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: गुरुदेव महाराज विलक्षण प्रतिभा के धनी संत रहे: महंत कुलदीप दास

बमबम यादव

Tue, Jul 8, 2025
गुरुदेव महाराज विलक्षण प्रतिभा के धनी संत रहे: महंत कुलदीप दास श्रद्धा से याद किए गए श्रीमहंत सरयू दास जी महाराज, मंदिर में 9वीं पुण्यतिथि धूमधाम से मनाई गई अयोध्या। रामनगरी के सुप्रसिद्ध पीठ राघव मंदिर रामघाट के पूर्वाचार्य श्रीमहंत सरयू दास महाराज की 9वीं पुण्यतिथि निष्ठापूर्वक मनाई गई। रामनगरी के संत-महंत एवं धर्माचार्यों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। पुण्यतिथि पर सोमवार को मठ प्रांगण में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। श्रद्धांजलि सभा में अयोध्यानगरी के संत-महंत, धर्माचार्यों ने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संतों ने उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। पूर्वाचार्य के पुण्यतिथि महोत्सव पर संत-महंत, भक्तजनों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर राधव मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर युवा महंत कुलदीप दास जी महाराज ने बताया कि आश्रम में गुरुदेव श्रीमहंत सरयू दास महाराज की 9वीं पुण्यतिथि मनाई गई। पुण्यतिथि महोत्सव पर अयोध्याधाम के सभी संत-महंत, धर्माचार्य सम्मिलित हुए। जिन्होंने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर श्रद्धासुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। संतों ने फिर अपनी वाक् पुष्पांजलि अर्पित की। गुरुदेव महाराज विलक्षण प्रतिभा के धनी संत रहे। जिन्होंने अयोध्यानगरी में एक विशाल आश्रम का कार्यभार संभाला और उसका सर्वांगीण विकास किया। जहां ठाकुरजी की सेवा संग गौ, संत, विद्यार्थी व आगंतुक सेवा सुचार रूप से चल रही है। सभी उत्सव, समैया, त्योहार आदि परंपरानुसार मनाया जा रहा है, जिसमें मंदिर से जुड़े शिष्य-अनुयायी, परिकर सम्मिलित होकर पुण्य के भागीदार बनते हैं एवं अपना जीवन कृतार्थ करते हैं। मठ अपने उत्तरोत्तर समृद्धि की ओर अग्रसर है। महाराज श्री गौ व संत सेवी थे। जिनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। सरलता तो उनमें देखते ही झलकती थी। उनका अनुसरण कर मैं आगे बढ़ रहा हूं। जिन्होंने सेवा को ही अपना धर्म माना। सेवा धर्म को अंगीकार किया। अपने शिष्य-अनुयायियों को सेवा का पाठ पढ़ाया। साथ ही धर्म के लिए प्रेरित किया। उनका मानना था कि सेवा से बढ़कर और कोई धर्म नही है। सेवा ही परमोधर्मा अर्थात सेवा ही परम धर्म है। उनके मार्गदर्शन में कई सेवा प्रकल्प के कार्य संचालित हुए। जिनमें बहुत से सेवा प्रकल्प के कार्य आज भी चल रहे हैं। उनके अंदर संतत्व के सारे गुण रहे। रामनगरी के सभी संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। महंत कुलदीप दास महाराज ने आए हुए संत-महंत, धर्माचार्य, विशिष्टजनों का स्वागत-सम्मान किया। इस अवसर पर महंत रामकृष्ण दास, महंत रामनरेश शरण, महंत उत्तम दास, महंत राममिलन दास, महंत शैलेश दास, पुनीत दास, संत दास आदि संत-महंत, भक्तजन मौजूद रहे।

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