: हरि अनंत, हरि कथा अनंता की गवाह है रामनगरी अयोध्या
बमबम यादव
Fri, Jan 12, 2024
अयोध्या की सबसे प्राचीनतम रामलीला अवध आदर्श रामलीला न सिर्फ भारत बल्कि कई देशों में छोड़ी अपनी अमिट छाप

नाम,रुप, लीला व धाम सभी का समावेश है श्री अयोध्या धाम में: महंत मनीष दास
सिंगापुर, कंबोडिया, श्रीलंका, थाइलैंड, इंडोनेशिया आदि देशों के रामदल मंच पर सजीव करेंगे राम के जीवन पर आधारित रामलीला
अयोध्या। राम सबके है। अलग-अलग रूपों में वह सबके लिए आदर्श है। परिवार, समाज, पुत्र, भाई, पति और राजा के रूप में। इन्हीं खूबियों के नाते वह मर्यादा पुरुषोत्तम है। उनकी व्यापकता और स्वीकार्यता की भी यही वजह है। इसी नाते भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में राम अपने अलग-अलग स्वरुप में देखे जाते हैं। 'सबके राम' का यह स्वरूप अयोध्या में जीवंत हो रहा है। इसका जरिया बन रहे हैं देश और विदेश के ये कलाकार जो 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर राम के पूरे जीवन को मंच पर सजीव करेंगे। इसका सिलसिला शुरू भी हो गया है।
ऐसा भला कौन है, जो दुनियाभर को आदर्श राज्य का मंत्र देने वाले भगवान राम के बाल, पिता, मित्र, पति और सखा के स्वरूप पर मोहित न हो जाए। भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र और उनकी लीला यात्रा को जानने-समझने की चाह रखने वाले देशों की संख्या भी बढ़ रही है। धर्म और जाति से ऊपर भगवान राम के चरित्र को जानने-समझने के लिए सभी अयोध्या की रामलीला को देखना चाहते हैं। समय-समय पर दुनिया के अलग-अलग देशों के लोगों की यह इच्छा रामनगरी की रामलीला मंडलियों ने पूरी भी की।
पत्थर मंदिर पीठाधीश्वर महंत मनीष दास के संयोजन वाला कलाकारों का दल अवध आदर्श रामलीला मंडल के नाम से सुविख्यात है और रामलीला मंचन के क्षितिज पर प्रतिष्ठापित है। करीब सात वर्ष पूर्व चिरनिद्रा में लीन मंडल के मुख्य शिल्पी श्रीमहंत जयराम दास को रामनगरी में रामलीला मंचन का पितामह माना जाता है। उनके नेतृत्व में अवध आदर्श मंडल के कलाकारों की पहचान न केवल देशव्यापी बनी, बल्कि 2012 में इस दल ने थाईलैंड, त्रिनीडॉड आदि देशों में अपनी चमक बिखेरी। तब की विदेश यात्रा अयोध्या शोध संस्थान के संयोजन में थी।
अवध आदर्श रामलीला मंडल के अध्यक्ष महंत जयरामदास व्यास के उत्ताराधिकारी पत्थर मंदिर के पीठाधीश्वर महंत मनीष दास बताते हैं कि रामलीला की सबसे प्राचीन परंपरा की नींव हमारे 8वें दादा गुरु स्वामी माणिक दास जी महाराज ने करीब तीन सौ वर्ष पहले रखी थी। तब मंच की रामलीला नहीं होती थी। हमारे बचपन में केवल राजद्वार पर रामलीला होती थी जो अयोध्या राजा द्वारा कराई जाती थी। आज अयोध्या विश्व पटल पर आनंदित हो रही है। चारों तरह खुशियों का माहौल है। महंत मनीष दास खुशी जाहिर करते हुए कहते है आज अयोध्या धाम का नव निर्माण हो रहा है। हमारे आराध्य भगवान रामलला का भव्य प्राण प्रतिष्ठा देश के यशश्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी करने जा रहें है। अयोध्या ही नही पूरे भारत में आनंद का वातावरण है। महंत मनीष कहते है कि नाम,रुप, लीला व धाम भगवत प्राप्ति का साधन है। अयोध्या जी में सभी का समावेश है, ये बहुत ही गर्व की बात है कि हम अयोध्यावासी हैं। आज हमारे मुख्यमंत्री योगी जी द्धारा अयोध्या में श्रीरामलाला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर सिंगापुर, कंबोडिया, श्रीलंका, थाइलैंड और इंडोनेशिया आदि देशों के कलाकारों को मंचन के लिए आमंत्रित किया गया है।
कई राज्यों के रामदल भी मंच पर प्रदर्शित करेंगे श्रीराम का उदात्त चरित्रः दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ देश के कई राज्यों यथा मप्र, हिमाचल, उत्तराखंड हरियाणा, कर्नाटक, सिक्किम, केरल, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, लद्दाख और चंडीगढ़ के रामदल भी श्रीराम के उदात्त चरित्र को मंच पर सजीव करेंगे। यह सिलसिला शुरूहो गया है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी यह जारी रहेगा।देश और दुनिया के 3500 कलाकारों का अयोध्या में होगा संगमः इस बावत अयोध्या देश और दुनिया के करीब 3500 कलाकारों का संगम बनेगी। हर रोज अलग-अलग रामदलों के करीब 500 कलाकार मंच पर रामकथा का मंचन कर गोस्वामी तुलसीदास के रामचरित मानस की इन पक्तियों, 'हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहि, सुनहिं बहुविधि सब सता' को मूर्त रूप देंगे।
रामकथा के जरिए टूटेगी भाषा और मजहब की दीवार दरअसल श्रीराम का चरित्र इतना आदर्श है कि कोई समाज इसकी अनदेखी कर ही नहीं सकता। यही वजह है कि भाषा और मजहब की सारी हदों से परे आज भी दुनिया के कई देशों में रामलीलाओं का मंचन होता है। मसलन 86 फीसद मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया और अंग्रेजी भाषी त्रिनिदाद में भी रामलीलाओं का मंचन होता है। बौद्धिस्ट देश श्रीलंका, थाइलैंड और रूस भी इसके अपवाद नहीं है। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित माउंट मेडोना स्कूल में पिछले 40 वर्षों से जून के पहले हफ्ते में रामलीला का मंचन होता है। आजादी के पहले पाकिस्तान स्थित कराची के रामबाग की रामलीला मशहूर है। अब इसका नाम आरामबाग है और मैदान की जगह कंक्रीट के जंगल है। मान्यता है कि सोता के साथ शक्तिपीठ हिंगलाज जाते समय भगवान श्रीराम ने इसी जगह विश्राम किया था।
भारत में 500 साल पुराना है रामलीलाओं का इतिहास।रही बात भारत की तो रामलीला का इतिहास 500 साल से भी पुराना है। हर दो-चार गांव के अंतराल पर अमूमन कार के एकम से लेकर एकादशी के दौरान रामलीला के आयोजन होते हैं। यहां के लोगों के लिए राम उनकी आस हैं, भरोसा और दाताराम है। वह जो चाहेंगे व्ही होगा। होइडि सोई जो राम रचि राखा। लिहाजा वर्षों पहले कठिन हालातों में गिरिमिटिया के रूप में जो लोग मॉरीशस, टोबैगो, त्रिनिदाद सूरीनाम आदि देशों में गये, वह अपने साथ भरोसे के रूप में राम को ले गये। उनकी पहल से राममंदिर भी बने और रामलीलाएं भी शुरू हुई। फिजी जैसे देश में 50 से अधिक रामलीला मंहलिया है। त्रिनिदाद का रामलीला मंदिर करीब 100 साल पुराना है
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