों का सार, इतना विस्तृत है कि इसे जानने-समझने हेतु हमारी आयु भी कम पड़ जाएगी। माता जी ने सन्त सम्मेलन के माध्यम से नारी शक्ति को यह सन्देश दिया कि हमें अपने अधिकार क्षेत्र में ही रहकर कार्य करना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में कुछ स्त्रियां समान अधिकार की होड़ में वेदाध्ययन का हठ करती हैं, जबकि शास्त्रों ने नारियों को यह अधिकार नहीं दिया है, अतः हम लोगों के लिए शास्त्र सम्मत कार्य करना ही श्रेष्ठ होगा। उन्होंने कहा कि रामायण, गीता जी आदि ग्रन्थ भी वेदों की ही देन हैं, हमें उनका अध्ययन कर समाज को प्रेरित करना चाहिए। जगद्गुरु स्वामी विद्याभास्कर जी महाराज ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वेदों एवं भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने हेतु श्री अयोध्या धाम के मखौड़ा क्षेत्र में सामाजिक संस्थाओं अथवा सरकारी तन्त्रों के द्वारा एक ऐसे विश्वविद्यालय की स्थापना करने का विचार प्रदान किया जिससे सम्पूर्ण हिन्दू समाज लाभान्वित होकर वेदों के सन्देश को सम्पूर्ण विश्व को प्रदान कर सके। सन्त सम्मेलन में स्वामी प्रखर जी महाराज जी एवं डॉ० स्वामी राघवाचार्य जी महाराज के साथ उपस्थित वक्ताओं में आचार्य निरंजनाचार्य महाराज, डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी, श्री जगन्नाथ मन्दिर, अयोध्या धाम के पीठाधीश्वर राघवदास महाराज एवं केशवदास महाराज ने भी सभा को सम्बोधित किया। महायज्ञ स्थल पर तिलकराज शर्मा, श्रीमती आरती शर्मा, राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, कमल किशोर चौधरी, प्रवीन नेमानी, श्रीमती सुषमा अग्रवाल, श्रीमती सोनिया चौधरी, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, राजकुमार जिन्दल, अभिषेक गुप्ता, डॉ० जी०सी० पाठक, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, दिनेश मिश्रा, सीताराम बडोनी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।
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