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: जिसकी साधना में निरंतरता होगी, उसी की उपासना भी सफल होगी: रामप्रपन्नाचार्य

बमबम यादव

Sun, May 26, 2024

प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में महोत्सव का छाया उल्लास, मंदिर में बह रही श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा

कहा,तीर्थ में कथा श्रवण बड़े ही भाग्यशाली लोगों को मिलता है, अयोध्या बड़ी ही पवित्र भूमि है

अयोध्या। भगवान की कोई आकृति नहीं होती है। भक्त जिस भाव से प्रभु में अपनी आस्था रखता है भगवान उसी स्वरूप में भक्त के समक्ष प्रकट होते हैं। यह बात रविवार को रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य कुटी श्रीधाम वृंदावन के स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने कही। श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस में स्वामी जी ने कहा कि व्यक्ति को कर्म में निरंतरता बनाकर रखना चाहिए निरंतरता होने से ही सफलता प्राप्त होती है। अभ्यास के द्वारा मुढ़ से मुढ़ व्यक्ति भी विद्वान बन सकता है जिसकी साधना में निरंतरता होती है उसी की उपासना भी सफल होती है। उन्होंने कहा कि कभी भी स्वयं की तुलना दूसरों से न करें अपने भाग्य की तुलना दूसरों से कर व्यक्ति व्यर्थ ही तनाव लेता है। परमात्मा भाग्य का चित्र अवश्य बनाता है मगर उसमें कर्म रूपी रंग तो व्यक्ति स्वयं भरता है। रामप्रपन्नाचार्य श्री ने कहा कि हर परिस्थिति में व्यक्ति को प्रसन्न रहना चाहिए कर्म में निरंतरता बनाकर के रखना चाहिए और यह सूत्र अपने जीवन में उतार ले ईश्वर कृपा से जो प्राप्त है वह पर्याप्त है। स्वामी जी ने कथा में पधारे सभी भक्तों को भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए ब्रज की यादों से जोड़ा। उपस्थित सभी भक्तवृन्द ब्रज की पावन कथा से जुड़कर आनंदित हुए। साथ ही भगवान की माखन चोरी की लीलाओं का वृतांत सुनाया की किस प्रकार छोटे से कन्हैया गोपियों के घर जा जाकर ग्वाल बालों की टोली लेकर माखन की चोरी करते थे। और अपनी शरारत से सबका मन मोह लेते थे।उन्होंने कहा कि सभी ब्रजवासी कन्हैया को बहुत प्यार करते थे। अनेक बाल लीलाओं के साथ अनेक राक्षसों का उद्धार किया। आचार्य श्री ने गोवर्धन पूजा की महिमा बताते हुए बताया कि श्री गिरिराज जी हैं कलियुग के एकमात्र देवता। जिसके ध्यान मात्र से होता है सभी बाधाओं का निवारण।महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास जी महाराज कर रहें है। महोत्सव की देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें। कथा में प्रतिदिन रामनगरी के विशिष्ट संतों का समागम हो रहा। कथा श्रवण करने आए सभी संतो महंतों का अभिनन्दन स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज के भक्तों ने स्वागत किया। कथा में कमलेश सुषमा बसेड़िया, नितिन आरती बसेड़िया, सनत, सनातन बसेड़िया, कटारे परिवार, दीक्षित परिवार, शर्मा परिवार उपाध्याय परिवार, श्रोती परिवार, रेडियेंट परिवार व मारुतिनंदन परिवार विशेष रूप से मौजूद रहें।

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