Friday 6th of November 2026

ब्रेकिंग

श्रीराम एवं मां सीता को परमाराध्य एवं उनके दूत हनुमान जी को परमाचार्य के रूप में स्वीकृत- शिरोधार्य

दिगंबर अखाड़ा में हुतात्मा कारसेवक स्मृति सभा का भव्य आयोजन, चंपत राय बोले- 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान

भक्ति आंदोलन मंच न्यास का विस्तार, महंत परशुराम दास बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बाल योगी रामदास को प्रदेश की कमान

सर्किट हाउस में हुआ स्वागत, बादल बोले- संगठन को मिलेगी नई मजबूती

हनुमानगढ़ी स्थित आश्रम में जुटे संत-महंत और राजनीतिक हस्तियां, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी कर चुके थे आश्रम

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

: रामराज्य का अर्थ प्रेम राज्य है और प्रेम हमें समर्पण सिखाता है: रामदिनेशाचार्य

बमबम यादव

Mon, Jul 8, 2024

हरिधाम गोपाल पीठ में चल रहें महोत्सव में पहुंचे भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह,लिया संतों का आशीर्वाद

कथा में मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालु, तुलसी दास छावनी पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास, पत्थर मंदिर पीठाधीश्वर महंत मनीष दास व डांडिया मंदिर पीठाधीश्वर गिरीश दास का हुआ विशेष सम्मान

अयोध्या। सच्चा धर्म हमें प्रेम सिखाता है।प्रेम की व्याख्या हमें भरत चरित्र में दिखाई देता है।प्रेम हमें स्वार्थहीन होने सिखाता है।नि:स्वार्थता की अग्नि में तपकर ही प्रेम अपने उज्जवल रूप में अभिव्यक्त होता है।सर्वथा स्वार्थ शून्य व्यक्ति ही संसार में परिवर्तन ला सकता है।भरत जी अवध का सिंहासन ग्रहण करे ,धर्म उसका समर्थन कर रहा था।पर भरत के अन्त: करण ने इसका समर्थन नहीं किया। उक्त बातें जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने हरिधाम गोपाल पीठ मंदिर में आयोजित राम कथा के अष्टम-दिवस में कही।उन्होंने कहा कि भरत ने धर्म के स्थान पर परमधर्म को स्वीकार किया।भरत का परम धर्म है-सेवा धर्म।जिस रामराज्य को महाराज दशरथ अयोध्या में लाना चाह रहे थे उसके शिल्पकार श्रीभरत बने।क्योंकि रामराज्य की आधारशिला प्रेम है।श्रीभरत के रामप्रेम ने कैकेयी की कठोरता को भी पिघला रख दिया।रामराज्य का अर्थ प्रेम राज्य है और प्रेम हमें समर्पण सिखाता है। जगद्गुरु जी ने कहा कि जहाँ पर केवल देना ही देना है लेना कुछ नहीं है उसी को रामराज्य कहते है।श्रीराम और भरत दोनों की मान्यतायें एक है। जीवन में त्याग श्रेष्ठ है।जहाँ त्याग होगा वहाँ संघर्ष का स्थान ही नहीं रहेगा।उन्होंने कहा कि आजकल भारत देश का हर नेता रामराज्य लाने की बात करते दिखाई देते हैं।किन्तु ध्यान रहे रामराज्य न तो कहीं से लाना पड़ता है न बनाना पड़ता है हमें स्वयं पहले रामराज्य के योग्य नागरिक बनना पड़ता है।जिस दिन भरत की तरह प्रेम और त्याग हमारे जीवन में आ जायेगा हम सम्पत्ति को अपनी नहीं प्रभु की मान लेगें उसी दिन रामराज्य की अवधारणा सत्य हो जायेगी। कथा में भक्तों का भारी हुजूम रहा। कथा में आज पूर्वाचल के लोकप्रिय नेता भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पहुंचे। व्यासपीठ का पूजन कर बृजभूषण शरण सिंह ने संतों का आशीर्वाद भी लिया। इनके साथ हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज, कैसरगंज के लोकप्रिय युवा सांसद करण भूषण सिंह के प्रतिनिधि सोनू सिंह,बृजभूषण शरण सिंह के अयोध्या प्रतिनिधि महेंद्र त्रिपाठी आदि लोग मौजूद रहें। महोत्सव का संचालन आचार्य रमेश शास्त्री व देखरेख गौरव दास ने किया। रामकथा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें