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: शिद्दत से शिरोधार्य हुए बाबा गोमती दास व श्री रघुनन्दनशरण जी महाराज

बमबम यादव

Mon, Mar 20, 2023

श्री हनुमत निवास के संस्थापक आचार्य सिद्ध संत बाबा गोमती दास जी एवं श्री रघुनन्दन शरण जी की पुण्यतिथि पर संत धर्माचार्यों ने अर्पित किया श्रद्धा सुमन

अयोध्या। संतों की सराह कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है जिन्होंने त्याग, साधना से न सिर्फ अयोध्या बल्कि पूरे भारत में राम भक्ति की अलख जगाई इन महापुरुषों की साधना की जीवंत गवाही दे रहा ये अयोध्या के मठ मंदिर व लाखो शिष्य परिकर। उन्हीं संत महापुरुष में एक रहे सिद्ध पीठ श्री हनुमत निवास के संस्थापक पूज्य बाबा गोमती दास जी महाराज।
अनंत विभूषित बाबा श्री गोमती दास जी महाराज व श्री रघुनन्दन शरण जी महाराज की पुण्यतिथि महोत्सव महंत श्री सियाशरण जी महाराज के अध्यक्षता व हनुमत निवास के महंत प्रख्यात साहित्यकार डा. मिथलेश नन्दनी शरण जी के संयोजन में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इसके उपलक्ष्य में उभय पूर्वाचार्यों की अर्चना की गयी।
बाबा गोमती दास जी महाराज का जन्म पंजाब में चैत्र कृष्ण पक्ष त्रयोदशी संवत 2076 में ब्राह्मण परिवार के यहां हुआ था और वह 10 वर्ष की उम्र में ही संत हो गए। श्री महाराज जी अमृतसर के दुग्याना मंदिर के महंत सरयू दास जी महाराज से वैराग्य की दीक्षा ली और कुछ दिन बाद काशी विश्वनाथ जी महाराज ने स्वप्न दिखाया और श्री महाराज जी चित्रकूट में बांके सिद्ध गुफा में भजन करने लगे।
चित्रकूट के साथ श्री महाराज जी तीर्थों का भ्रमण करते रहे और एक दिन हनुमान जी की कृपा और आदेश से अवध पधारे और लक्ष्मण किला पर आ गए और श्री सीताराम में लीन हो गए श्री महाराज जी जानकी वरण वरण की करुणामई सत्संग के आनंद में लीन हो प्रभु चरण के अनुराग में खो गए और नित्य प्रति प्रभु की लीला का आनंद लेने लगे कुछ दिन बाद श्री महाराज जी लक्ष्मण किला के पास हनुमत निवास नामक स्थान की स्थापना की और नित्य प्रति भजन करने लगे। श्री हनुमत निवास मंदिर के महंत प्रख्यात साहित्यकार डा.मिथलेश नन्दनी शरण जी महाराज ने आये हुए अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीके से किया।रसिकोपासना के परमाचार्य लक्ष्मणकिलाधीश महंत मैथली रमण शरण, श्रीहनुमत सदन के महंत अवधकिशोर शरण, बावन मंदिर के महंत वैदेहीवल्लभ शरण 'बावन जी', महामण्डलेश्वर गिरीशदास, महंत शशिकान्त दास समेत अनेक सन्त-महान्त, विद्वान् और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहें।

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