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: राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की: रामानुजाचार्य

बमबम यादव

Sat, Feb 25, 2023

जानकी महल ट्रस्ट में श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा की बह रही रसधार

अयोध्या। श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा श्री जानकी महल ट्रस्ट अयोध्या में चल रही है। व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन जगद्गुरू रामानुजाचार्य रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने रामायण का सार भगवान का नाम की महिमा पर व्याख्यान किया।उन्होंने कहा कि भगवान राम हमारे जीवन के प्रत्येक रंग में समाए हुए हैं। हमने पाश्चात्य सभ्यता को काफी हद तक अपनाया परंतु राम राम कहना नहीं छोड़ा। हम प्रतिदिन अच्छे बुरे अवसरों पर राम नाम ही लेते हैं। आज भी हम राम राम या जय रामजी की कहकर अभिवादन करते हैं। जीवन के अंतिम समय में बिछुड़ने पर राम-राम का ही उल्लेख होता है। समस्या के आने पर विपत्तियों से घिरने पर हे राम' अथवा अरे राम सहसा ही हमारे मुख से निकल पड़ता है। जीवन में प्रसन्नचित होने पर हम रामजी की कृपा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है। बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की। राम नाम स्वयं ज्योति है, स्वयं मणि है। राम नाम के महामंत्र को जपने में किसी विधान या समय का बंधन नहीं है। राम का नाम जपने से हो जाता है मानव का कल्याण।

रामानुजाचार्य जी ने बताया कि राम से बड़ा राम का नाम है अर्थात राम मिले ना मिले लेकिन राम का नाम जपना मात्र ही मानव के कल्याण के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि राम नाम में बहुत शक्ति है, क्योंकि राम का नाम वैसे तो केवल दो अक्षर का ही होता है परंतु इस दो अक्षर के नाम में संपूर्ण संसार का रहस्य छिपा है। इसलिए 2 अक्षर के इस प्यारे से नाम राम का जाप प्रत्येक प्राणी को करना चाहिए, क्योंकि राम नाम ही एक ऐसा मूल मंत्र है जिसका जाप करने से मनुष्य अपने सांसारिक दु:खों पीड़ा से मुक्ति पा सकता है और संसार रूपी भवसागर से पार उतर सकता है।कथा से पूर्व आयोजक कुसुम सिंह व डॉ० दिनेश कुमार सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया।

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